गरीबी के कारण - reasons of poverty

गरीबी के कारण - reasons of poverty


भारत में व्याप्त गरीबी के कारण निम्नलिखित है: 


(क) जनसंख्या में तीव्र वृद्धि-भारत में जनसंख्या का भार बहुत अधिक है। जनसंख्या की दर 1. 9% वार्षिक रही है अर्थात देश में प्रतिवर्ष 1 करोड़ 70 लाख तक जनसंख्या बढ़ जाती है। अब हमारे देश की जनसंख्या बढ़ते-बढ़ते विस्फोटक स्थिति तक पहुंच चुकी है। इस वृद्धि का परिणाम यह हुआ कि प्रति व्यक्ति आय कम हुई है। परिणामस्वरूप देश में गरीबी बढ़ रही है। 


(ख) पूंजी का अभाव- भारत में प्रति व्यक्ति आय कम होने के कारण लोगों की बचत करने की क्षमता कम है। परिणामस्वरूप देश में पूंजी का अभाव है। पूंजी के अभाव में न तो कृषि का विकास ही संभव होता है और न ही उद्योगों का विकास।

पूजी निर्माण कम होने के कारण देश में उत्पादन स्तर और आयस्तर बहुत नीचा है। इस प्रकार पूजी का अभाव गरीबी का कारण रहा है।


(ग) प्राकृतिक साधनों का पूर्ण उपयोग न होना:- भारत में प्राकृतिक साधनों की प्रचुर मात्रा है, परंतु पूजी के अभाव, उद्यम की कमी तथा तकनीकी ज्ञान के उपलब्ध न होने के कारण देश के इन प्राकृतिक साधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है। परिणामस्वरूप उत्पादन एवं प्रति व्यक्ति आय का स्तर बहुत निम्न रहा है और यह देश की गरीबी का कारण बना है। 


(घ) आय का असमान वितरण:- भारत मे आय का असमान वितरण है।

57 वर्षों के आयोजन के बावजूद भी देश में अमीर तथा गरीब का अंतर बढ़ता जा रहा है। देश में केवल 20 औद्योगिक घरानों के हाथों में देश की आधे से अधिक संपत्ति है, जबकि अधिकांश लोग दरिद्रता और गरीबी से जीवन व्यतीत कर रहे हैं। 


(ङ) कीमतों में वृद्धि - भारत में सामान्य कीमत स्तर बढ़ता जा रहा है। जब कीमतें बढ़ती है तो मुद्रा की क्रय शक्ति घट जाती है। परिणामस्वरूप मध्यम वर्ग तथा निम्न वर्ग में गरीबी और बढ़ जाती है। भारत में पिछले अनेक वर्षों से बराबर ऐसा हो रहा है और रूपये का मूल्य घटता जा रहा है। इस प्रकार स्फीतिक दशाओं ने भारत की गरीबी को और बढ़ाया है।


(च) विकास की धीमी गति भारत की पंचवर्षीय योजनाओं में विकास की दर बहुत निम्न रही है।

आयोजन काल के 57 वर्षों तक औसतन विकास की दर केवल 3.5% से 5% वार्षिक के बीच रही है। योजना काल में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि की दर मात्र 2 प्रतिशत रही जो कि बहुत कम है। 


(छ) बेरोज़गारी - भारत की निर्धनता का एक प्रमुख कारण बेराजगारी की समस्या है। भारत के शहरों तथा गांवो में खुली व छिपी हुई बेरोज़गारी आमतौर से देखने को मिलती है। रोज़गार कार्यालयों मे पंजीकृत बेराजगारों की संख्या एक करोड़ से भी अधिक है। भारत में इस समय लगभग 6 करोड़ व्यक्ति बेरोजगार है।


(ज) कृषि का पिछड़ापन - कृषि हमारे देश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्त्वपूर्ण पेशा है।

देश के 65% लोग कृषि पर आश्रित है और जनसंख्या में वृद्धि के साथ-साथ कृषि पर जनसंख्या का भार बढ़ता जा रहा है। ब्रिटिश शासनकाल में कृषि उपज बहुत कम होती थी और भारतीय कृषि की अवस्था बहुत पिछड़ी हुई थी। कृषि के पिछड़ेपन के कारण प्रति एकड़ उपज बहुत कम होती है और कृषकों की प्रति व्यक्ति आय भी बहुत कम रह जाती है। परिणामस्वरूप देश में गरीबी बढ़ती है।


(झ) औद्योगिक पिछड़ापन:- भारत की अर्थव्यवस्था असंतुलित और एकाकी है अर्थात यह मुख्यतः कृषि प्रधान है। कृषि पर अत्यधिक निर्भरता के कारण देश की अर्थव्यवस्था अनिश्चित तथा कमजोर रही है।

ब्रिटिश शासनकाल में उनकी स्वार्थी नीति के परिणामस्वरूप उद्योगों का विकास नहीं हुआ, बल्कि बहुत से भारतीय उद्योग नष्ट हो गए। हमारे देश में भारी और मूलभूत उद्योगों का अभाव रहा है। इन उद्योगों के अभाव से न केवल धनोत्पादन, रोजगार एवं व्यापार आदि पिछड़ी अवस्था में रहे हैं और देश गरीब रहा है, बल्कि औद्योगिक पिछड़ापन कृषि के पिछड़ेपन का भी कारण रहा है।


(ञ) दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली - भारत में अधिकांश लोग अनपढ़ हैं और शिक्षित लोगों को भी ठीक प्रकार की शिक्षा नहीं मिली है। यहां की शिक्षा प्रणाली रोजगार प्रेरक नहीं है। परिणामस्वरूप उच्च शिक्षा पाने के बाद भी व्यक्ति बेरोजगार रहता है।


(ट) राजनीतिक कारण भारत की गरीबी का एक महत्त्वपूर्ण कारण राजनीतिक रहा है। लगभग 200 वर्षो के ब्रिटिश शासन तथा अंग्रेजों द्वारा औपनिवेशिक नीति ने देश की अर्थव्यवस्था को असहाय, क्षीण एवं गरीब बना दिया। उन्होंने ऐसी नीति अपनाई कि भारतीय उद्योग नष्ट हो गए। औद्योगिक विकास और कृषि विकास कार्यों की ओर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया तथा विभिन्न तरीकों से भारतीय संपत्ति को लूटकर इंग्लैंड ले गए और अंत में भारत बहुत गरीब और आश्रित देश बनकर रह गया।


(ठ) सामाजिक कारण:- सामाजिक कारण भी भारत की गरीबी का महत्वपूर्ण तत्व रहा है। भारतवर्ष अनेक जातियों, भाषाओं और धर्मों वाला देश है, परिणामस्वरूप यहां अलग-अलग सामाजिक संस्थाएं है जो अनेक रीति-रिवाजों, रूढ़िवादिता तथा अंधविश्वास से ग्रस्त है। संयुक्त परिवार के कारण परिश्रम का हनन हुआ, उत्तराधिकार के नियम के कारण कृषि मे उपविभाजन तथा विखंडन की समस्या पैदा हुई। धार्मिक विचार, भाग्यवादिता तथा पर्दा प्रथा के कारण देशवासी धनोत्पादन कार्यों में पूर्ण योगदान नहीं दे पाते। इन सब कारणों से देशवासी गरीब रहे है अतः भारत गरीबी के दुष्चक्रों में फसा हुआ है।