लक्ष्याकरण व्यूहरचनाएं - Targeting strategies
लक्ष्याकरण व्यूहरचनाएं - Targeting strategies
प्रमुख लक्ष्याकरण व्यूहरचनाएं निम्नलिखित हैं-
(i) अभेदित विपणन ऐसी व्यूहरचना जिसमें संगठन बाजार विभिन्नताओं की उपेक्षा कर देती है तथा समय बाजार के लिए एक उत्पाद प्रस्तुत करती है।
(ii) भेदित विपणन - लक्ष्याकरण की यह एक ऐसी प्यूहरचना है जिसमें संगठन अनेक बाजार खडो को सक्षित बाजार के रूप में चुनती है। तथा प्रत्येक खंड के लिए अलग उत्पाद प्रस्तुत करती है।
(1) केन्द्रित विपणन लक्ष्यीकरण की यह एक ऐसी व्यूहरचना है जिसमें संगठन एक या कुछ बाजार खंडों को लक्षित बाजार के रुप में चुनती है तथा प्रत्येक खंड के लिए पृथक उत्पाद प्रस्तुत करती है।
स्थापना व्यूहरचना खंडकरण तथा लक्ष्यीकरण के बाद उत्पाद को लक्षित बाजार में स्थापित करने का कार्य प्रारंभ होता है ताकि लक्षित बाजार कंपनी के विशिष्ट उत्पाद तथा छवि को मान्यता दे।
कोटलर का मत है कि यदि एक संगठन उत्पाद विपणन स्थापना के कार्य को सर्वोत्तम रूप से करती है तो वह व्यूहरचना के आधार पर अपने शेष विपणन नियोजन तथा स्थापना प्यूहरचना को भिन्नता के साथ बेहतर रूप में तैयार कर सकती है।
इसके अनुसार पोजीशनिंग के द्वारा लक्षित बाजार के मस्तिष्क में कंपनी द्वारा प्रस्तुत उत्पाद तथा उसकी छवि के बारे में एक विशिष्ट स्थान बना होता है जिसका अंतिम परिणाम उपभोक्ता केन्द्रित मूल्य सृजन होता है जो इस बात को बतलाता है कि लक्षित बाजार को कंपनी द्वारा प्रस्तुत उत्पाद को ही क्यों खरीदना चाहता।"
रामास्वामी तथा नामाकुमारी का मत है कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए केवल उत्पाद' ही सब कुछ नहीं होता, अत: उसका पोजीशनिंग भी एक महत्वपूर्ण क्रिया है। इनके अनुसार, पोजीशनिंग ब्राण्ड के लिए एक प्लेटफार्म है यह लक्षित उपभेक्ता तक ब्राण्ड को पहुंचाने में सहायता करता है। यह लक्षित उपभोक्ता के मस्तिष्क में प्रस्तुत उत्पाद को जमाने की क्रिया है। इसमें संगठन यह निश्चित करती है कि कैसे तथा किन पैरामीटर के भीतर लक्षित उपभोक्ता के सम्मुख उत्पाद को प्रस्तुत करना है।
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