प्रतिदर्श पद्धति का चयन - selection of sampling method
प्रतिदर्श पद्धति का चयन - selection of sampling method
प्रतिदर्श पद्धति से तात्पर्य उस तरीके से है जिसके द्वारा निदर्शन इकाइयों का चयन किया जाता है। प्रमुख निदर्शन पद्धतिया निम्नलिखित है विपणन अनुसंधान में यह प्रश्न अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि प्रायिकता और अप्रायिकता प्रतिदर्श पद्धतियों में से किसको चुना जाये? सामान्यत यह निर्णय लागत तथा मूल्य पर आधारित होता है।
टल एवं हाकिन्स का मत है, "कि इस प्रश्न का पूर्ण उत्तर नहीं दिया जा सकता है। सापेक्षिक मूल्यों के अनुमान में निम्न घटकों पर विचार करना आवश्यक होता है
(1) किस प्रकार की सूचना की आवश्यकता है औसत या अनुपातिक या परियोजना योग्य योग की ?
(2) क्या केवल प्रयोगकर्ताओं का अनुपात जानने की आवश्यकता है
या औसत प्रयोग में की जाने वाली मात्रा की या क्या समग्र बाजार भाग या उत्पाद के लिए बाजार का अनुमान करने की आवश्यकता है।
(3) समस्या में किस प्रकार की भूल सीमा मंजूर की जाती है? क्या समस्या में समग्र मूल्यों के अत्यधिक शुद्ध अनुमानों की आवश्यकता है?
(4) समस्या में कितनी बड़ी गैर-निदर्शन मूल्य की संभावना है समग्र निर्दिष्टीकरण, रचना, चयन, अप्रत्युत्तर उप सूचनाएं माप तथा संभावित प्रायोगिक मूल्यों का कैसा आकार है?
(5) समग्र चलों के संदर्भ में कितना सजातीय है, जोकि हम मापना चाहते है? क्या निदर्शन में विचलन की संभावना बहुत कम है या बहुत अधिक होगी?
(6) निदर्शन सूचना में भूलों की प्रत्याशित लागत क्या है? यदि उपलब्ध समंको में औसत या अनुपात प्राप्त किये जाते हैं तो क्या ये मूल्य सीमा से अधिक सामान्यतः परियोजना योग्य योगों, कम भूलों, उच्च समग्र विभिन्नताओं तथा भूलों की उच्च प्रत्याशित लागतो की दशाओं में प्रायिकता निदर्शन का प्रयोग अनुकूल होता है। 5 प्रतिदर्श आकार का निर्धारण करना यह निदर्शन प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण है जिसमे निदर्शन पद्धति के चयन के बाद निदर्श आकार को निर्धारित किया जाता है वास्तव में यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
गुड एवं हॉट का मत है कि एक प्रतिदर्श को केवल प्रतिनिधि होना ही पर्याप्त नहीं है अपितु इसमें पर्याप्त भी होना आवश्यक है। एक निदर्शन उस समय पर्याप्त होता है जिसका आकार उसके लक्षणों की स्थिरता में विश्वास स्थापित करने के लिए पर्याप्त हो।" यदि निदर्शन आकार अत्यधिक बड़ा है
तो उसी अनुपात में समय, धन, शुद्धता तथा संगठन सबंधी कठिनाइयां उत्पन्न हो जाती है। यदि निदर्शन आकार अत्यधिक छोटा है तो प्रतिनिधित्व तथा विश्वसनीयता के संबंध में प्रश्न उत्पन्न हो सकता है अतः निदर्शन आकार में प्रतिनिधित्व तथा विश्वसनीयता ही महत्वपूर्ण प्रश्न है।
6. प्रतिदर्श योजना को निर्दिष्ट करना - निदर्शन योजना में यह निर्दिष्टीकरण सम्मिलित है कि प्रत्येक लिये गये निर्णय को कैसे क्रियान्वित या लागू करना है। उदाहरण के लिए यह निर्णय लिया जा सकता है कि प्रत्येक कुटुम्ब तत्व होगा तथा ब्लॉक निदर्शन होगा।
7 प्रतिदर्श का चयन करना - यह निदर्शन प्रक्रिया का अंतिम चरण है जिसमे निदर्शन तत्व का वास्तविक रूप में चयन किया जाता है। इसके लिए पर्याप्त मात्रा में आफिस तथा फील्डवर्क की आवश्यकता होती है।
निदर्शन प्रक्रिया में उपरोक्त सात चरणों का सार रूप में निम्न सारणी में प्रस्तुत किया जा सकता है।
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