प्रशिक्षण की प्रासंगिकता - relevance of training

प्रशिक्षण की प्रासंगिकता - relevance of training


किसी संगठन को प्रशिक्षण देने के योगदान स्पष्ट होने चाहिए। प्रमुख मूल्य हैं:


1) उत्पादकता में वृद्धिः


कौशल में वृद्धि सामान्य तौर पर उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि में करती है। हालांकि आधुनिक नौकरियों की तेजी से बढती हुई तकनीकी प्रकृति, उपलब्धि का न्यूनतम स्तर को प्राप्त करने के लिए भी व्यवस्थित प्रशिक्षण की मांग करती है।


(ii) मनोबल में वृद्धिः


आवश्यक कौशल की प्राप्ति, सुरक्षा और अहँ संतुष्टि जैसी बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ती करती है।

संगठित एवं समन्वयित कार्मिम तथा मानवीय सम्बन्ध कार्यक्रम मनोबल वृद्धि में योगदान कर सकते हैं।


iii) पर्यवेक्षण / निरीक्षण में कमी:


प्रशिक्षित कर्मचारी वह है जो सीमित पर्यवेक्षण के साथ अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। कर्मचारी और पर्यवेक्षक दोनों ही पर्यवेक्षण की मात्र में कमी चाहते हैं लेकिन जब तक कि कर्मचारी पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हों. अधिक स्वायत्तता अथवा स्वतंत्रता देना संभव नहीं है।


(iv) कम दुर्घटनाएं:


उपकरण और कार्य- परिस्थितियों में दोषों की तुलना में अधिक दुर्घटनाएं कर्मचारियों के कौशल एवं ज्ञानाभाव, के कारण होती हैं।

कार्य कौशल और सुरक्षात्मक अभिवृत्ति, दोनों ही पहलुओं में उचित प्रशिक्षण दुर्घटनाओं में कमी की ओर योगदान दे सकते हैं।


V) संगठनात्मक स्थिरता में वृद्धिः


प्रमुख कर्मियों के नुकसान के बावजूद किसी संगठन की प्रभावशीलता को बनाए रखने की क्षमता केवल कुशल कर्मचारियों के एक पर्याप्त संग्रह के निर्माण के द्वारा विकसित की जा सकती है। कार्य में लघुकालीन परिवर्तनों के प्रति समायोजन की क्षमता के लिए ऐसे बहुआयामी कौशल वाले कर्मचारियों की आवश्यकता है जिन्हें मांग के अनुसार स्थानांतरण की अनुमति दी जा सकती है।