साझेदारी का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) - Registration of Partnership
साझेदारी का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) - Registration of Partnership
भारतीय साझेदारी अधिनियसम, 1932 के अनुसार, साझेदारी का पंजीयन कराना अनिवार्य न होकर एच्छिक है, लेकिन व्यावहारिक दृष्टि से साझेदारी का पंजीयन करान आवश्यक है क्योंकि पंजीयन न कराने से साझेदारी को कुछ गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। साझेदारी के पंजीयन संबंधी नियम अक्टूबर 1933 से भारत में लागू किये गये हैं। इस कार्य हेतु प्रत्येक राज्य में एक-एक राजिस्ट्रार की नियुक्ति की गई हैं जिसे रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स कहते हैं।
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