प्रतिदर्श का आधार - sample base
प्रतिदर्श का आधार - sample base
प्रतिदर्श सिद्धान्त निम्न दो अवधारणाओं पर आधारित होता है-
(i) सांख्यिकीय नियमितता यह नियम प्राययिकता सिद्धान्त पर आधारित है। किंग के अनुसार यदि बहुत बड़े समूह में से देव निदर्शन द्वारा यथोचित रूप से बड़ी संख्या में पदों या इकाइयों का चुनाव किया जाये तो यह लगभग निश्चित है कि इन इकाइयों में औसत रूप से उस बड़े समूह के सभी गुण विद्यमान होंगे। यदि विपणन अनुसंधान की दृष्टि से विचार करे तो इस नियम के अनुसार व्यक्तियों के एक बड़े समग्र में से यादृच्छिक आधार पर चुने गये समुचित आकार के एक समूह में बड़े समूह में पायी जाने वाली सभी विशेषताएं विद्यमान होगी और सामान्य रूप से इसका अनुपात भी वही होगा, जो बड़े समूह में है।
(ii) महाक जड़ना तथा नियम - यह नियम बताता है कि यदि अन्य बाते समान रहे तो प्रतिदर्श का आकार बढन से परिशुद्धता की मात्रा भी बढ़ जाती है।
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