नियुक्ति की प्रक्रिया - recruitment process

नियुक्ति की प्रक्रिया - recruitment process


संगठन आवश्यकता के अनुरूप सबसे योग्य अनुकूल व्यक्तियों की नियुक्ति करता है इसके लिए निम्न प्रक्रिया को पूरा करना होता है।


1. जनशक्ति की आवश्यता का निर्णय नियुक्ति प्रक्रिया में सबसे पहले जनशक्ति कर्मचारियों की आवश्यकता का अनुमान लगाना होता है। यह निर्णय लिया जाता है. कि व्यक्तियों को किस समय अधिक आवश्यकता है और किस समय कम आवश्यकता है। जब ज्यादा व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। तो संगठन में पहले से उपलब्ध व्यक्तियों से जरूरते पूरी की जाती है। लेकिन किसी कारणवश अगर व्यक्तियों से ज्यादा कार्य हो तो अन्य और व्यक्तियों की भर्ती की जाती है।


2. भर्ती तथा चयन भर्ती कर्मचारियों को चुनने और उन्हें संगठन में मानव संसाधनों की आपूर्ति का एक स्रोत हैं। भर्ती संस्था के लिए योग्य व्यक्ति खोज करने उन्हें पदों की जानकारी देने तथा उन्हें पदों के लिए आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करने की क्रिया है।

चयन भर्ती प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद शुरू होती है। संगठन की सफलता, कुशल और योग्य कर्मचारियों पर निर्भर करती है, क्योंकि कुशल मानव संसाधन संस्था की पूजी होता है। यह संस्था की ख्याति और लाभ को प्रभावित करता है। चयन संस्था में कार्य पाने के लिए इच्छुक व्यक्तियों में से योग्य व्यक्ति या उम्मीदवारों चयनित करने वाली प्रक्रिया है। भर्ती और चयन का सामान्य उद्देश्य है कि सही नौकरी के लिए सही व्यक्ति का चयन करना। किसी भी संस्था में सबसे योग्य और अनुकूल व्यक्ति का चयन करने के लिए दो तरीके अपनाने चाहिए (1) अनेक प्रकार के परीक्षण हैं जो उनकी योग्यता कुशलता और चतुराई को दिखाने का मौका देते है (2) साक्षात्कार एक महत्वपूर्ण तरीका है, जिससे प्रतियोगी का व्यक्तित्व सामने आता है और अतिरिक्त गुण का पता चलता है।


3. प्रशिक्षण और विकास प्रशिक्षण की आवश्यकता प्रायः सभी संस्थान को होती है

प्रशिक्षण कर्मचारियों की कार्य क्षमता, कुशलता योग्यता आदि बढ़ाने के लिए किया जाता है। एक अच्छे प्रशिक्षण से कर्मचारियों की कुशलता और उत्पादन क्षमता का विकास होता है यह कर्मचारी और संगठन दोनों के लिए लाभदायक होता है। सभी वर्ग के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण होता है। एक औपचारिक प्रशिक्षण परीक्षण और मूल जोखिम से बचाएगा। प्रशिक्षण प्रायः व्यर्थ के व्ययों में कमी और लागत में कमी कर उत्पादन में वृद्धि करता है।


विकास का मतलब प्रबंधकीय या संगठनात्मक स्टाफ के प्रशिक्षण से है। विकास के द्वारा भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता का विकास होता है। विकास से नई तकनीकी ज्ञान की प्राप्ति होती है विकास व्यक्ति के सभी दृष्टिकोणों को विकसित करता है।


4. पदोन्नति तथा हस्तांतरण कर्मचारियों को उनकी योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर समय समय पर उनकी पदोन्नति की जाती है, जिससे उनकी कार्य क्षमता और प्रतिष्ठा बढ़ती है और जब सामान्य पद पर कार्य और वेतन पर एक कार्य से दूसरे कार्य में भेजा जाता है, उसे हस्तांतरण या स्थानातरण कहते हैं।


5. पारिश्रमिक किसी भी कर्मचारी के श्रम या सेवा के बदले दिए जाने वाला भुगतान पारिश्रमिक कहलाता है। कर्मचारियों को उनकी सेवा का उचित भुगतान दिया जाना चाहिए, ताकि वह अपने कार्य से संतुष्ट रहे, उनका संगठन पर भरोसा बना रहे और उनकी कार्य दक्षता का विकास हो सके। मजदूरी प्रायः बिताए समय पर दी जाती है। कर्मचारियों में कार्य के प्रति रुचि पैदा करने के लिए श्रम भुगतान की प्रक्रिया के साथ-साथ किसी प्रोत्साहन योजना का भी विकास करना चाहिए।