परीक्षण मार्केटिंग किया जाये या नहीं - test marketing or not
परीक्षण मार्केटिंग किया जाये या नहीं - test marketing or not
इस हेतु निम्नलिखित घटकों को ध्यान में रखना चाहिए-
(i) यदि परीक्षण विपणन प्रतियोगीता को तीव्र कर सकता है या प्रस्तावित उत्पाद पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है तो परीक्षण विपणन न करना ही उचित रहता है।
(ii) यदि प्रस्तावित उत्पाद तकनीक दृष्टि से जटिल है तथा विस्तृत अनुसंधान की आवश्यकता रखता है तो उसका परीक्षण विपणन किया जा सकता है क्योंकि प्रतियोगी सरलता एवं शीघ्रता से उसकी नकल नहीं कर सकते है इसके विपरीत यदि परीक्षण विपणन में अधिक समय लगने तथा प्रतियोगी संस्थाओं द्वारा उत्पाद का नकल करने की संभावना है, तो परीक्षण विपणन करने का निर्णय संस्था के हित में होता है।
(iii) परीक्षण विपणन का निर्णय इस बात से भी प्रभावित होता है कि परीक्षण में विनियोग की जाने वाली राशि में कितना अंतर है? यदि अंतर बहुत अधिक है तो परीक्षण विपणन के बजाय उत्पाद को सीधे राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर देना उचित होता है। इसके विपरीत, अन्तर कम होने पर परीक्षण विपणन का निर्णय लिया जा सकता है।
(iv) यदि प्रस्तावित नव उत्पाद ऐसा है जो संस्था के ही वर्तमान उत्पाद को अप्रचलित कर सकता है या उसकी बिक्री को विपरीत रूप में प्रभावित कर सकता है तो परीक्षण विपणन का निर्णय लामों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद लिया जाना उचित होगा।
(v) यदि संस्था प्रतियोगियों से पूर्व ही बाजार में नया उत्पाद प्रस्तुत करना चाहती है तो ऐसा परीक्षण त्यागा जा सकता है।
(vi) यदि उत्पाद में शीघ्र सुधार संभव है तो परीक्षण विपणन का विचार छोड़ा जा सकता है। इसे विपरीत दशा में परीक्षण विपणन आवश्यक होता है।
(vii) यदि प्रस्तावित नव उत्पाद के बारे में प्रबंध यह महसूस करता है कि विपणन कार्यक्रम के लिए ग्राहकों की प्रतिक्रियाओं की जानकारी आवश्यक हैं।
तो ऐसी दशा में परीक्षण विपणन किया जाना उचित होगा।
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