कुछ आधारभूत धारणाएँ - some basic concepts
कुछ आधारभूत धारणाएँ - some basic concepts
(क) बैंक जमा - साख निर्माण का आधार बैंक जमा है। केन्ज तथा फिलिप्स के विचारों के आधार पर प्रो. हॉम ने दो प्रकार की जमा राशियों का उल्लेख किया है. (i) प्राथमिक जमा तथा
(ii) गौण जमा अतएव जमा दो प्रकार की होती है
(i) नकद जमा या प्राथमिक जमा-जो धन राशि लोगों द्वारा बैंकों में नकद मुद्रा के रूप में जमा करवाई जाती है उसे नकद जमा या प्राथमिक जमा कहते है। इस जमा को निष्क्रिय जमा भी कहा गया है, क्योंकि इसका निर्माण करने में बैंक का कोई योगदान नहीं होता। इस जमा की राशि जमाकर्ताओं पर ही निर्भर करती है।
(ii) साख जमा या गौण जमा:- जब कोई व्यक्ति बैंक से उधार लेने के लिए आता है तो बैंक उसे नकद राशि नहीं देता बल्कि उसके नाम एक खाता खोल देता है और उसे चैक द्वारा उसमें से रूपया निकालने का अधिकार दे देता है। इस प्रकार की जमा को साख जमा व गौण जमा कहते हैं। बैंक के द्वारा दिया गया प्रत्येक ऋण नई जमा उत्पन्न करता है। साख जना प्राथमिक जमा का ही परिणाम होती है, क्योंकि बैंक नकद जमा का कुछ भाग कोष में रखकर साख जमा का सृजन करता है। हॉम के अनुसार, गौण जमा का निर्माण ही साख का सृजन है। इस प्रकार एक बैंक जितना अधिक ऋण देता है उतनी ही साख जमा उत्पन्न होती है तथा ऋण का निर्माण होता है। इसलिए कहा जाता है कि जमा राशियाँ साख को जन्म देती है तथा साख जमा राशियों को जन्म देती है।"
(ख) व्यापारिक संस्था - बैंक एक व्यापारिक संस्था है, इसलिए वह अपनी राशि को अधिक से अधिक मात्रा मे उधार देकर अधिकतम लाभ कमाना चाहती है।
(ग) नकद कोष अनुपात - यह ठीक है कि बैंक अधिक से अधिक लाभ कमाना चाहते है परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि वह अपनी जमा राशि की कुल मात्रा उधार दे देगा। जो लोग बैंक में रूपया जमा करवाते हैं वे किसी भी समय रूपया निकलवा सकते है परंतु बैंकों का अनुभव यह है कि सभी जमाकर्ता एक ही समय में अपनी सारी जमा निकलवाने नहीं आते। इसलिए बैंकर कुल जमा राशि में से कुछ भाग अपने पास नकद कोष के रूप में रख लेते हैं ताकि वे जमाकर्ताओं की आवश्यकता को पूरा कर सके। कुल जमा का जो अनुपात बैंक अपने पास नकद के रूप में रखते है उसको नकद कोष अनुपात कहते हैं।
(घ) अत्यधिक या आधिक्य कोष अपनी कुल जमा मे से नकदी को रखने के बाद बैंकों के पास जो राशि बच जाती है उसे अत्यधिक या आधिक्य कोष कहते हैं। वास्तव में यह आधिक्य कोष ही साख निर्माण का आधार है।
(ङ) साख गुणक: साख गुणक से अभिप्राय कुल जमा में वृद्धि व प्राथमिक जमा में वृद्धि के अनुपात से है। यदि प्राथमिक जमा में रू 100 की वृद्धि होती है और इसके फलस्वरूप कुल जमा में वृद्धि, रू 1,000 की होती है तो साख गुणक 10 होगा। साख गुणक और नकद कोष अनुपात में विपरीत संबंध को निम्नलिखित समीकरण के रूप में स्पष्ट किया जा सकता है।
साख गुणक = 1/ नकद कोष अनुपात
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