अधिकार जो अनुबंधर द्वारा बदले जा सकते हैं - Rights that can be changed by the Contractor

अधिकार जो अनुबंधर द्वारा बदले जा सकते हैं - Rights that can be changed by the Contractor


साझेदारों के वे अधिकार जो अनुबंध द्वारा बदले जा सकते हैं निम्नलिखित हैं:


1. व्यवसाय के संचालन में भाग लेने का अधिकार प्रत्येक साझेदार को व्यवसाय के संचालन में भाग लेने का अधिकार होता है चाहे उसने फर्म में कितनी भी पूँजी क्यो न लगाई हो । 


2. सम्मति प्रकट करने का अधिकार प्रत्येक साझेदार को व्यवसाय से संबंधित प्रत्येक विवादयुक्त विषय को समझने एवं उसके संबंध में अपनी सम्मति प्रकट करने का अधिकार है।


3. बहियों के निरिक्षण का अधिकार प्रत्येक साझेदार को फर्म की बहियों तक पहुँचने, निरीक्षण करने तथा प्रतिलिपी प्राप्त करने का अधिकार है। 


4. लाभ और हानि में हिस्सा का अधिकार प्रत्येक साझेदार को फर्म के लाभ और हानि में हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार है।


5. लाभों में से पूँजी पर ब्याज प्राप्त करने का अधिकार- यदि कोई साझेदार अपने द्वारा लगाई गई। पूँजी पर ब्याज पाने का अधिकारी है तो वह फर्म के लाभों में से ही देय होगा। 


6. पूँजी के अतिरिक्त धन पर ब्याज यदि कोई साझेदार फर्म के कारोबार में अतिरिक्त पूँजी ऋण के रूप में लगाता है तो वह उस अतिरिक्त पूँजी पर ब्याज पानेका अधिकारी होता है।


7. क्षतिपूर्ति कराने का अधिकार- यदि किसी साझेदार को कारोबार के उचित संचालन में एवं फर्म को किसी अकस्मात संकट से बचाने में कोई हानि होती है, तो फर्म उस क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी होगा। 


8. फर्म की संपत्ति पर अधिकार- यदि कोई विपरीत अनुबंधन हो तो फर्म की संपत्ति पर सभी साझेदारों का सम्मिलित अधिकार होता है।


9. साझेदारी से अलग होने का अधिकार प्रत्येक साझेदार को अन्य साझेदारों की सहमति से साझेदारी से अलग होने का अधिकार होता है। इसके अलावा ऐच्छिक साझेदारी की दशा में कोई भी साझेदार दूसरे साझेदारों को सूचना देकर अलग हो सकता है।


10. साझेदारी से न निकाले जाने का अधिकार किसी भी साझेदार को बहुमत से साझेदारी से नहीं निकाला जा सकता है। यह तभी संभव है जबकि अन्य साझेदारों न सद्भावना में व्यवहार करके उसे निकालने का निर्णय लिया हो।


11. साझेदारी से अलग हुए साझेदार को प्रतिस्पर्धात्म करोबार करने का अधिकार- यदि कोई विपरीत अनुबंध न हो तो प्रत्येक साझेदार को जो फर्म से अलग हो चुका है, प्रतिस्पर्धात्मक कारोबार करने का अधिकार है।


12. अलग होने पर साझेदार का नाम और व्याज पाने का अधिकार- यदि किसी साझेदार की मृत्यु हो गई है यह अन्य किसी कारण से अलग हो गया हो और शेष साझेदार बिना हिसाब चुकाये हुए फर्म की अविभाजित संपत्ति से कारोबार चला रहे हैं तथा अलग हुए साझेदार था उसका उत्तराधिकारी वह लाभ या 6% वार्षिक दर से ब्याज पाने का अधिकारी है जो उसके हिस्से की संपत्ति से फर्म को प्राप्त होती है।