अर्द्ध- अनुबंध - semi-contract

 अर्द्ध- अनुबंध - semi-contract


अर्द्ध-अनुबंध शब्द भारतीय अनुबंध अधिनियम में कहीं प्रयुक्त नहीं किया गया है । अतएव अधिनियम में इसकी परिभाषा का कोई उल्लेख नहीं मिलता है लेकिन प्रचलित तथा सामान्य शब्दों में अर्द्ध अनुबंधों से तात्पर्य ऐसे अनुबंधों से है जो साधारण अनुबंधों की तरह नहीं होते किन्तु कानून की दृष्टि में अनुबंधों की श्रेणी में रखे जाते हैं तथा इनके समस्त प्रभाव अनुबंधों की तरह ही होते हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि अर्द्ध-अनुबंध एक प्रकार का व्यवहार होता है जो कि पक्षकारों के मध्य होता है किन्तु किसी भी तरह का अनुबंध निर्माण नहीं करता, किन्तु राजनियम की दृष्टि में उसकी प्रकृति अनुबंध की तरह ही होती है।


अतः अर्द्ध- अनुबंध की एक संक्षिप्त एवं उपयुक्त परिभाषा निम्न शब्दों में दी जा सकती है - अर्द्ध अनुबंध एक ऐसा व्यवहार है जिसमें यद्यपि पक्षकारों के बीच का अनुबंध नहीं होता है किन्तु सन्नियम के अनुसार उसमें सामान्य रूप से कुछ अधिकार और दायित्व उत्पन्न होते हैं।" उदाहरण के लिए, सुरेश, महेश के द्वारा रमेश के यहाँ पुस्तकें भेजता है। महेश गलती से उन पुस्तकों को पुनीत के यहाँ पहुंचा देता है। पुनीत उन्हें अपने पास रख लेता है । यहाँ पर यद्यपि सुरेश और पुनीत के बीच किसी भी प्रकार का ठहराव नहीं हुआ है, किन्तु फिर भी वह (पुनीत) उनका मूल्य चुकाने के लिए बाध्य किया जा सकता है।