गुणवत्ता चक्र प्रक्रिया - quality cycle process
गुणवत्ता चक्र प्रक्रिया - quality cycle process
गुणवत्ता चक्र की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों से होकर गुज़रती है:
1. समस्या की पहचान: सर्वप्रथम चक्र के सदस्यों से किसी विशेष क्षेत्र से सम्बंधित समस्या पर अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए कहा जाता है। बिना किसी आपत्ति के इन सभी विचारों को लेखबद्ध कर लिया जाता है। इस प्रकार अनेक बैठकों के बाद इनमें से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आते हैं। अब छंटनी की प्रक्रिया आरंभ होती है। अन्य क्षेत्रों से सम्बंधित मुद्दे, संघ सम्बन्धी मुद्दे, व्यक्तिगत परिवेदनाएं आदि जहाँ सदस्यों की कोई विशेष प्रतिक्रिया, ज्ञान तथा अनुभव नहीं होता है, ऐसे मुद्दों को किनारे किया जाता है तह सिर्फ अत्यधिक महत्वपूर्ण मुद्दों को ही आगे की कार्यवाही हेतु संज्ञान में लिया जाता है। चक्र नेता अपेक्षित दिशा में सदस्यों द्वारा अति गंभीर समस्याओं की पहचान करने, जिन्हें सदस्यों के पर्याप्त ध्यान की आवश्यकता है, से सम्बंधित चर्चाओं को प्रोत्साहित करता है।
जब सब कुछ सही ढंग से होने लगता है, तो कई अवसरों पर सदस्यों को ऐसा लग सकता है की चक्र के समक्ष अब अन्य कोई समस्या नहीं है। यही वह समय होता है जब नेता को, सदस्यों द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति के लिए दूसरे बुद्धिशीलता सत्र (brainstorming session) का आयोजन करना चाहिए।
2. समस्या का विश्लेषण: इस चरण में सदस्यों से यह अपेक्षा की जाती है की वह समस्या पर अपना ध्यान केन्द्रित करें, उनका गहन विश्लेषण करें तथा संगठन पर उनके प्रभाव को जानने का प्रयास करें। समस्याओं के कारण तथा उनके संभावित प्रभावों को चित्रों,
तालिकाओं तथा चार्ट के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है। अन्य विभागों के सहयोग से प्रत्येक कारण की वैधता का गहन परीक्षण किया जाता है।
3. समाधान संबंधित सुझाव: एक बार समस्याओं के मुख्य कारणों एवं उनके संभावित परिणामों को चिन्हित करने के उपरांत उनके सर्वाधिक उपयुक्त समाधान विकल्पों को स्टीयरिंग समिति ( Steering Committee) द्वारा प्रबंधन के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। प्रबंधन के सामने इस प्रस्तुतीकरण में, नेता तथा सदस्य अपने द्वारा किए गए परियोजना कार्य तथा सुझाव की विवेचना अपने प्रबंधक के सम्मुख रखते हैं। यह प्रस्तुतीकरण सहभागिता, सम्प्रेषण तथा पहचान के एक अति रोचक प्रारूप का प्रतिनिधित्व करता है। सामान्यतः इस तरह के प्रस्तुतीकरण हर तीन महीने के बाद होते हैं।
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