भारत में संतुलन को कम करने के सुझाव या उपाय - Suggestions or measures to reduce the balance in India
भारत में संतुलन को कम करने के सुझाव या उपाय - Suggestions or measures to reduce the balance in India
क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय या सुझाव दिए जा सकते हैं -
(i) पिछड़े हुए क्षेत्रों की सही पहचान क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने के लिए केंद्रीय सरकार को सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। मूल्यांकन की ऐसी नीति अपनाई जानी चाहिए, ताकि पिछड़े हुए क्षेत्रों की उचित ढंग से पहचान हो सके।
(ii) प्रत्येक राज्य के लिए विशेष कार्यक्रम- पिछड़े हुए क्षेत्रों की पहचान करने के पश्चात प्रत्येक राज्य के लिए विशेष कार्यक्रम लागू करने की आवश्यकता है। उदाहरण के तौर पर बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश जैसे पिछडे हुए राज्यों के विकास के लिए वहां के प्राकृतिक साधनों के विकास की योजनाएं आरंभ करनी चाहिए।
(iii) पिछड़े हुए क्षेत्रों को विशेष सुविधाएं सरकार को पिछड़े हुए प्रदेशों में अधिक से अधिक उद्योगों की स्थापना करनी चाहिए। उन्हें विशेष प्रकार की सुविधाएं व रियायतें प्रदान करनी चाहिए। जैसे आयकर में छूट आसान लाइसेंसिग नीति, उत्पादन कर में छूट तथा बिक्री कर में छूट इत्यादि ।
(iv) पिछड़े हुए राज्यों को अधिक अनुदान- पिछड़े हुए राज्यों को विकास करने के लिए अधिक अनुदान तथा सहायता की आवश्यकता है। यह कार्य केंद्रीय सरकार द्वारा किया जा सकता है। केंद्रीय सरकार के दिए गए अनुदान को पिछडे हुए क्षेत्रों के विकास के लिए लगाया जा सकता है। इससे पिछड़े हुए क्षेत्रों के विकास की संभावनाएं बढ़ेगी।
(v) कुटीर एवं लघु उद्योगों का विकास:- संतुलन क्षेत्रीय विकास के लिए कुटीर तथा लघु उद्योगों का विकास अधिक लाभदायक हो सकता है। इन उद्योगों की स्थापना में कम पूंजी लगानी पड़ती है। इस प्रकार बड़े-बड़े उद्योगों की एकाधिकार प्रवृत्तियों को रोका जा सकता है। (vi) कृषि का विकास हरित क्रांति का लाभ कुछ सीमित प्रदेशों विशेषकर हरियाणा तथा पंजाब का हुआ। पिछड़े हुए राज्यों में हरित क्रांति का लाभ प्राप्त करने के लिए उचित ऋण सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में उन्नत किस्म के बीज, रासायिक खादों, सिंचाई तथा ट्रैक्टरों इत्यादि की सुविधाए प्रदान करनी चाहिए। इन सुविधाओं के माध्यम से इन क्षेत्रों में कृषि का विकास किया जा सकता है।
(vii) औद्योगिक विकास - वर्तमान उद्योगों द्वारा क्षेत्रीय असमानताएं दूर नहीं की जा सकती । क्षेत्रीय समानताएं नए उद्योगों के विकास की सभावनाओं पर निर्भर करती है।
इस प्रकार नए उद्योगों के विकास से न केवल औद्योगिक विकास होगा, अपितु उद्योगों की स्थापना में क्षेत्रीय असमानताएं भी कम हो सकेगी।
(viii) अधोसंरचना का विकास सरकार को पिछड़े हुए क्षेत्रों में अधोसंरचना का विकास करना चाहिए। इसके अंतर्गत यातायात एवं संचार की सुविधाओं को उपलब्ध करवाना चाहिए। इससे पिछड़े हुए क्षेत्रों के विकास की अधिक सभावना हो सकती है तथा सतुलित विकास की संभावना भी बढ़ सकती है।
(ix) सार्वजनिक उपक्रमों का विकास सरकार को पिछड़े हुए क्षेत्रों में सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना करनी चाहिए।
इससे उन क्षेत्रों में सहायक उद्योगों की स्थापना हो सकेगी। परिणामस्वरूप कुछ हद तक क्षेत्रीय असमानता कम हो सकेगी। (x) कोषों की उपलब्धता- पिछड़े हुए क्षेत्रों की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर विकास कार्य करने चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को पर्याप्त कोष प्रदान करने चाहिए। इन क्षेत्रों में अधिक निवेश वाली परियोजनाएं केंद्रीय सरकार द्वारा आरंभ करनी चाहिए। सही समय पर कोषों की उपलब्धता द्वारा ही पिछड़े क्षेत्रों का विकास संभव हो सकता है ।
उपरोक्त वर्णन से प्रतीत होता है कि क्षेत्रीय असंतुलन आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा प्राकृतिक दृष्टि से देश के लिए हितकर नहीं होता। इसका देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए संतुलित क्षेत्रीय विकास अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न उपायों को एक साथ अपनाकर असंतुलन को समाप्त करके, संतुलित क्षेत्रीय विकास किया जा सकता है।
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