उत्पादन से सम्बन्ध प्रक्रियाओं की बचत - Saving of processes related to production

उत्पादन से सम्बन्ध प्रक्रियाओं की बचत - Saving of processes related to production

फर्म द्वारा वृहद स्तर पर उत्पादन करके उत्पादन से सम्बन्ध समस्त प्रक्रियाओं को एक ही स्थान पर सम्पन्न किया जा सकता है, जिससे अनेक तरह की आन्तरिक बचते प्राप्त होती हैं। उत्पादन से सम्बन्ध प्रक्रियाओं की बचत निम्न तरह से सम्भव हैं


(1) सभी अलग-अलग प्रक्रियाओं का संचालन एक ही स्थान पर किया जाय।


(2) अवशिष्ट सामग्री पर आधारित उद्योगों का विकास किया जाय


(3) कच्चे माल की पूर्ति परस्पर सम्बद्ध प्रक्रियाओं में निरन्तर बनाये रखी जाय ।


(4) ईंधन एवं शक्ति के साधनों में बचत की जाय


(5) अलग-अलग व्यापारिक सौदों की मात्रा को न्यूनतम किया जाय।


(2) वित्तीय बचते-बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली फर्म के पास आन्तरिक एवं बाह्य वित्तीय साधन बहुत होते हैं, उन्हें आसानी से तथा कम ब्याज दर पर तुरन्त ऋण मिल जाता है क्योंकि इन फर्मों की साख बहुत अधिक होती है। बड़ी फर्मों के अंश जनता द्वारा तुरन्त खरीद लिये जाते हैं तथा वित्तीय साधन बहुत सीमित होते हैं।


(3) जोखिम उठाने की क्षमता अधिक बड़ी फर्मों द्वारा अनेक वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है, अतः बड़ी फर्म अपनी जोखिम को समस्त उत्पादनों पर फैला देती है,

जिससे फर्म की जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ जाती है। बड़ी फर्म किसी एक उत्पाद की हानि को दूसरे उत्पाद के लाभ से आसानी से समायोजित कर सकती हैं, जबकि छोटी फर्म के लिए इस तरह की हानि, उसके अस्तित्व का सकट बन सकती है। बड़ी फर्म के लिए जोखिम उठाने की बचते, कच्चे माल के स्त्रोतों में विविधता, उत्पादन में विविधता तथा बाजारों की विविधता के कारण हैं।


( 4 ) प्रबन्ध एवं संगठन सम्बन्धी बचते-बड़े पैमाने की फर्म द्वारा प्रबन्ध में विशिष्टीकरण अपनाया जा सकता है, जैसे उत्पादन विभाग, क्रय विभाग, विक्रय विभाग आदि तथा प्रत्येक विभाग का अध्यक्ष एक विशेषज्ञ हो सकता है। विशिष्टीकरण से कार्य कुशल में वृद्धि होगी तथा अपव्यय में कमी आयेगी । ये बचते एक संस्था अपने आकार को बड़ा करके निम्न रूप में प्राप्त कर सकती हैं.


(a) कार्य का भारार्पण संस्था का आकार बड़ा बनाकर एक दक्ष प्रबन्धक छोटे-छोटे अनेक कार्यों को अपने सहायकों को सौंप देता है जिससे उच्च प्रबन्धक के पास महत्वपूर्ण निर्णयों एवं समस्याओं के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। कार्यों का भारार्पण संस्था की कुशलता बढ़ाने में सहायक होता है।


(b) कार्यात्म विशिष्टीकरण-बड़ी संस्था में प्रबन्ध का कार्य कई विभागाध्यक्षों को सौंपा जा सकता है तथा एक विभाग के कार्य को भी अनेक उपविभागों में बाँटा जा सकता है और प्रत्येक उपविभाग का एक इन्चार्ज बनाया जा सकता है। इस प्रकार के कार्यात्मक विशिष्टीकरण से संस्था का प्रत्येक कार्य सुव्यस्थित ढंग से संचालित हो सकता है, जिससे फर्म के उत्पादन में वृद्धि होती है।


(5) विपणन एवं वितरण सम्बन्धी बचतें - फर्म द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन करने से, असे क्रय विक्रय तथा वितरण का भी बड़े पैमाने पर ही प्रबन्ध करना पड़ता हैं। लेकिन उपर्युक्त कार्य बड़े पैमाने पर करने से निम्न बचतें प्राप्त होती है-


(a) बड़ी मात्रा में कय से क्रय मूल्य में छूट एवं कमी।


(b) कच्चे माल के कय तथा निर्मित माल के विक्रय पर यातायात एवं परिवहन लागत में बचत सम्भव ।


(c) बड़ी फर्म की सौदा करने की ताकत ज्यादा होती है जिससे कच्चे माल की लागत कम आती है तथा निर्मित माल का अधिक मूल्य प्राप्त करना सम्भव होता है।


(d) प्रति इकाई विज्ञापन लागत कम आती हैं।