विक्रय विश्लेषण - sales analysis

विक्रय विश्लेषण - sales analysis


विक्रय विश्लेषण का आशय उस गहन अध्ययन से है जो विक्रय लेखों एवं अभिलेखों का किया जाता है।


जानसन का मत है कि विक्रय विश्लेषण से आशय बिक्री लागत एवं लाभ सबंधी आकड़ों का विश्लेषण है जिसे संगठन अपने आंतरिक विक्रय रिकार्डस से प्राप्त करती है। व्यवसायिक संस्थाओं द्वारा विक्रय आंकड़ों का अध्ययन कर अपनी विपणन व्यूहरचना की विशेषताओं के गुण-दोषों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विक्रय विश्लेपण के बिना विक्रय सेविवर्ग की उपलब्धियों एवं कुशलताओं का ज्ञान संभव नहीं है।


(क) विक्रय परिणाम विश्लेषण विक्रय के परिणाम का विश्लेषण सामान्यतः निम्न तीन आधारों पर केन्द्रित होता है -


(अ) क्षेत्र के आधार पर


(ब) उत्पाद के आधार पर


(स) उपभोक्ता के आधार पर


उपर्युक्त आधारों पर किये जाने वाले गये विश्लेषण में प्रतिवर्ष कम्पनी के विक्रय की तुलना उद्योग के कुल विक्रय से की जाती है। इसके अतिरिक्त, कम्पनी द्वारा जिस बाजार भाग पर अपना अधिकार जमा लिया गया है, उनकी भी गणना की जाती है। क्षेत्र के आधार पर किये जाने वाले विक्रय परिणाम विश्लेषण से कम्पनी की कुल विकय परिणाम में विभिन्न क्षेत्रों के विक्रय परिणाम की जानकारी मिलती है। इससे यह भी पता लगता है कि किस क्षेत्र में आशातित कार्य सम्पन्न नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में सुधारने के लिए प्रयत्न किये जाते है

उत्पाद के आधार पर विक्रय परिणाम विश्लेषण को नियन्त्रण के एक शस्त्र के रूप में भी प्रयुक्त किया जा सकता है अनेक व्यवसायिक संस्थाओं के उत्पाद के आधार पर विक्रय परिणाम से प्राप्त निष्कर्पो द्वारा यह जानकर आश्चर्य होता है कि उनके कुल विक्रय का अधिकांश भाग एक या दो उत्पाद पक्तियों के द्वारा प्राप्त हुआ है शेष के लिए सभी उत्पाद पंक्तियों या योगदान रहा है इस प्रकार के आधार पर विक्रय विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि किस उत्पाद का विक्रय परिणाम में क्या योग रहा है। उपभोक्ता आधार पर विक्रय परिणाम यह जानकारी देता है कि विभिन्न प्रकार के उपभोक्ताओं का विक्रय परिणाम में क्या योगदान रहा है। यह कार्य कम्पनी के खातों, प्रलेखों का वितरण वाहिकाओं द्वारा किया जा सकता है।


(ख) वितरण लागत विश्लेषण जब इस माध्यम से विक्रय विश्लेषण किया जाता है तो कम्पनी की वितरण लागतो का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है इससे विपणन क्षेत्रों की लानदेयता का ज्ञान होता है

अलाभकारी क्षेत्रों या भागों का पता लगाने पर उनके लिए अभिप्रेरक कार्य किये जा सकते है या उन क्षेत्रों का परित्याग किया जा सकता है। क्षेत्र उत्पाद एवं उपभोक्ता की लाभदेयता ज्ञात करने के लिए भी इस विधि का उपयोग किया जा सकता है। वितरण लागत विश्लेषण की दो विचारधाराओं का प्रचलन है- प्रथम इस विचारधारा के अनुसार लाभदायकता का आकलन शुद्ध लाभों के आधार पर किया जाता है, अर्थात शुद्ध लाभ कुल आय समस्त लागत द्वितीय इस विचारधारा के अनुसार मार्जिन में योग द्वारा लाभों को मापा जा सकता है। कुल आय में प्रत्यक्ष लागतों, सामग्री एवं श्रम व्ययों को घटाने पर शेष भाग मार्जिन योग के नाम से जाना जाता है।


(ग) व्यक्तिगत विक्रेता विश्लेषण- विक्रय शक्ति को अधिक कार्यकुशलता एवं प्रभावी बनाये रखने के लिए विक्रय प्रबंधक को समय-समय पर उनका मूल्यांकन करना पड़ता है

कुशलता बढ़ाने के लिए अभिप्रेरणात्मक योजनाएं लागू की जाती है कार्य विशेष के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है। विक्रय शक्ति तो विपणन कार्यों का जीवन रक्त है अतः उसे सदैव उत्कृष्ट बनाये रखने का प्रयत्न करना चाहिए। विक्रय कर्मचारियों के मूल्यांकन के लिए प्राय अध्ययन तालिका प्रत्येक विक्रेता के क्रय-विक्रय को प्रदर्शित करती है। इसके साथ ही उसमें सभावित विक्रय परिणाम औसत दैनिक विक्रय तथा विक्रय व्ययों का भी उल्लेख होता है।


एक बार समंक उपलब्ध होने के बाद उन्हें उत्पाद, क्षेत्र तथा ग्राहक के अनुसार व्यवस्थित किया जा सकता है। वास्तविक विक्रय समको का तब तक कोई महत्व नही है जब तक कि इनकी तुलना अनुमानित विक्रय से नहीं की जाती है।

उदाहरण के लिए विक्रय में 30 प्रतिशत वृद्धि का तब तक कोई महत्व नहीं होगा, यदि अनुमानित वृद्धि का तब तक कोई महत्व नहीं होगा यदि अनुमानित वृद्धि 40 प्रतिशत है। इस प्रकार विक्रय सूचनाओं विस्तृत संवाहन द्वारा विक्रय क्षेत्रों की शक्ति तथा कमजोरी का पता लगाया जा सकता है। इसका पता वास्तविक विक्रय से प्रमापित विक्रय की तुलना करने पर लगता है। विक्रय विश्लेषण की उपयोगिता को निम्न क्रम में रखा जा सकता है। :


(i) विक्रय पूर्वानुमान के लिए तर्कपूर्ण आधार प्रदान करता है।


(ii) विक्रय सम्बर्द्धन के लिए क्षेत्र निर्देशित करता है।


(iii) नवीन उत्पाद पैकिंग आदि के लिए योजना बनाने में सहायक होता है।


(iv) विक्रेता का कोटा निर्धारण सरल हो जाता है।


(v) विक्रेता के कार्यों का मूल्यांकन किया जा सकता है।


(vi) वास्तविक विक्रय की अनुमानित विक्रय से तुलना की जा सकती है।


(vii) क्षेत्रों का यथार्थपरक चंदवारा समय होता है।


(viii) विक्रय प्रयासों पर नियन्त्रण समय होता है।


(घ) विपणन लागत विश्लेषण प्रत्येक संस्था द्वारा अपने व्यवसाय पर अनेक प्रकार से व्यय किया जाता है। संस्थान के लक्ष्यों की पूर्ति हेतु अम. सामग्री तथा अन्य साधनों के लिए पूजी विनियोजन एवं व्यय होता है। इन सभी को विपणन लागत में सम्मिलित किया जाता है।


अन्य शब्दों में विपणन क्षेत्र योजना बनाने से उपभोक्ता को संतुष्टि के कार्यों पर होने वाला व्यय विपणन लागत के अंतर्गत ही सम्मिलित किया जाता है। चुने तथा कुटेज के अनुसार विपणन लागत. बिल्डिंग, गोदाम विज्ञापन तथा सुपुर्दगी व्यय आदि को सम्मिलित किया जाता है। इसके अनुसार विपणन लागतो का बटवारा उत्पाद, उपभोक्ता या क्षेत्र के अनुसार किया जा सकता है।


विक्रय विश्लेषण की तुलना में विपणन लागत विश्लेषण अधिक कठिन है। इसका कारण यह है कि लागत निवेश समक विभिन्न भागों और स्थितियों में विभाजित कर दिये जाते हैं तथा उनको महत्वपूर्ण भागों में एकत्रित करना और कठिन होता है विपणन लागत विश्लेषण का उद्देश्य इन लागतों को विभिन्न उत्पाद रेखाओं तथा क्षेत्रों से संबंध करना होता है परन्तु अनेक ऐसे भी भाग होते हैं जिनका विश्लेषण किया जा सकता है।