नए उत्पाद विकास की प्रक्रिया की अवस्थाएं - Stages of the process of new product development

नए उत्पाद विकास की प्रक्रिया की अवस्थाएं - Stages of the process of new product development


नए उत्पाद विकास की प्रक्रिया में नए उत्पाद विचारों का सृजन, विचारों की छानबीन उत्पाद विकसित करना व नए उत्पाद का वाणिज्यीकरण शामिल है।

नए उत्पाद विकास प्रक्रिया की मुख्य अवस्थाए निम्नलिखित है-


(क) नए उत्पाद विचारों का सृजन नए उत्पाद के विकास का पहला चरण नए उत्पाद के बारे में विचारों की उत्पति है। ये नए व अनूठे विचार व्यावसायिक इकाई अनुसंधान एवं विकास विभाग निमाणी कर्मचारी उच्च प्रबंधक प्रतियोगी इकाइयों, ग्राहकों आदि से आ सकते हैं। इसके अलावा व्यापार प्रदर्शनियों में जाने से भी नए विचार आते हैं ग्राहको की समस्याओं से भी नए उत्पाद विचारों की उत्पति होती है।


(ख) विचारों की छंटनी इस अवस्था में उत्पाद संबंधी नए विचारों की छटनी की जाती है।

इसमें कंपनी द्वारा एकत्रित किए गए उत्पाद विचारों का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया जाता है, ताकि सर्वोतम विचार का पता लगाया जा सके जो उत्पाद विचार वैश्विक इकाई को प्राप्त करने से सहायक नहीं होते या व्यावसायिक इकाई की साधन क्षमता से बाहर होते है, उन्हें छोड़ दिया जाता है। नए उत्पाद विचारो की छानबीन विभिन्न आधारों को ध्यान में रखकर कर की जाती है, जैसे कंपनी की छवि के अनुरूप तकनीकी जानकारी, कच्चे माल, अम की उपलब्धता, कल पुर्जों आदि की पूर्ति, वित्तीय संसाधन उत्पादन सुविधाएँ व सरकारी प्रावधान आदि जो विचार इन आधारों को पूरा करते हैं. उन्हें रख कर शेष विचारों का परित्याग कर दिया जाता है। उपयुक्त उत्पाद का चयन करने के लिए जांच सूची तैयार की जाती है ऐस विचारों को उत्पाद विकास प्रक्रिया के अगले चरण में रखा जाता है, जो इस व्यावसायिक इकाई के उद्देश्यों, संसाधनों तथा विपणन वातावरण के अनुरूप हो।


(ग) उत्पाद धारणा का विकास एवं परीक्षण: छानबीन के बाद चुने गए विचारों के आधार पर उत्पाद की धारणा का विकास किया जाता है। इसमें उत्पाद विचार का उपभोक्ता की आवश्यकता व संतुष्टि के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। इसमें उत्पाद में पाई जाने वाली विशेषताओं उत्पाद से उपभोक्ताओं को होने वाले संभावित लामो आदि को ध्यान रखकर उत्पाद की धारणा का विकास किया जाता है। धारणा परीक्षण में व्यावसायिक इकाई वैकल्पिक उत्पाद धारणओं में से सर्वोत्तम धारणा का चयन करती है। इसके बाद चुने गए उत्पाद विचार की चर्चा संभावित ग्राहकों से की जाती है। इस परीक्षण के अंतर्गत चुने हुए उपभोक्ताओं को सभी उत्पाद मॉडल दिखाए जाते है और उन्हें अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने को कहा जाता है जिस मॉडल को अधिकतम उपभोक्ता अच्छा मॉडल मानते है, उस मॉडल का चयन किया जाता है। यदि उपभोक्ता कोई सुझाव देते हैं तो उस सुझाव के अनुरूप उत्पाद मॉडल में संशोधन किया जाता है। इसमें उत्पाद में पाई जाने वाली विशेषताओं तथा उपभोक्ताओं को उत्पाद के प्रयोग से होने वाले लाभों पर चर्चा की जाती है। इससे वर्तमान उत्पाद तथा नए उत्पाद के मध्य अंतर को समझाने में सभावित ग्राहकों की पहचान करने में तथा उनकी कय पुनरावृत्ति का पता लगाने में सहायता मिलती है।


(घ) विपणन रणनीति विकास: उत्पाद धारणा परीक्षण के बाद विपणन रणनीति का विकास किया जाता है इसमें लक्षित उपभोक्ताओं की पहचान की जाती है। संभावित उपभोक्ताओं के व्यवहार को समझा जाता है बाजार के आकार व अंश का अनुमान लगाया जाता है उत्पाद की कीमत निर्धारण, वितरण रणनीति सवर्द्धन रणनीति आदि सबंधी निर्णय लिए जाते हैं सक्षेप में इस अवस्था में विपणन सम्मिश्र के विभिन्न तत्त्वो सबधी निर्णय लिए जाते है। 


(ङ) व्यावसायिक विश्लेषण इस चरण में चुने गए उत्पादों की मांग, विकय लाभदायकता आदि का मूल्यांकन किया जाता है। नये उत्पाद की कुल लागत का अनुमान लगाने के लिए विभिन्न उत्पादन लागतो. जैसे कच्चे माल की लागत, श्रम लागत स्टोरेज लागत, परिवहन लागत संवर्द्धन लागत, कार्यालय व्यय विक्रय व्यय मानव संसाधन की उपलब्धता, कच्चे माल की उपलब्धता, पूजी आवश्यकताओं, आदि का विश्लेषण किया जाता है।

कुल माग बाजार अश, विकय आदि का अनुमान लगाकर समावित लाभ का अनुमान लगाया जाता है। इस चरण में व्यावसायिक दृष्टिकोण से उत्पाद का विश्लेषण किया जाता है इसमें यह देखा जाता है कि उत्पाद व्यवसाय के लिए लाभप्रद रहेगा कि नहीं। इसके लिए उत्पाद के प्रवेश पर प्रत्याय का अनुमान लगाया जाता है। संक्षेप में, व्यावसायिक विश्लेषण से प्रस्तावित उत्पाद के लाभों में दीर्घकालीन योगदान का अनुमान लगाया जाता है।


(च) उत्पाद विकास उत्पाद का दृष्टिकोण से व्यावसायिक विश्लेषण करने के बाद, उत्पाद का भौतिक विकास किया जाता है नया उत्पाद विचार जो अभी तक कागजो पर ही था. इस चरण में भौतिक उत्पाद के रूप में परिवर्तित किया जाता है यह कार्य व्यावसायिक इकाई के अनुसंधान एवं विकास विभाग अथवा इंजीनियरिंग विभाग के द्वारा उत्पाद का संभावित मॉडल तैयार किया जाता है।

प्रत्येक मॉडल का प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाता है। चुने हुए मॉडलों का विश्लेषण नवीन उत्पाद समिति द्वारा किया जाता है। इस समिति में अनुसंधान व विकास विभाग उत्पादन विभाग व विपणन विभाग के प्रतिनिधि होते है। प्रत्येक विभाग के सदस्यों द्वारा उत्पाद का बहुमुखी विश्लेषण किया जाता है। इस चरण में उत्पाद में ब्रांड नाम, ट्रेडमार्क, पॅकेजिंग, लेबलिंग आदि संबंधी निर्णय भी लिए जाते है। उत्पाद विकास का कार्य बहुत ही सावधानी से करना चाहिए।


(छ) विपणन परिक्षण: इसके अंतर्गत उत्पाद का थोड़ी मात्रा में उत्पादन कर कुछ चुने हुए बाजार क्षेत्रों में पूरे विपणन कार्यक्रम के साथ थोड़े समय के लिए विपणन किया जाता है तथा उत्पाद के प्रति उपभोक्ताओं व मध्यस्थों की प्रतिक्रिया को जाना जाता है। यदि उत्पाद में किसी संशोधन की आवश्यकता हो तो उसे समय रहते पूरा किया जा सकता है उत्पाद को प्रारंभ में ही पूरे बाजार में लाना जोखिमपूर्ण हो सकता है,

अत उत्पाद का सीमित बाजार क्षेत्र में परीक्षात्मक विपणन करके उसकी कमियों की प्रारंभ में ही पहचान कर ली है। परीक्षात्मक विपणन की समय अवधि अधिक नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे प्रतियोगी इकाइयाँ नवीन उत्पाद की नकल करके इसे पहले ही पूर्ण बाजार में बेचने लगेंगी इससे नया उत्पाद विकसित करने वाली मूल कंपनी को बहुत हानि हो सकती है। इसके अलावा परीक्षात्मक विपणन की समय अवधि बहुत कम भी नहीं होनी चाहिए अन्यथा उपभोक्ताओं में पुनः कय व्यवहार का पता नही चल पाएगा।


(ज) उत्पाद का वाणिज्यीकरण. जब एक नए उत्पाद के विकास की सभी प्रारंभिक अवस्थाएं पूरी हो जाती है तथा उत्पाद परीक्षात्मक विपणन में भी सफल रहता है तो नए उत्पाद को बड़े बाजार क्षेत्र में विपणन हेतु प्रस्तुत किया जाता है। यह नवीन उत्पाद विकास की अतिम अवस्था है। वाणिज्यीकरण योजना घरेलू बाजार व विदेशी बाजार के लिए अलग-अलग होनी चाहिए। अतः उत्पाद की सफलता के लिए प्रभावी संवर्द्धन कार्यक्रम भी चलाया जाता है। बड़े पैमाने पर विनियोग करना पड़ता है अत उत्पाद को संपूर्ण बाजार में एक साथ प्रस्तुत किया जाता है। सफल वाणिज्यीकरण के लिए प्रभावी प्रबंध की बहुत आवश्यकता होती है। बाद में धीरे-धीरे उत्पाद को अन्य बाजार क्षेत्रों में प्रस्तुत किया जाता है। सफल वाणिज्यीकरण के बाद इसकी निरंतर मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है, ताकि उचित समय पर विपणन मिश्रण में उपयुक्त समायोजन किया जा सके।