औद्योगिक बीमारी के लक्षण या सूचक - signs or symptoms of industrial illness

 औद्योगिक बीमारी के लक्षण या सूचक - signs or symptoms of industrial illness


औद्योगिक बीमारी के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं


(क) वैधानिक दायित्वों के भुगतान में कठिनाई जब औद्योगिक इकाई अपने वैधानिक दायित्वों का भुगतान नहीं कर पाती तो औद्योगिक रुग्णता में अंतर्गत आती है। मुख्य वैधानिक दायित्व निम्नलिखित हैं: 


(i) विभिन्न प्रकार के करों जैसे बिक्री का उत्पादन कर


(ii) भविष्य निधि में योगदान


(iii) कर्मचारी राज्य बीमा की कटौतियां


(iv) ऋण एवं ब्याज की किस्तों का भुगतान 


(v) श्रमिकों की मजदूरी भुगतान में देरी


(vi) कच्चे माल का भुगतान करने में असमर्थता ये सभी औद्योगिक रूग्णता की ओर संकेत देते हैं।


(ख) गिरता हुआ लाभ- यदि किसी औद्योगिक इकाई का निवेश पर लाभ निरंतर कम होता जाता है तथा भविष्य में इकाई की बिक्री इतनी अवश्य हो कि


(i) ऋणों का ब्याज दिया जा सके।


(ii) मालिकों के लिए लाभ कमाया जा सके।


(iii) उत्पादन की लागत पूरी होने के पश्चात घिसावट का आयोजन किया जा सके।


यदि ऐसा नहीं हो पाता तो ये संकेत रुग्णता के सूचक है। 


(ग) स्टॉक में वृद्धि - यदि कोई उत्पादक इकाई अपने तैयार माल की बिक्री नहीं कर पाती तो स्टॉक में वृद्धि होने लगती है। यह भी रूग्णता का सूचक है कि स्टॉक में निम्नलिखित माल एकत्रित हो सकता है :


(i) कच्चा माल


(ii) अर्धनिर्मित माल


(iii) तैयार माल


बिक्री के अभाव के कारण माल का स्टॉक बढ़ना रूग्णता का संकेत देता है।


(घ) पूंजी ढांचे में दोष- जब बाजार में उपक्रमों के शुद्ध मूल्य में गिरावट हो, स्टॉक एक्सचेंज में शेयरों के मूल्यों में कमी हो तो पूजी ढांचे के दोष आरंभ हो जाते हैं। इसके साथ ही यदि पूंजी ढांचे में ऋण की मात्रा में वृद्धि हो रही है तो औद्योगिक इकाई की शुद्ध संपत्ति कम होने लगती है। यह भी औद्योगिक रुग्णता का संकेत है।


(ङ) नकद प्रबंध की कठिनाइयां औद्योगिक इकाई को कई बार नकद प्रबंध में अनेक कठिनाइयां आती हैं, जैसे- (i) नकद निर्गमों में स्थिरता, (ii) नकद अंतप्रवाह में कमी ।


इनके परिणामस्वरूप नकदी का स्तर अनुकूलतम बिंदु से नीचे रहने लगता है। कभी-कभी नकदी के अभाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ये भविष्य में रूग्णता के सूचक है। 


(च) बिक्री में गिरावट - कई बार औद्योगिक इकाइयां बिक्री को बढ़ाने के लिए अनेक प्रयत्न करती हैं, जैसे 


(i) कैश तथा व्यापारिक डिस्काऊंट को बढ़ाकर,


(ii) उदारवादी उधार नीति अपना कर


(iii) वसूली धीरे-धीरे करके। 


(छ) अल्पकालीन स्त्रोतों की वित्तीय व्यवस्था कई प्रोजेक्ट दीर्घकालीन होते हैं। इनकी वित्तीय व्यवस्था भी दीर्घकालीन स्त्रोतों द्वारा होनी चाहिए। परंतु कई बार दीर्घकालीन प्रोजेक्ट की वित्तीय व्यवस्था का प्रबंध अल्पकालीन स्त्रोतों द्वारा किया जाता है। यह भी औद्योगिक रूग्णता का संकेत है ।


(ज) बैंक तथा ग्राहक संबंधों में गिरावट-कई बार ग्राहक तथा बैंक के आपसी संबंध बिगड जाते हैं। इसके निम्नलिखित कारण है


(i) ओवरड्राफ्ट पर अधिक निर्भरता


(ii) साख के भुगतान के अनियमिताए


(iii) बैंक द्वारा अधिक मार्जिन लेना


(iv) उत्तम जमानत के लिए बार-बार कहना । 


इन सभी कारणों से आपसी संबंध बिगड़ते हैं जोकि औद्योगिक रूग्णता की ओर संकेत करते हैं।