बिक्री आयोजन व विश्लेषण - Sales Planning & Analysis

बिक्री आयोजन व विश्लेषण - Sales Planning & Analysis


विपणन संगठनों में विपणन लेखा परीक्षण विपणन लेखा परीक्षा. कुल बिकवाली के संचालन में एक व्यवस्थित और व्यापक मूल्याकन है। यह व्यक्तिगत बिक्री प्रयास अलग-अलग आदानों के एकीकरण में पहचान बनाने में संगठित कदम है। ये प्रयास अर्तनिहित मान्यताओं का मूल्यांकन करता है। विशेषकर विपणन लेखा परीक्षा बुनियादी उद्देश्यों और विपणन समारोहों और नीतियों को लागू करने में कार्यरत संगठन, विधियों, प्रक्रियाओं और कमियों की नीतियों का एक व्यवस्थित एवं महत्वपूर्ण और निष्पक्ष मूल्यांकन है जो विपणन संगठन द्वारा पूर्व निर्धारण होता है विपणन लेखा परीक्षा तनाव के समर्थको का समग्र बेचने की रणनीति और इसे लागू करने की बजाए टुकड़ो में अलग-अलग घटकों के परीक्षण पर ध्यान केन्द्रित करने का महत्व है।


उदाहरण के लिए विपणन प्रतिनिधि उद्देश्य की दृष्टि खो देते है।

वर्तमान विपणन कार्यकर्ता के छोटे खातों के साथ कार्य सहयोग करने के कारण विपणन मात्रा में कमी आ सकती है इसके बावजूद प्रबंधन इन विपणन कार्यकर्ताओं की विपणन कार्यशैली की तुलना में उनको अपने संगठन में बनाए रखने पर अपना ध्यान केन्द्रित करती है इसके विपरीत, नये प्रेरक व्यवस्थाएं संभवत विपरीत प्रभावकारी हो सकते हैं। ऐसे प्रयत्न से विपणन कार्यकर्ता बड़े उपभोक्ताओं पर अपना ध्यान केन्द्रित करने के लिए प्रेरित होते हैं एक परीक्षा उनकी कमियों और शक्तियों का अवलोकन करने में सहायक होती है। शक्ति को और निखारा जा सकता है जबकि कमियों से उन्मुक्त होने की क्षमता होनी चाहिए। हालांकि लेखा परीक्षण तथ्यों के मूल्यांकन एवं उसके तदोपरान्त विपरीत दृष्टिकोण को पहचानने तथा सूचनाओं को आयोजित करने में सहायक होती है बुनियादी तौर पर विपणन परीक्षा का कोई मानकीय पैमाना नहीं है। प्रत्येक संगठन अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप बिक्री ऑडिट डिजाइन करती है।

साधारणत बिक्री के 6 पहलू इस ऑडिट के सीमा के अंतर्गत आते है।


प्रत्येक बिक्री परिणाम स्पस्टता व्यक्ति उद्देश्य के अंतर्गत आते है, उदाहरणार्थ, एक संगठन चाहता है कि उसका बाजार भाग 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़े, परन्तु उसके लाभांश ने कोई कमी न हो। उद्देश्य इस संदर्भ में दोनों सुव्यक्त एवं अंतर्निहित विपणन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बिना अवरोध अवगत कराता है।


• संगठन इस दृष्टिकोण में यह देखा जाता है कि संगठन के पास ऐसे उद्देश्यों को प्राप्त करने की क्षमता है? क्या योजनाएं और उनके नियन्त्रण के लिए पर्याप्त संसाधन है? 

• क्या संगठन में उपयुक्त जिम्मेवार कर्मचारी है या क्या उसके पास पूर्व निर्दिष्ट उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु न्यूनतम निश्चितता है?


• विधि इस संदर्भ में, यह महसूस किया जाता है कि क्या व्यक्तिगत कारक इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु उन्मुक्त मात्रा में उपलब्ध है या नहीं? क्योंकि गुणवत्ता और कीमत की स्थिरता के संदर्भ में किया गया कोई भी प्रयास बेकार हो सकता है।


• सही प्रक्रिया व्यक्तिगत प्रयासों को कार्यन्वित करने के लिए किए गये प्रयास स्वाभाविक व तर्कसगत स्पष्टतः परिभाषित और स्थिति के अनुरूप होने चाहिए ऐसी प्रक्रियाए किसी कार्मिक या व्यक्ति विशेष की क्षमताओं के लिए प्रभावशील होनी चाहिए।


• व्यक्तिगत सभी कार्मिक जो योजना एवं विपणन कार्य में संलगित हों.

को विपणन प्रोग्राम या आकांक्षाओं के अन्य पहलूओं को क्रियान्वित करने में पूर्णत सक्षम होना एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। आमतौर पर ऐसे कार्मिक क्रय और लाभ बढ़ाने की दिशा में ज्यादा ध्यान देते है न कि पूर्व निर्दिष्ट उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए, जैसे कि बाजार भाग में वृद्धि करना। सार रूप में कहा जा सकता है कि एक संगठन इस आडिट के मानको से अपने विपणन क्षेत्र के फैलाव, बिक्री वृद्धि लाभाप में वृद्धि इत्यादि का निरीक्षण एवं नियन्त्रण रखती है।


सदैव बिक्री विश्लेषण का विस्तृत अध्ययन किया जाता है ताकि विक्रय का आयतन शक्ति या कमजोरियों को मापा जा सके। अगर विक्रय प्रबंधन विक्रय के आकड़ो पर ही ध्यान रखता हो न कि बिक्री सारांश पर ऐसी स्थिति में प्रबंधन मात्र बिक्री संबंधित गतिविधियों या बिकी बल की कार्य शैली का ही मूल्यांकन करता है।

इस तथ्य कि बिक्री का अंश विगत वर्ष के अपेक्षा दो प्रतिशत बढ़ा है परन्तु लाभाप एक प्रतिशत घटा है तो यह चिंता का विषय है कि लाभाश के में गिरावट को कैसे रोका जाय बिक्री विश्लेषण अतिरिक्त सूचना उपलब्ध कराती है, उदाहरण के तौर पर बिक्री के आंकड़े ऐसे उत्पाद से आते हैं जो कम या औसतन या सकल गुंजाइश रखते हैं। विशिष्ट बिक्री विश्लेषण द्वारा प्रबंधन शक्तिशाली एवं कमजोर क्षेत्रों की गहन जानकारी चाहता है जैसे उच्च एवं निम्न आयतन एवं ग्राहकों को संतुष्ट व असंतुष्ट विक्रय आयतन इत्यादि विक्रय विश्लेषण ऐसे सभी तथ्यों का विवरण लेता है जिनसे किसी भी छुपी हुई कमी को अकित किया जा सके और उसे दूर करने के लिए प्रयास किये जा सके। ये प्रयास प्रबंधन को इन कमियों को दूर करने की विधिवत योजना बनाने का आधार भी प्रदान करता है।

ऐसे आवश्यक कदम या प्रयास निम्न हो सकते हैं।


उदाहरणार्थ एक कालीन बनाने वाली कंपनी के एक विक्रय कार्यकारी ने 80 प्रतिशत ग्राहकों में से मात्र 15 प्रतिशत ग्राहको को संतुष्ट करने में सफलता पायी। ऐसी स्थिति अनेकों संगठनों में पायी जाती है। यह मात्र हिमशैल सिद्धान्त है जिसमें सकल आकड़ों का कुछ ही मात्रा स्पष्टत होती है। जबकि ज्यादा कारण अदृश्य होते हैं विक्रय विश्लेषण ऐसी स्थितियों को चिन्हित कर प्रबंधन को इन कारकों से होने वाले नुकसान के बारे में सचेत करता है और उन्हें संगठन के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे प्रयत्न गैर-लाभों वाले कार्यों को कम करने में सहायक होते हैं, परन्तु वे आशातित से कम परिणामों पर विशिष्ट ध्यान देने का सुझाव भी प्रदान करते हैं। इस स्थिति में प्रायः कमजोर या दुर्लभ क्षेत्रों में विपणन कार्मिकों के रख रखाव में अनुमान से ज्यादा कीमत अदा करनी पड़ती है

जैसे कि एक उत्पाद जिसे उत्तेजतापूर्ण ढंग से विस्तृत किया जा सके। ज्यादा बड़े आर्डर देने वाले ग्राहको की अपेक्षा क्षेत्र आर्डर देने वाले ग्राहकों से संपर्क करने में अनावश्यक समय व कीमत व्यय करनी पड़ती है।


आकड़ों की उपलब्धता में परिवर्तन लगभग सभी संगठनों में पाया जाता है। यथासंभव प्रायश्चित करना कुछ संगठनों के पास विस्तृत न होकर मात्र लेखा आंकड़े ही होते हैं और सामान्यतः लेने देन बारे में जानकारी उसकी भौगोलिक स्थिति, नाम, क्षेत्र के चित्रण व्यवस्था उत्पाद का मूल्य निर्धारण, सकल बिक्री के आकड़ इत्यादि ही होते है बिक्री संगठन द्वारा संग्रहित जानकारी में बिक्री उन्मुक्तता उचित नहीं होती है।