उपभोक्ता बाजार का खंडीकरण - segmentation of the consumer market
उपभोक्ता बाजार का खंडीकरण - segmentation of the consumer market
उपभोक्ता बाजार को विभाजित करने के लिए दो आकारों के समूह को प्रयुक्त किया जाता है। कुछ अनुसंधानकर्ता विशिष्टका, जैसे भौगोलिक, जनसांख्यिकीय, मानसिक ग्राफ इत्यादि पर बाजार का खंडीकरण कर सकते हैं अन्य समंक उनकी विचारधाराओं जैसे ग्राहक का हितकारी समर्थन, सटीक परिस्थिति या बांडों का प्रतिचयन है। बाजार के खडीकरण के लिए अनेक समकों का प्रयोग किया जाता है ताकि ग्राहकों के अंतरग अन्तरों का चिह्नित किया जा सके और विपणन प्रोग्रामों को एक लाभप्रद स्थिति में स्थापित किया जा सके।
(i) भौगोलिक खंडीकरण
विभिन्न उपभोक्ता समूह बनाने के लिए बाजार की इकाइयों का भौगोलक ढंग से खंडीकरण किया जाता है।
प्रान्तीय विपणन कार्य को विशेष पोस्टल कोड का इस्तेमाल करते हुए उनको सही दिशा में अभिव्यक्त किया जाता है। भौगोलिक खंडीकरण का अभिप्राय एक बाजार को नौगोलिक स्तर पर विभाजित करने से है।
(ii) जनसांख्यिकीय खडीकरण
जनसांख्यिकीय खढीकरण प्रक्रिया में बाजार को उपभोक्ता करों के आधार पर (जैसे- आयु, परिवार आकार, पारिवारिक जीवन चक्र लिंग, आय, व्यवसाय शिक्षा स्तर पीढ़ी, राष्ट्रीयता, सामाजिक श्रेणी, आवश्यकताएं व अपेक्षाएं प्रयोग दर और उत्पाद का बांड गुणवत्ता को अपेक्षा आदि पर जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के साथ संबंधित किया जाता है।
• उम्र व जीवन चक्र
ग्राहकों की आवश्यकताएं और योग्यताएं उनकी उम्र के बदलाव से साथ बदलती है। उदाहारणार्थ, छोटी उम्र के बच्चों के लिए खरीदें गये उत्पाद, जैसे- जन्मधुड़ी, बेबी पाउडर डाईपर, इत्यादि 5 वर्ष कि आयु के बाद आवश्यक नहीं होते है। इसी तरह बड़ी उम्र में कुछ दवाईया तेल, दर्द निवारक जेल इत्यादि खरीदे जाते हैं।
• जीवन अवस्था
समान जीवन चक्र में रहने वाले लोग भी जीवन अवस्था में भिन्न हो सके है जीवन अवस्था किसी व्यक्ति विशेष के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है ये जीवन अवस्थाएं विपणनकर्ताओं के लिए उपभोक्ताओं के अपनी अवस्था को सहने में सहायक होते है,
जैसे एक नौजवान नौकरी के लिए अपने घर से दूर अकेला रहता है विपणनकर्ता उस अवस्था के लिए रेडीमेड स्नैक्स छोटी पैकिंग में उत्पाद आदि का प्रचार कर उसकी अवस्था को सहायक बनाते हैं।
• लिंग
पुरुष एवं स्त्रीयों में भिन्न-भिन्न व्यवहारिक य व्यक्तिगत लक्षण होते हैं जो उनके लिंगीय और सामजिकता के आधार पर होते हैं। कुछ पुरुष प्रधान बाजारों की परम्पराओं में भिन्न विपणन एवं प्रचार हो सकता है। लिंगीय खड़ीकरण और उनमें बदलाव के लक्षणों के अनुसार विपणन प्रक्रिया को अमल में लाया जाता है। एक जीन्स बनाने वाली कंपनी अपने बाजार में लिंग के आधार पर वर्गीकृत कर सकती है।
• आय
उत्पाद या सेवा की श्रेणियों के मद्देनजर आय को वर्गीकृत पद्धति के लिए अपनाया जाता है। हालांकि ग्राहक की आय विपणन प्रक्रिया का उत्पाद के क्रय पद्धति को परिवर्तित या प्रभावित करने का कोई सही माप नहीं है
किन्तु विपणनकर्ता अपने उत्पाद या सेवा का रेट तय कर किसी आय के स्तर को लक्षित कर सकता है। आय के आधार पर एक मार्केट को निम्न आय, मध्यमवर्गीय एवं विशिष्ट आय में विभाजित किया जा सकता है। उदाहारणार्थ, कपड़े धोने का पाउडर विपणन करने वाली कंपनी इस आधार का प्रयोग कर सकती है।
• पीढ़ी
प्रत्येक पीढ़ी उस क्षण या युग से प्रभावित होती है जिसमें उसका मुख्य समय व्यतीत हुआ हो। वे कुछ समरूप दृष्टि से दिखने वाले मूल्यों में समानता रखते हैं विपणनकर्ता आम तौर पर ऐसे सहगुणित समूहों में प्रमुखतः दृश्यों का उपयोग कर अपने ब्राण्ड के प्रति प्रचार के द्वारा उपभोक्ता मूल्य बना सकते हैं। उदाहरणार्थ, पतंजली आयुर्वेद के सभी उत्पाद भारत के एक युग आयुर्वेद के आधार पर प्रचार करता है।
वृद्धिगत कंपनिया 'समयानुसार आकार में ग्राहकों की आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी विपणन पद्धतियों में परिवर्तन करती रहती है।
• सामाजिक श्रेणी
समाजिक श्रेणी ग्राहकों की उन्मुकताओं पर विशेष ध्यान रखती हैं कई कम्पनियां सामाजिक श्रेणी के आधार पर ग्राहकों के लिए विशिष्ट उत्पाद एवं सेवाए प्रदान करती है, जैसे कोई गाड़ी बनाने वाली कंपनी एक छोटी गाड़ी मे बड़ी गाड़ी के कुछ गुण डालकर उच्च सामाजिक श्रेणी को लक्षित कर सकती है।
• मनोवैज्ञानिक खंडीकरण
ग्राहकों की आवश्यकताओं एक अपेक्षाओं के अध्ययन करने के लिए मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति जांचने का यह सर्वोत्तम साधन है। मनोवैज्ञानिक खंडीकरण में क्रताओं के समूह को उनके जीवन शैली या व्यक्तित्व के आधार पर विभिन्न भागों में बांटा जाता है।
व्यवसायिक तरीके में एस. आर. आई कंसल्टिंग बिजनेस वाल्स फ्रेमवर्क में कोटलर तथा केलर का आलेख किया है। उच्च साधनों सोचनीय सफल और अनुभव वाले चारों समूहों की प्राथमिकताए सोचनीय एवं परिवर्तनतीय है- चारों ज्ञान, स्वभाव, उपयोगिता एवं प्रतिक्रियाओं के आधार पर उनकी मानसिकता का पैमाना मापा जाता है।
• व्यावहारिक खंडीकरण
व्यावहारिक खंडीकरण की अवस्था में क्रेताओं को उनके ज्ञान व्यक्तित्व मनोवृत्ति गुणवत्ता या प्रतिक्रियाओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
विपणनकर्ता मार्केट को क्रेता की भूमिका के आधार पर भी निश्चित कर सकता है।
• व्यावहारिक परिवर्तन
कई विपणनकर्ता विश्वास करते है कि किसी खड़ को निर्मित करने के लिए प्रारंभिक अंश व्यावहारिक परिवर्तनों का होता है।
• अवसर
दिन, माह, वर्ष के क्रम से ग्राहकों के जीवन शैली को अन्य परिभाषित आकारों या अवसर के माध्य से परिभाषित किया जाता है। किसी उत्पाद या सेवा को अवसर पर खरीदना भी बाजार में उपभोक्ताओं को विभाजित करता है जैसे हिन्दू अपने सबसे बड़े त्यौहार दिवाली पर घर में पेंट कराना पसंद करते है जबकि ईसाई क्रिसमस या कुछ उपभोक्ता घर में शादी से पहले सफेदी व रंगाई करवाते हैं।
• लाभ
ग्राहकों का उत्पाद के प्रति उनके अपेक्षित लाभ के अनुरूप वर्गीकृत किया जा सकता है। किसी उपभोक्ता को टूथपेस्ट दांत चमकाने के लिए चाहिए क कुछ को मसूड़ों को सड़न से बचाने के लिए
→उपयोग दर
बाजारों को अल्म, मध्यम एवं भारी उत्पाद प्रयोगकर्ताओं के हिसाब से वर्गीकृत किया जा सकता है, विशेषकर उन उत्पादों को जिनका उपयोग भारी मात्रा में किया जाता है।
उदाहरण के लिए, चाय या कॉफी के विक्रेता अपने उत्पाद के लिए इस आधार को प्रयोग कर बाजार को वर्गीकृत कर सकते हैं।
→ क्रेता की तैयारी स्थिति
बाजार विभिन्न व्यक्तियो के क्रय तैयारी के आधार पर भी विभाजित होता है कुछ व्यक्तियों को उत्पाद के बारे में अनभिज्ञता होती है. कुछ जानकार होते है और कुछ उन्हें खरीदने के इच्छुक होते हैं। विक्रेता इन आधारों पर मार्केट को विभाजित कर उस खंड को चुन सकता है जिस को आसानी से अपना ब्राण्ड बेचने में सक्षम है।
→निष्ठता स्थिति:
क्रेताओं को उनकी निष्ठानुसार चार भागों में बाटा जा सकता है।
• सर्वाधिक सक्तिय
• विभक्त निष्ठा
• स्थानान्तरित निष्ठा
• परिवर्तनीय
एक संस्था इन चरों को मापन से बहुत कुछ सीख सकती है किसी उपभोक्ता की निष्ठा के आधार पर बाजार का खडीकरण किया जा सकता है।
→मनोवृत्ति एवं दृष्टिकोण
उपभोक्ता की मनोवृत्ति को पांच खंड़ों में विभाजित किया जा सकता है-
• उमंगी, उत्साही
• रचनात्मक, सकारात्मक
• उदासीन
• परस्पर विरोधी
• प्रतिकूल स्वभाव वाला
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