अनुसंधान डिजाइन प्रक्रिया ,समस्या को परिभाषित करना - research design process, problem definition

अनुसंधान डिजाइन प्रक्रिया ,समस्या को परिभाषित करना - research design process, problem definition

अनुसंधान प्ररचना प्रक्रिया का यह प्रथम एवं सबसे जटिल अंग है जिसमें अनुसंधान समस्या को परिभाषित किया जाता है। अन्य शब्दों में सर्वप्रथम समस्या को परिभाषित किया जाता है जिसके लिए अनुसंधान करना है समस्या परिभाषा में यह सही निर्धारण सम्मिलित है कि प्रबंध समस्या क्या है या निर्णय क्या है और किस प्रकार की सूचनाओं की आवश्यकता है जो अनुसंधान द्वारा उत्पन्न की जा सकती है तथा जो समस्या के समाधान में सहायक हो सकती हैं।


इनके अनुसार समस्या परिभाषा में निम्न चार चरण सम्मिलित है-


(अ) समस्या स्पष्टीकरण


(ब) स्थिति विश्लेषण


(स) प्रतिरुप विकास


(द) सूचना आवश्यकताओं का निर्दिष्टीकरण


(अ) समस्या स्पष्टीकरण से आशय है कि वास्तव में समस्या क्या है? इसका मूलभूत लक्ष्य यह निश्चित करना है कि प्रबंध समस्या पर निर्णय लेने वालों का प्रारंभिक वर्णन सही है तथा अनुसंधान के लिए उपयुक्त सम्बन्धित क्षेत्र पर प्रकाश डालता है। इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं कि यदि एक गलत प्रबंध समस्या के रूप में रूपांतरित किया जाता है तो प्रबंध को उपयोगी सूचनाएं उपलब्ध करने की संभावना बहुत कम होती है। उदाहरण के लिए, एक विपणनकर्ता गिरती हुई बिक्री देखकर यह सोच सकता है कि विज्ञापन के साधन प्रभावोत्पादक नहीं थे और वह अनुसंधानकर्ता से विज्ञापन प्रभावोत्पादकता अध्ययन के लिए कह सकता है। अनुसंधानकर्ता यह ज्ञात करता है कि नवीन बिकी नीति के कारण जिसमे उपभोक्ताओं को वस्तुओं की धीमी सुपुर्दगी होती है, ऐसा हुआ है। यहां समस्या पूरी ही बदल गयी है।

जहां गिरती बिक्री का कारण अप्रभावी विज्ञापन समझा गया वहा दोपपूर्ण वितरण नीति वास्तविक कारण निकला। सार रूप में, अनुसंधानकर्ता से पूर्व यह जानना अति आवश्यक है कि वास्तव में समस्या क्या है।


(ब) स्थिति विश्लेषण प्रबंध समस्या को समस्या स्थिति के संदर्भ में ही समझा जा सकता है। स्थिति विश्लेषण उन चलों पर प्रकाश डालता है जिन्होंने प्रबंध समस्या को उत्पन्न किया है। अन्य शब्दों ने कम्पनी एवं व्यापार के वातावरण से परिचित होने के लिए अनुसंधानकर्ता को पुस्तकालय अध्ययन अधिकारियों से साक्षात्कार कम्पनी बाजार का विश्लेषण तथा सामान्य उद्योग की स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए ताकि प्रबंध समस्या को ज्यादा स्पष्ट तरीके से समझा जा सके टल एवं डॉकिन्स का मत है कि स्थिति विश्लेषण प्रबंध समस्या को समझने के लिए पर्याप्त सूचनाएं प्रदान कर सकता है या संकेत करता है कि प्रबंध समस्या के रूप में प्रारम्भ में क्या समझा गया था।


(स) प्रतिरुप विकास जब एक बार अनुसंधानकर्ता समस्या स्थिति को सुदृढ रूप में समझ लेता है तो प्रबंध के समस्या स्थिति प्रतिरुप को जहां तक स्पष्ट रूप में संभव हो, प्राप्त करना आवश्यक होता है। समस्या स्थिति प्रतिरुप परिणामों, सगत चलों एवं परिणामों के चलों के संबंधों का वर्णन है जो कि इच्छित हैं। यहां अनुसंधानकर्ता प्रबंधक से निम्न प्रश्नों के उत्तर जानना व प्राप्त करना चाहता है।


(i) समस्या के समाधान में क्या उद्देश्य इच्छित है?


(ii) उद्देश्य पूर्ति कौन से चल निर्धारित करते है? 


(iii) उद्देश्यों से वे कैसे संबधित है?


अनुसंधानकर्ता को चाहिए कि वह इन प्रश्नों का उत्तर स्पष्ट रूप में प्राप्त करने का प्रयास करें अनुसंधानकर्ता प्ररचना के इस चरण में निम्न दो सूचना सोत अत्याधिक उपयोगी हो सकते हैं, प्रथम गौण समक स्त्रोत जो कि स्थिति विश्लेषण से भी बाहर होते है ये स्त्रोत व्यापारिक जर्नल, लेख, निर्दिष्ट स्थिति में चलों से संबंधित विशेष प्रतिवेदन आदि हो सकते हैं। द्वितीय स्त्रोत, चयनित का विश्लेषण है।


(द) सूचना आवश्यकताओं का निर्दिष्टीकरण अनुसंधान समस्या समाधान उपलब्ध नहीं कर सकता है। समाधान के लिए अधिशासियों के सम्मुख संगत - सूचनाएं उपलब्ध करता है। इस प्रकार समस्या परिभाषा प्रक्रिया का प्रदाय निर्णय लेने वालों की सहायता हेतु इच्छित सूचनाओं का एक स्पष्ट विवरण है।

एक बार जब यह विवरण तैयार हो जाता है, तो आवश्यक सूचनाओं का मूल्य निर्दिष्ट करना आवश्यक हो जाता है।