मानव पूंजी के स्त्रोत - sources of human capital
मानव पूंजी के स्त्रोत - sources of human capital
(क) शिक्षा हमारे माता पिता हमारी शिक्षा पर व्यय क्यों कर रहे हैं? व्यक्तियों द्वारा शिक्षा पर व्यय कुछ उसी प्रकार का खर्च है जैसे कोई कंपनी निश्चित अवधि में अपने दीर्घकालिक निश्चित लाभ को सुधारने के लिए पूजीगत वस्तुओं पर करती है। इस शिक्षा से कोई भी व्यक्ति अपने भविष्य की आय को बढ़ाने के लिए शिक्षा पर निवेश करता है। शिक्षा की तरह स्वास्थ्य को भी किसी व्यक्ति के साथ-साथ देश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आगत माना गया है।
(ख) चिकित्सा में निवेश - किसी कार्य को कौन व्यक्ति अच्छी तरह से कर सकता है एक बीमार व्यक्ति या स्वस्थ व्यक्ति चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में एक बीमार व्यक्ति कार्य करने के लायक नहीं होता। इससे उत्पादन में कमी आती है। अतः हम कह सकते हैं कि स्वास्थ्य पर व्यय मानव पूंजी निर्माण का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है।
(ग) कार्य के दौरान प्रशिक्षण व प्रबंधन कई उद्योग अपने कर्मचारियों के कार्य स्थल पर प्रशिक्षण में व्यय करती है। इसके कई तरीके हो सकते है। फर्म के अपने कार्य स्थल पर ही पहले से काम को जानने वाले कुशलकर्मी कर्मचारियों को काम सिखा सकते हैं। दूसरे कर्मचारियों को किसी अन्य संस्थान में प्रशिक्षण पाने के लिए भेजा जा सकता है। दोनो ही विधियों में संगठन अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण का कुछ व्यय वहन करती है। इसी कारण से फर्म इस बात पर जोर देगी कि प्रशिक्षण के बाद वे कर्मचारी एक निश्चित अवधि तक अवश्य संगठन के पास ही कार्य करें। इस प्रकार कंपनी प्रशिक्षण पर किए गए व्यय की उगाही अधिक उत्पादकता से हुए लाभ के रूप में कर पाने में सफल रहती है। कार्य के दौरान प्रशिक्षण पर किया गया व्यय भी इस दृष्टि से मानव पूंजी का स्त्रोत बन जाता है। ऐसे खर्च की तुलना में श्रम उत्पादकता में वृद्धि से हुए लाभ कहीं अधिक होते हैं।
(घ) पलायन - कोई व्यक्ति अपने मूल स्थान की आय से अधिक आय वाले रोजगार की तलाश में दूसरे स्थान पर चले जाते हैं। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन का मुख्य कारण भी गांवों में बेरोजगारी के कारण ही होता है। तकनीकी शिक्षा संपन लोग जैसे डॉक्टर आदि भी वेतनमान के लिए दूसरे देशों में चले जाते हैं। पलायनों की दोनों स्थितियों में परिवहन की लागत और उच्चतर निर्वाह लागत के साथ एक अनजाने सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश में रहने की मानसिक लागते भी प्रवासी श्रमिकों को सहन करनी पड़ती है, किंतु नए स्थान पर उनको कमाई पलायन से जुड़ी लागतों से कहीं अधिक होती है। पलायन पर व्यय भी मानवीय पूजी निर्माण का स्त्रोत है।
(ङ) सूचना - व्यक्ति श्रम बाजार तथा दूसरे बाजार जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य से संबधित सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए व्यय करते हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि विभिन्न प्रकार के कार्यों में वेतनमान क्या है या फिर क्या शैक्षिक संस्थाएं सही प्रकार के कौशल में प्रशिक्षण दे रही है और किस लागत पर यह जानकारी मानव पूंजी में निवेश करने से प्राप्त मानव पूंजी के भंडार का सही सदुपयोग करने की दृष्टि से बहुत उपयोगी होती है। इसीलिए श्रम बाजार तथा अन्य बाजारों के विषय में जानकारी प्राप्त करने पर किया गया व्यय भी मानव पूंजी निर्माण का स्त्रोत हैं।
भौतिक पूंजी के आधार पर ही मानव पूंजी के वैचारिक आधार की रचना की गई है। दोनों प्रकार की पूंजी के बीच कुछ समरूपताएं और कुछ प्रभावशाली असमानताएं हैं।
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