लघु उद्योग - small industry

 लघु उद्योग - small industry

1955 में ग्राम तथा लघु उद्योग समिति बनी। गांवों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए लघु उद्योगों का प्रयोग किया गया। लघु उद्योग की परिभाषा किसी इकाई की परिसंपत्तितयों के लिए दिए जाने वाले अधिकतम निवेश के संदर्भ मे दी जाती है। 1950 में लघु औद्योगिक इकाई उसे कहा जाता था, जिसमें पाच लाख रु का अधिकतम निवेश होता है। आजकल यह सीमा एक करोड़ रु का अधिकतम निवेश है।


ऐसा माना जाता था कि लघु उद्योग अधिक श्रम प्रधान होते हैं। इसमें बड़े उद्योगों के मुकाबले अधिक श्रम का प्रयोग किया जाता है। इससे रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होते हैं। ये बड़े औद्योगिक इकाइयों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करते हैं। लघु उद्योगों के विकास के लिए बड़े उद्योगों से इनकी रक्षा करनी आवश्यक है। इस उद्देश्य के लिए अनेक उत्पादों को आरक्षित किया गया। उन वस्तुओं को आरक्षित किया गया जिसका निर्माण लघु उद्योगों कर सकते थे तथा इनके विकास के लिए अन्य रियायतें भी दी गई थी, जैसे-कम उत्पाद शुल्क, कम ब्याज पर ऋण आदि।