बीमार औद्योगिक कपनी - sick industrial company
बीमार औद्योगिक कपनी - sick industrial company
बीमार औद्योगिक कंपनी एक्ट के अनुसार, "बीमार औद्योगिक कंपनी उस औद्योगिक कंपनी को कहते हैं जो (सात वर्ष से कम समय के लिए पंजीकृत न हो) किसी भी वित्तीय वर्ष के अंत में अपनी कुल मूल्य के बराबर अथवा उससे अधिक की नकद हानि सहन कर रही हो तथा उसे चालू वित्तीय वर्ष में और पिछली वित्तीय वर्ष नकद हानि हुई हो। यहां नकद हानि मूल्य हास का प्रावधान दिए बिना हानि तथा शुद्ध संपत्तित, पूजीगत तथा स्वतंत्र कोषों को संबोधित करती है।
इस एक्ट के अनुसार एक बीमार कंपनी में निम्नलिखित बातें होनी चाहिए
(i) कंपनी की नकद पूजी में कमी हो रही हो ।
(ii) कंपनी दो वर्षों से लगातार नकद हानि सहन कर रही हो।
(iii) वर्ष के अंत में शुद्ध पूंजी कम तथा घाटा अधिक हो ।
(iv) कंपनी की पिछले 7 वर्षों से रजिस्ट्रेशन होनी आवश्यक है। 1994 में इसमें संशोधन कर दिया गया है। अब रजिस्ट्रेशन की अवधि 7 वर्ष के स्थान पर 5 वर्ष की गई है।
इस एक्ट के अनुसार यदि पिछले 5 वर्षों में कंपनी की शुद्ध सम्पति 50 प्रतिशत से भी कम हो तो उसे आरम्भिक बीमार कंपनी घोषित किया जाएगा। आरंभ में इस एक्ट के अंतर्गत केवल निजी क्षेत्र की कंपनियों को ही शामिल किया गया था परंतु दिसंबर 1991 से, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी शामिल कर दिया गया है।
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