किस्म चक्र / गुणवत्ता चक्र की संरचना - Structure of Quality Circle
किस्म चक्र / गुणवत्ता चक्र की संरचना - Structure of Quality Circle
किस्म चक्र / गुणवत्ता चक्र की संगठनात्मक संरचना के चार स्तर होते हैं- सदस्य (members), नेता (leader), प्रोत्साहक (facilitator) तथा स्टीयरिंग समिति (steering committee)|
सदस्य: समान कार्य-समूह के सदस्य चक्र का निर्माण करते हैं। वह कभी भी अपनी इच्छा से चक्र छोड़ सकते हैं। किसी को भी सदस्यता ग्रहण करने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है। सदस्यता ग्रहण करने के लिए किसी भी प्रकार का पुरस्कार, प्रतिफल अथवा लाभ नहीं मिलता है। सक्रियता से सहभागिता न करने के लिए किसी जुर्माने या दंड का भी प्रावधान नहीं होता है। किन्तु सामान्यतः, सदस्यों की बैठकों में नियमित सहभागिता, सक्रीय सहभागिता तथा गुणवत्ता सम्बन्धी समस्याओं पर उनके विचारों की अभिव्यक्ति एवं योगदान, अपेक्षित होता है।
नेताः प्रत्येक गुणवत्ता चक्र की अध्यक्षता एक चयनित नेता के द्वारा होती है जो सभी सदस्यों के कार्यों का समन्वयन करता है तथा उन्हें मुख्य धारा से जोड़ता है। किसी विशेष अनुभाग, जहाँ गुणवत्ता चक्र का गठन हुआ हो, वहां के प्रबंधक अथवा पर्यवेक्षक नेता की भूमिका निभा सकते हैं। वह चर्चाओं की पहल, बैठकों का आयोजन तथा सदस्यों को सक्रीय सहभागिता के लिए अभिप्रेरित करने के साथ-साथ सदस्यों एवं प्रोत्साहक के बीच की कड़ी का अर्थात उन्हें जोड़ने का भी कार्य करता है। वह सदस्यों को समस्याओं की पहचान करने, उन पर चर्चा करने तथा समस्या समाधान तकनीकों के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी देता है। गुणवत्ता चक्र की स्थापना की पहल
प्रोत्साहकः प्रोत्साहक, गुणवत्ता चक्र तथा स्टीयरिंग समिति के मध्य एक महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। वह निम्नलिखित भूमिकाएँ निभा सकता है
rgin-bottom: 0pt; margin-top: 0pt;">(अ) चक्र नेताओं का सलाहकार एवं मार्गदर्शक की भूमिका ।
(ब) चक्र नेताओं तथा सदस्यों के शिक्षण एवं प्रशक्षण तथा पर्यवेक्षक को विश्वास में लेकर गुणवत्ता चक्र की स्थापना की पहल करना।
(स) स्टीयरिंग समिति को, गुणवत्ता चक्र की कार्यवाही तथा परिणामों के सम्बन्ध में प्रतिपुष्टि देना।
(द) गुणवत्ता चक्र द्वारा संचालित कार्यो, गतिविधियों, प्रक्रियाओं एवं कार्यक्रमों के मूल्यांकनकर्ता एवं समालोचक की भूमिका ।
प्रोत्साहक को एक समाजिक नेता के तौर पर कार्य करने के लिए प्रगाढ़ अंतर्वैयक्तिक सम्बन्ध बनाने होते हैं।
उसे स्वयं को एक सफल समन्वयक, प्रशिक्षक, शिक्षक, नवाचारी तथा प्रोत्साहक के रूप में सिद्ध करने की आवश्यकता होती है। उच्च स्तरीय प्रबंधकों के प्रशिक्षण के लिए उनसे, प्रोत्साहक के रूप में एक उत्कृष्ट संगठनात्मक संसाधन की अपेक्षा रखी जाती है।
स्टीयरिंग समितिः इसके अंतर्गत शीर्ष स्तरीय विभिन्न विभागों के प्रबंधन प्रतिनिधि तथा अधिकृत / मान्य कर्मचारी संघ के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि होते हैं। इस समिति के प्रमुख कार्य निम्नवत हैं:
(क) ऐसे विभाग जहाँ गुणवत्ता चक्रों का गठन करना है उनकी पहचान करना; चक्र के सदस्यों तथा नेता के प्रशिक्षण के प्रावधान तय करना; विचारणीय समस्याओं की पहचान करना; सुझावों को ग्रहण करना, उन पर चर्चा करना तथा उनका निर्धारण एवं क्रियान्वन करना आदि कार्यों से सम्बंधित उद्देश्यों को परिभाषित करने तथा उनके संचालन के लिए दिशा निर्देश तैयार करने के माध्यम से पूरे संगठन में गुणवत्ता चक्र कार्यक्रम को प्रायोजित करना ।
(ख) प्रोत्साहकों का चयन एवं प्रशिक्षण
(ग) प्रोत्साहकों को संसाधन उपलब्ध करना तथा उनका नैतिक समर्थन करना।
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