चयन , नौकरी के लिए चयन प्रक्रिया - selection job selection process

चयन , नौकरी के लिए चयन प्रक्रिया - selection job selection process


चयन का अर्थ किसी कार्य के लिए उपयुक्त व्यक्ति के चुनने की प्रक्रिया से है। यदि चयन सही व्यक्ति का नहीं होगा तो संगठन को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अतः कर्मचारियों का चयन सोच समझ कर करना चाहिए।


नौकरी के लिए चयन प्रक्रिया


चयन प्रक्रिया सभी संगठनों में होने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है। चयन की प्रक्रिया सभी संगठनों में अलग-अलग तरह से होती है। यह प्रक्रिया एक ही संगठन में विभिन्न पदों के लिए और विभिन्न क्षेत्र के पदों के लिए अलग-अलग हो सकती है। चयन अलग-अलग पदों में भी हो सकता है। विभिन्न पदों में व्यक्ति की अलग-अलग योग्यता, गुण, आदि की आवश्यकता पड़ती है।


कर्मचारी चयन प्रक्रिया लंबी होती है, जिसमें व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक योग्यता को परखा जाता है। तथा जो व्यक्ति सभी प्रक्रियाओं में योग्य होता है उनका चुनाव किया जाता है। यह प्रक्रिया जटिलताओं से भरी होती है। इस पर देश की आर्थिक स्थिति निर्भर करती है। चयन प्रक्रिया में देश की रोजगार की स्थिति आर्थिक व्यवस्था, राजनीति, कानून व्यवस्था, तकनीकी, शैक्षणिक आवश्यकताओं के साथ-साथ संगठन की ख्याति आदि परिस्थितयाँ है जो चयन प्रक्रिया पर प्रभाव डालती है।


चयन प्रक्रिया अनेक चरणों से होकर गुजरती है। चयन प्रक्रिया के चरण इस प्रकार है -


1. आवेदन पत्रों की जाँच


2. चयन परीक्षण


3. चयन साक्षात्कार


4. विशिष्ट योग्यता


5. संदर्भ एवं पृष्ठभूमि जाँच


6. शारीरिक और चिकित्सीय जाँच


7. चयन निर्णय


8. कार्य अर्पण तथा रोजगार संविदा


9. पदस्थापन एवं पूर्वाभिमुखी कारण


1. आवेदन पत्रों की जाँच - भर्ती की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद चयन की प्रक्रिया आरंभ होती है। इसमें सबसे पहले नौकरी के लिए इच्छुक व्यक्ति भर्ती के लिए आवेदन देते हैं। आवेदनों की जाँच से यह प्रक्रिया प्रारंभ होती है।

आवेदन पत्र नौकरी तलाश करने वाले का सी.वी है, जिसमें आवेदन कर्ता की व्यक्तिगत जानकारी, वित्तीय जानकारी, अभिरुचि, कार्यक्षमता, योग्यता आदि की जानकारी दी जाती है।


आवेदन पत्र की सूचना को स्थायी लेख के रूप में लिखित दस्तावेज में रखा जाता है। आवेदन पत्रों की जाँच की जाती है। जो व्यक्ति रिक्त पदों के लिए वांछित योग्यताओं के अनुकूल होता है, उसका आवेदन स्वीकृत कर दिया जाता है। बाकी आवेदनों को अस्वीकृत किया जाता है।


2 चयन परीक्षण प्रक्रिया - यह प्रक्रिया दूसरी सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है

इसके अंतर्गत: आवेदक में न्यूनतम योग्यता है या नहीं इसकी जाँच परख की जाती है। चयन परीक्षण में न्यूनतम वांछित योग्यता व गुण आवेदक में है या नहीं परखा जाता है। इसके द्वारा आवेदक की योग्यता, लगन, चतुराई, स्वभाव का अध्ययन किया जाता है। जाँच के माध्यम से कार्यक्षमता और कौशल को परखा जाता है। चयन परीक्षण के लिए निम्नलिखित जाँच मुख्यतः की जाती हैं:


(i) व्यक्तित्व परीक्षण


(ii) उपलब्धि की जाँच


(iii) तीव्रता की जाँच


(iv) योग्यता की जाँच


(v) अभिरुचि परीक्षण


(vi) रुचि परीक्षण


(vii) लिपि विज्ञान की जाँच


व्यक्तित्व की जाँच में आवेदक के आत्मविश्वास, भावनात्मक व्यवहार, धैर्य, सामाजिक व्यवहार आदि की जाँच की जाती है। व्यक्तित्व की जाँच परख में आत्मबोध परीक्षण विषयक प्रबंधकीय क्षमता, मूल्यांकन आदि कई तरीके विकसित किए गए हैं, जिससे व्यक्ति को योग्यता, निपुणता व प्रवीणता का पता चलता है। इससे व्यक्ति की कार्य तीव्रता मानसिक योग्यता, स्मृति, निर्णय शक्ति का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण में व्यक्ति की सीखने की लगन, समझने की शक्ति की जाँच होती है। अभिरुचि जाँच इसका अभिन्न अंग है।

इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में व्यक्ति की अभिरुचि और लगाव की जाँच कर निष्कर्ष निकाला जाता है।


3. चयन साक्षात्कार प्रक्रिया - चयन प्रक्रिया का तीसरा महत्वपूर्ण चरण साक्षात्कार है। जो व्यक्ति पहले, दूसरे चरण में सफल होता है, वह फिर तीसरे चरण में आता है। साक्षात्कार निश्चित समय, स्थान पर होता है। साक्षात्कार में संगठन का प्रतिनिधित्व कर रहे व्यक्तियों का समूह, बुलाए गए आवेदकों से प्रश्नोत्तर करता है, जिससे उनकी अभिरुचि, योग्यता, आत्मविश्वास, आवश्यकताओं, कार्य क्षमता, मानसिक मनोवृति का पता चलता है। जो लिखित परीक्षण द्वारा संभव नहीं होता है।


व्यक्ति की जाँच में आवेदक की योग्यता भी बहुत महत्वपूर्ण होती है इसी पर उसकी निर्णायक क्षमता का ज्ञान किया जाता है।

एक कमजोर व्यक्ति साहसी निर्णय नहीं ले सकता है। इसी तरह एक भावुक व्यक्ति कठोर निर्णय नहीं ले सकता है। इन सब बातों की जाँच के लिए व्यक्ति की जाँच आवश्यक होती है। अतः साक्षात्कार में भली भाँति ध्यान दिया जाता है ।


साक्षात्कार का क्षेत्र व्यापक है। कई कंपनियाँ तो संपूर्ण चयन साक्षात्कार प्रणाली द्वारा करती है। साक्षात्कार कंपनी और भावी कर्मचारी के बीच एक सीधी बातचीत है, जिससे भावी कर्मचारी के नियुक्त होने से पहले साक्षात्कार के माध्यम से भावी कर्मचारी की विचार शैली, आचरण वाणी, नेतृत्व क्षमता, कार्य दक्षता आदि के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।


साक्षात्कार कई प्रकार का होता है, जैसे प्रारंभिक साक्षात्कार, सामूहिक साक्षात्कार, व्यवहारवादी साक्षात्कार, औपचारिक तथा अनौपचारिक साक्षात्कार, मिश्रित साक्षात्कार आदि है।


4. विशिष्ट योग्यता परीक्षण यह परीक्षण एक विशेष प्रकार का होता है। जब किसी तकनीकी पद पर नियुक्ति करनी होती है जैसे कंप्यूटर आपरेटर पद के लिए टाइपिंग एवं कंप्यूटर की जानकारी की परख की जाती है। प्रबंधकीय एवं पर्यवेक्षक पदों के लिए इस प्रकार के परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है।


5. संदर्भ एवं पृष्ठभूमि जाँच - इस प्रक्रिया में व्यक्ति के चरित्र, आचरण, सामाजिक व्यवहार की जाँच की जाती है आवेदक से आवेदन पत्र में लिखित रूप से सूचना ली जाती है। इस सूचना में आवेदक को कुछ व्यक्तियों के नाम, पता, फोन नं मोबाईल नं, फैक्स, ई-मेल आदि संदर्भ के लिए माँगे जाते हैं।

आवेदक को अपने स्कूल, कॉलेज शिक्षकों, पूर्व के नियोक्ताओं, मित्र, पडोसियों की जानकारी संदर्भों रूप में देनी पड़ती है। कंपनी के नियोजक आवेदक की नियुक्ति से पहले या बाद में इन संदर्भों के बारे में व्यक्तिगत संपर्क कर जाँच पड़ताल कर सकते हैं कि आवेदक के द्वारा दी गई जानकारी सही है या नहीं।


6. शारीरिक एवं चिकित्सीय परीक्षण शारीरिक परीक्षण कुछ संगठनों में अनिवार्य होता है और कुछ संगठनों में चिकित्सीय परीक्षण अनिवार्य होता है। कई संगठनों में दोनों की अनिवार्यता होती है। शारीरिक परीक्षण शरीर की बनावट, लबाई, वजन का परीक्षण होता है चिकित्सीय परीक्षण में शरीर की अंदरुनी बीमारी की जाँच होती है।

इससे यह पता चलता है कि कर्मचारी छूत की बीमारी से ग्रस्त तो नहीं है। शारीरिक दुर्बलता के कारण उसकी कार्य क्षमता भी कम होगी शारीरिक कार्य वाले क्षेत्र में यह जाँच अनिवार्य होती है। किसी भी कार्य के लिए शारीरिक, मानसिक तंदुरुस्ती होना आवश्यक होता है।


7. चयन निर्णय प्रक्रिया यह प्रक्रिया सबसे अंतिम प्रक्रिया मानी जाती है। इस प्रकिया में सुयोग्य व्यक्ति का चयन किया जाता है। सभी प्रक्रिया में जो व्यक्ति सफल होता है, उसका चयन, निर्णय प्रक्रिया में किया जाता है। जो व्यक्ति अयोग्य होते है उसको छाँट कर अलग कर दिया जाता है। जो व्यक्ति साक्षात्कार और चिकित्सीय प्रक्रिया में उत्तीर्ण होते हैं उनकी सूची बनाई जाती है। यह रिक्त स्थान को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। अंतिम चयन की प्रक्रिया विभिन्न पदों, संगठनों एवं नीति नियम पर आधारित होती है। इसका निर्णय प्रबंधको, प्रबंधकीय बोर्डों या चयन बोर्डों द्वारा किया जाता है।


8. कार्य अर्पण तथा रोजगार प्रक्रिया - चयन प्रक्रिया के बाद कार्य अपर्ण प्रक्रिया आती है। इस प्रक्रिया में चयन प्रक्रिया द्वारा चयन किए गए व्यक्तियों की सूची तैयार की जाती है। इस सूची के आधार पर चयनित व्यक्ति को नियुक्ति पत्र जारी किया जाता है। नियुक्ति पत्र संगठन में कार्य करने का आमंत्रण होता है। नियुक्ति पत्र में नियुक्ति से संबंधित जानकारी होती है इसमें व्यक्ति कार्यकाल कब से कब तक रहेगा, उसकी वार्षिक आय क्या होगी आदि का उल्लेख किया जाता है नियुक्ति पत्र के साथ कभी-कभी नियोजन संविदा पत्र भी दिया जाता है।


संविदा पत्र हमेशा नियोजक के द्वारा जारी किया जाता है। कभी-कभी अनुभवी, योग्य आवेदक भी अपनी कुछ शर्तें सामने रखते है और नियोक्ता के ऊपर निर्भर करता है

कि वह उन शर्तों को माने या नहीं माने। रोजगार संविदा पर अगर आवेदक हस्ताक्षर करता है तो इसका अर्थ है कि कर्मचारी संविदा शर्तों पर संगठन में कार्य करेगा।


9. पदस्थापना एवं पूर्वाभिमुखी या उन्मुखीकरण संविदा रोजगार के बाद कर्मचारी संगठन में क्या पद होगा यह देखा जाता है। अब आवेदक संगठन का अंग बन जाता है। वह कर्मचारी हो जाता है। उसे पद पर क्या क्या कार्य करना है यह जानकारी दी जाती है। संगठन के नीति नियम, अनुशासन के बारे में बताया जाता है। संगठन के दायित्व, उद्देश्य उसके संगठन के प्रति कर्तव्य आदि से अवगत कराया जाता है। कई संगठनों में कर्मचारी का प्रशिक्षण का समय समाप्त होने के बाद वह स्थायी कर्मचारी हो जाता है।