सांयोगिक अनुबंधों के प्रवर्तनीयता संबंधी नियम - rules of enforceability of contingent contracts

सांयोगिक अनुबंधों के प्रवर्तनीयता संबंधी नियम - rules of enforceability of contingent contracts


सांयोगिक अनुबंधों के प्रवर्तनीयता संबंधी नियम निम्नलिखित हैं :


i. किसी भावी अनिशिचित घटना के घटने पर प्रवर्तनीय अनुबंध भारतीय अनुबंध अधिनियम धारा 32 के अनुसार, "किसी भावी अनिश्चित घटना के घटित होने पर किसी कार्य को करने अथवा न करने का सांयोगिक अनुबंध, राजनियम द्वारा उस समय तक प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता, जब तक कि घटना घटित नहीं हो जाती। यदि घटना का घटित होना असंभव हो जय तो अनुबंध व्यर्थ होगा।


ii. किसी भावी अनिश्चित घटना के घटित होने पर प्रवर्तनीय अनुबंध भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 33 के अनुसार,

“किसी भावी अनिश्चित घटना के घटित न होने पर किसी कार्य को करने अथवा न करने का सांयोगिक अनुबंध उस समय प्रवर्तित कराया जा सकता है, जबकि घटना का घटित हो असंभव हो जय और पहले नहीं।"


iii. घटित होने वाली असंभव घटना के घटित होने वाली असंभव घटना के असंभव हो जाने पर प्रवर्तनीय अनुबंध - भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 34 के अनुसार, "यदि भावी घटना जिसपर कोई अनुबंध सांयोगिक हो किसी व्यक्ति के अनिर्दिष्ट समय में कार्य करने की रीति है, तो वह घटना उस समय असंभव हुई मानी जाएगी जबकि वह व्यक्ति कोई कार्य करे, जिससे उस निश्चित समय के अन्दर उसका कार्य करना असंभव हो जय ।"


iv. निर्दिष्ट अनिश्चित घटना के समय में घटने पर प्रवर्तनीय अनुबंध भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 35 के अनुसार, “सांयोगिक अनुबंध जो कि किसी निर्दिष्ट अनिश्चित घटना के निश्चित समय में घटित न होने पर निर्भर होते हैं, राजनियम द्वारा उस समय प्रवर्तित कराये जा सकते हैं जबकि निश्चित समय समाप्त हो जाता है और घटना घटित नहीं होती या निश्चित समय के समाप्त होने से पूर्व ही तय हो जाता है कि घटना घटित नहीं होगी।"


V. असंभव घटनाओं पर आधारित सांयोगिक ठहरावों का व्यर्थ होना भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 36 के अनुसार, “किसी असंभव घटना के घटित होने पर किसी कार्य को करने अथवा न करने का सांयोगिक ठहराव व्यर्थ होता है चाहे ठहराव करते समय पक्षकारों को घटना की असंभवता का पता हो अथवा नहीं।