प्रतिफल संबंधी वैधानिक नियम - statutory rules on consideration

प्रतिफल संबंधी वैधानिक नियम - statutory rules on consideration


1. प्रतिफल वचनदाता की इच्छा पर हो प्रतिफल सदैव वचनदाता की इच्छा पर ही होना चाहिए। यदि कोई कार्य वाचनदाता की बिना इच्छा से अथवा तृतीय पक्षकार की इच्छा से किया जाता है, तो वह वैधानिक प्रतिफल नहीं हो सकता है।


ii. प्रतिफल वचनगृहीता अथवा किसी अन्य व्यक्ति की ओर से हो सकता है प्रतिफल वचनगृहीता अथवा किसी अन्य व्यक्ति की ओर से हो सकता है। इस नियम को रचनात्मक प्रतिफल का सिद्धांत भी कहते हैं।


iii. प्रतिफल कुछ कार्य या विरति का वचन हो सकता है प्रतिफल कि परिभाषा से स्पष्ट है कि प्रतिफल कुछ कार्य या विरति का वचन हो सकता है।


iv. कुछ प्रतिफल अवश्य होना चाहिए प्रतिफल की दी गई परिभाषा के अनुसार कुछ प्रतिफल - अवश्य होना चाहिए। यह आवश्यक नहीं है कि प्रतिफल उपयुक्त अथवा पर्याप्त ही हो। 


v. प्रतिफल वास्तविक होना चाहिए प्रतिफल वास्तविक होना चाहिए। अतएव यदि प्रतिफल अस्पष्ट, अनिश्चित, छलपूर्ण, असंभव, भ्रामक अथवा कपटपूर्ण होगा तो वह प्रतिफल नहीं माना जायेगा ।


vi. प्रतिफल अवैधानिक नहीं होना चाहिए प्रतिफल अवैधानिक नहीं होना चाहिए क्योंकि ऐसा होने पर ठहराव व्यर्थ माना जाता है।


vil. प्रतिफल भूत, वर्तमान अथवा भावी हो सकता है भारतीय अनुबंध अधिनियम में दी गई परिभाषा के अनुसार प्रतिफल भूत, वर्तमान अथवा भावी हो सकता है।


viii. प्रत्येक अनुबंध के लिए प्रतिफल अलग-अलग होना चाहिए - यह भी आवश्यक है कि अलग-अलग अनुबंध के लिए प्रतिफल अलग-अलग होना चाहिए।


ix. प्रतिफल मूल्यवान होना चाहिए- राजनियम की दृष्टि से प्रतिफल का कुछ मूल्य होना आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं होता है तो वह ठहराव वैध नहीं होगा।