वैध प्रस्ताव संबंधी कानूनी नियम - statutory rule on valid offer

 वैध प्रस्ताव संबंधी कानूनी नियम - statutory rule on valid offer


भारतीय अनिबंध अधिनियम तथा समय समय पर विभिन्न न्यायधीशों द्वारा दिये गये निर्णयों के आधार पर वैध प्रस्ताव के संबंध में निम्नलिखित कानूनी नियम हैं :


i. प्रस्ताव, प्रस्तावकी को सूचित किया जाना चाहिए प्रस्ताव को तभी पूरा माना जाता है जब - वश प्रस्तावकी को सूचित कर दिया जाय। जब तक प्रस्ताव भेजी न जाय इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है । इस प्रकार बिना सूचना के स्वीकृत कोई भी प्रस्ताव कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं कर सकता है।


ii. प्रस्ताव स्पष्ट, निश्चित तथा पूर्ण होना चाहिए प्रस्ताव स्पष्ट,

निश्चित तथा पूर्ण होना चाहिए । - कोई भी अस्पष्ट, अनिश्चित अथवा अपूर्ण प्रस्ताव वैध नहीं हो सकता है। 


iii. प्रस्ताव कानूनी संबंध में सक्षम होना चाहिए प्रस्ताव का अभिप्राय कानूनी संबंध बनाना होना चाहिए। कोई भी प्रस्ताव जिसमें कानूनी उत्तरदायित्व न उत्पन्न हो रहा हो वह वैध नहीं हो सकता है.


iv. प्रस्ताव स्पष्ट अथवा गर्भित हो सकता है एक प्रस्ताव स्पष्ट रूप से व्यक्त कर अथवा गर्भित हो सकता है। प्रस्ताव स्पष्ट तथा गर्भित दोनों भी हो सकता है। वह प्रस्ताव जो शब्दों द्वारा लिखकर या बोलकर व्यक्त किया जाता है उसे स्पष्ट प्रस्ताव कहते हैं। वह प्रस्ताव जो आचरण द्वारा व्यक्त किया जाता है उसे गर्भित प्रस्ताव कहते हैं।


V. प्रस्ताव विशिष्ट एवं सामान्य हो सकता है किसी विशेष कार्य के लिए अथवा विशेष व्यक्ति के सम्मुख प्रस्तुत किया जाने वाला प्रस्ताव विशेष प्रस्ताव होता है तथा इसके विपरीत सामान्य प्रस्ताव सामान्य जनता अथवा सरे विश्व के लिए संबोधित किया जा सकता है। अतः प्रस्ताव विशिष्ट एवं सामान्य दोनों हो सकता है।


vi. प्रस्ताव की विशेष शर्तों का संवहन प्रस्ताव में उल्लेख किये गए सभी शर्तों का संवहन


vii. अनिवार्य होता है। इसके आभाव में विशेष शर्ते लागु नहीं होंगी। प्रस्ताव विनय के रूप में होना चाहिए कोई भी प्रस्ताव हमेशा ही विनय के रूप में ही होना चाहिए। आज्ञा के रूप में दिया गया प्रस्ताव वैध नहीं माना जाता है।


viii. प्रस्ताव स्वीकृति प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए कोई भी प्रस्ताव दुसरे पक्षकार की सहमति प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए चाहे वह प्रस्ताव किसी कार्य को करने के लिए हो या न करने के लिए। केवल प्रस्ताव करने की इच्छा की घोषणा ही प्रस्ताव के लिए पर्याप्त नहीं होता है।


ix. प्रस्ताव के लिए निमंत्रण प्रस्ताव नहीं होता प्रस्ताव करने के लिए निमंत्रण को प्रस्ताव नहीं माना जा सकता है क्योंकि प्रस्ताव के लिए निमंत्रण करने वाला पक्षकार कोई प्रस्ताव नहीं रखता वरण वह दूसरे पक्षकार को प्रस्ताव करने के लिए निमंत्रण करता है। प्रस्ताव के लिए निमंत्रण देने वाला व्यक्ति प्रस्तावक न होकर वचनगृहीता के रूप में होता है।