क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की पुन: संरचना - Restructuring of Regional Rural Banks

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की पुन: संरचना - Restructuring of Regional Rural Banks


आर.आर.बी की हानि की समस्या को हल करने के लिए तथा इनकी क्षमता में सुधार लाने के लिए हाल ही के वर्षों में इनके प्रचालन को पुनः संरचित करने के लिए तथा इनमें नई पूँजी डालने के लिए प्रयास किए गए है। भारतीय रिजर्व बैंक ने आर आर बी की पुनः संरचना के लिए उपाय सुझाने के लिए एम.सी. भंडारी समिति की नियुक्ति की थी। भण्डारी समिति की सिफारिशों पर 1994-95 में 49 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनः संरचना एवं पुनर्जीवन के लिए लिया गया। आर आर.बी. की प्रबंधकीय प्रचालन संबंधी तथा कार्य प्रणाली से संबंधित संरचना के लिए नाबार्ड की विकासीय क्रिया योजनाओं द्वारा कार्य शुरू किया गया है और आवर्ती योजना के आधार पर पाँच वर्षों की समय अवधि के लिए इनके तुलन पत्रों को शुद्ध किया जाएगा।


दिसंबर 1995 में नाबार्ड द्वारा नियुक्त बासु समिति ने फेज 11 के अंतर्गत 68 आर.आर.बी की व्यापक पुन संरचना के चयन की सिफारिश की।

इस संदर्भ में ब्याज दरों शाखाओं के पुनः आवंटन, साख आवंटन, साख की दिशा और पूँजी के अनुप्रेरण के साथ-साथ मानवशक्ति नीति की प्रमुख से पहल की गई। भारत सरकार ने 1994-98 तथा 1998-99 के बीच आर.आर.बी. के. पुन पूँजीकरण के लिए 18675 करोड़ रु की राशि विमोचित की।


इसके अतिरिक्त 1998-99 में रु. 305.3 करोड़ का अतिरिक्त इक्यूटी समर्थन भी दिया गया। 1988-99 में 196 आर आर बी में से 175 आर आर बी पूर्णतया या आंशिक रूप से पुनः पूँजीकृत किए जा चुके थे जबकि 2 आरआरबी को किसी समर्थन की आवश्कता नहीं थी।

केवल 19 आर. आर. बी. पूँजीकरण कार्यक्रम परिधि के बाहर थे। इसके अतिरिक्त आर.आर.बी. की निर्गमित शेयर पूँजी की राशि भी रु 75 लाख से बढ़ा कर रु. 1 करोड़ कर दी गई। उत्पादकता, नकदी प्रबंध अग्रिम पोर्टफोलियों तथा वसूली निष्पादन में नाबार्ड इन बैंकों की कार्यप्रणाली को मानीटर करता है। नाबार्ड ने आर.आर.बी के लिए निम्नलिखित अल्पकालीन उपायों का भी एक पैकेज तैयार किया है।


(i) उनको अपने सेवा क्षेत्र आभारों से मुक्त कर दिया गया है।


(ii) उन्हें अपने गैर-लक्षीय समूह वित्त को भी 40 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति दे दी गई है।


(iii) उनको अपनी कुछ हानि देने वाली शाखाओं को कृषि उत्पाद केंद्रों, मार्केट यार्ड, मण्डी आदि में आंबटित करने की अनुमति दे दी गई है। 


(iv) उन्हें विस्तार पटल के खोलने की भी स्वतंत्रता दे दी गई है। 


(v) गैर-कृषि क्रियाओं को पूरा करने के लिए उन्हें इस बात की अनुमति भी दे दी गई है कि वे अपनी क्रियाओं की रेंज को बढ़ाए तथा गहन करें। आशा की जाती है कि आरआरबी की इस पुनः सरचना से ये बैंक अब अधिक कार्यकुशलता से कार्य कर सकेंगे।