प्रतिदर्श विधियां - sampling methods

प्रतिदर्श विधियां - sampling methods


समग्र से प्रतिदर्श का चुनाव करने की अनेक विधिया है। विभिन्न प्रकार के अनुसंधान कार्यो के उद्देश्य प्राप्ति, व्यावहारिक दृष्टिकोण व परिस्थिति आदि को ध्यान में रखते हुए समग्र में से निदर्शन इकाइयों के चुनाव के लिए भिन्न-भिन्न रीतियों का प्रयोग किया जाता है। मोटे तौर पर निदर्शन चुनने की विधियों को दो भागों में बांटा जा सकता है-


(i) प्राययिकता प्रतिदर्श


(ii) अप्राययिकता प्रतिदर्श


प्राययिकता निदर्शन के अंतर्गत ऐसी विधिया आती है जिनके प्रयोग करने पर समग्र की किसी भी इकाई के चुने जाने की संभावनाएं बराबर ही होती है। अप्राययिकता निदर्शन में ऐसी विधिया आती हैं

जिनके अनुसार प्रतिदर्श का चुनाव अनुसंधानकर्ता की पसन्द के आधार पर किया जाता है।



प्रतिदर्श विधियां


1. अप्राययिकता प्रतिदर्श इसमे निम्न विधियां सम्मिलित की जाती है


(i) सुविधानुसार प्रतिदर्श इस विधि में अनुसंधानकर्ता अपनी इच्छानुसार निदर्श इकाइयां चुन होता है जैसे वेबसाइट निर्देशिका में से नाम छाट लेना, फेसबुक में प्रबंधकों की सूची में से निदर्श लेना आदि इसमें इकाइयों का चुनाव संयोगवश ही होता है

सामान्यतः जब समग्र एवं निदर्श की इकाइयों को स्पष्ट रूप में परिभापित नहीं किया जाता है तब अनुसंधानकर्ता इस विधि का उपयोग करता है।


(ii) सविचार निदर्शन इस विधि के अनुसार अनुसंधानकर्ता संपूर्ण क्षेत्र में से अपनी इच्छानुसार ऐसी इकाइयां चुन लेता है जो उसके विचार में समग्र का प्रतिनिधित्व करती है। निदर्श में जिन पदों को शामिल करना है, यह पूर्णतया अनुसंधानकर्ता की स्वेच्छा पर निर्भर होता है। इस प्रकार छाटी हुई निदर्श इकाइयों के गहन अध्ययन से प्राप्त परिणामों के आधार पर वह पूरे समग्र के बारे में निष्कर्ष निकाल लेता है। इस विधि की निम्न विशेषताए है- 


• यह विधि उस समय उपयोगी है जब समग्र में से बहुत थोड़ी इकाइयों का चुनाव करना होता है। 


• ऐसी स्थिति में अनुसंधानकर्ता उन इकाइयों का चुनाव करता है जो उसकी दृष्टि में महत्त्वपूर्ण है, और यह संभव है कि देव निदर्शन विधि से चुने जाने वाले निदर्श में वह इकाई आने से रह जाये।


• इसका प्रयोग स्तरित निदर्शन के लिए समग्र को आवश्यक वर्गों में विभाजित करने के लिये किया जा सकता है।


• चूँकि यह विधि सरल एवं मितव्ययीतापूर्ण है अतः विपणन प्रतिनिधि के पास समय की कमी होने की वजह से अपने अनुभव का उपयोग करते हुए,


इस विधि का उपयोग कर सकता है। इस विधि का सबसे प्रमुख दोष है कि इसके अनुसार निदर्श छांटने में अनुसंधानकर्ता की व्यक्तिगत धारणाओं और पक्षपात का पूरा प्रभाव पड़ जाता है.. जिससे परिणाम एकागी और अशुद्ध हो जाते है। अतः इस विधि की सफलता पूर्णत से निदर्श छाटने वाले की ईमानदारी,

ज्ञान, अनुभव और निष्पक्षता पर निर्भर करती है। 


(iii) अध्यंश प्रतिदर्श - यह भी एक प्रकार की सविचार प्रतिदर्श विधि ही है। इस विधि के अंतर्गत निदर्श में सभी प्रकार की इकाइयों का प्रतिनिधित्व हो सके इस हेतु समग्र को कुछ निर्धारित गुणों के आधार पर कई भागों में बाटा दिया जाता है और फिर प्रत्येक भाग से इकाइयों का चुनाव अविभागों में इकाइयों की संख्या के अनुपात के अनुसार कर लिया जाता है।


डीलेन्स के अनुसार, इस विधि द्वारा निदर्श चुनने की विधि निम्न प्रकार है-


• सर्वप्रथम समग्र को परिभाषित करना आवश्यक है।


• फिर यह निर्णय किया जाता है कि समग्र की किन-किन विशेषताओं से परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। 


• फिर चुनी हुई विशेषताओं के आधार पर समय का विश्लेषण किया जाता है।


• तत्पश्चात यह निश्चित किया जाता है कि किन-किन बातों पर नियन्त्रण रखना है।


• इस संबंध में निर्णय किया जाता है कि प्रत्येक खंड से कितनी इकाइया चुनी जानी हैं।


• चुने हुए कारणों को यदि भारित करना है, तो उनके भार निश्चित किये जाते हैं।