लघु व्यवसाय , लघु उद्यमों का वितपोषण - Small Business, Financing of Small Enterprises
लघु व्यवसाय , लघु उद्यमों का वितपोषण - Small Business, Financing of Small Enterprises
मुद्रा द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का लक्ष्य युवाओं, शिक्षितों या कुशल श्रमिकों और महिला उद्यमियों समेत उद्यमियों को मुख्य धारा में लाना है। भारत सरकार का मानना है कि आर्थिक वृद्धि और विकास को समावेशी होना चाहिए। 2013 के एनएसओ सर्वे के अनुसार, 5.77 करोड लघु व्यवसाय इकाइयाँ जो ज्यादातर एकल स्वामित्व वाली है और विनिर्माण, व्यापार या सेवा गतिविधियों का संचालन करती है। इनमें लघु विनिर्माण इकाइयों, दुकानदारों, फलों एवं सब्जियों के विक्रेताओं, ट्रक एवं टैक्सियों के संचालकों, खाद्य सेवा इकाइयों, मरम्मत की दुकानों, लघु उद्योगों, कारीगरों, खाद्य प्रोसेसर, छोटे विक्रेताओं एवं कई अन्य छोटे उद्योग धंधे शामिल है।
लघु उद्यमों का वितपोषण
मुद्रा बैंक का उद्देश्य छोटे उद्यमों को आसान दरों पर 10 लाख रूपये का ऋण उपलब्ध करवाना तथा सुक्ष्म वित्तीय संस्थाओं पर नियंत्रण एवं उनका विकास है, जिससे अंतत देश की उत्पादकता में वृद्धि होगी और रोजगार के अधिक अवसरों का सृजन होगा।
वित्त वर्ष 2015-16 के बजट भाषण में केंद्रीय वित मंत्री अरुण जेटली ने 20,000 करोड़ रूपये की राशि तथा 3,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी राशि के साथ एक सूक्ष्म इकाई विकास पुनर्वित्त एजेसी बैंक के सृजन का प्रस्ताव रखा था।
मुद्रा बैंक की स्थापना वैधानिक संस्था के तौर पर हुई है। मुद्रा बैंक को संसद के एक अधिनियम के तहत स्थापित किया जाना है, पर इस संबंध में कानून बनने तक इसे भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की इकाई के रूप में चलाया जाएगा। यह एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के तौर पर काम करेगी।
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