परीक्षण मार्केटिंग प्रक्रिया - test marketing process

परीक्षण मार्केटिंग प्रक्रिया - test marketing process


पीटर. एम. चिसनाल के अनुसार, परीक्षण विपणन में निम्नलिखित कदम सम्मिलित हैं-


(I) उद्देश्यों को परिभाषित करना


(ii) सफलता के बिन्दु निश्चित करना


(iii) परीक्षण विपणन का समन्वय / एकीकरण


(iv) नियन्त्रण स्थापित करना


(v) प्रतिनिधि परीक्षण बाजारों का चयन करना


(vi) परीक्षण बाजारों की संख्या निश्चित करना


(vii) परीक्षण बाजार का समय निश्चित करना


(viii) परिणामों का मूल्यांकन करना


सर्वप्रथम, परिचालन उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाता है जिस पर उच्च प्रबंध की सहमति होती है। सामान्यत ये उद्देश्य उत्पाद में रुचि की मात्रा परीक्षण तथा वैकल्पिक विपणन मिश्रणों की सापेक्षिक कुशलता से संबंधित होते हैं। पैकेज, आकार, मूल्य संवर्द्धनात्मक पद्धतियों तथा विपणन का सावधानी से अध्ययन किया जाना चाहिए. किन्तु परीक्षण का डिजाइन इस प्रकार का होना चाहिए कि एक महत्वपूर्ण तथ्य के संबंध में विश्वसनीय उत्तर उपलब्ध हो सके।

यह विज्ञापन के विभिन्न स्तरों के प्रभाव का अध्ययन होता है अतः विभिन्न थलों का परीक्षण विभिन्न बाजारों में किया जाना उचित होता है।


परीक्षण विपणन के द्वितीय चरण में सफलता के प्रमाण निश्चित किये जाते हैं जिसके आधार पर परीक्षण बाजारों के निष्पादन का मूल्यांकन किया जा सकता है। ये विचारणीय बिंदु वास्तविक तथा विक्रय मात्रा के अनुपातिक होने चाहिए जो कि राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित की जा सकती है। तृतीय चरण में परीक्षण विपणन क्रियाओं की समय विपणन योजना के अंतर्गत उपयुक्तता निश्चित की जाती है। विक्रय का स्तर तथा विज्ञापन पर व्यय की जाने वाली राशि कम्पनी की सामान्य विपणन नीति के योग्य होनी चाहिए असामान्य परिणाम भी प्राप्त हो सकते है अगर परीक्षण बाज़ार क्षेत्र में विक्रेताओं का प्रयोग किया जाता है। अत्यधिक विज्ञापन भी सामान्य बाजार गतिशीलता का अव्यवस्थित कर देते हैं जोकि परीक्षण विपणन के अध्ययन से संबंधित है।


परीक्षण विपणन के चतुर्थ चरण में नियंत्रण' का निश्चित किया जाता है जिनके आधार पर परीक्षण बाजार में एक चल का प्रभाव मूल्यांकित किया जा सकता है।


पांचवा चरण प्रतिनिधि परीक्षण बाजारों का चयन करने से संबंधित है। इनका अत्यन्त सावधानी से चयन किया जाना चाहिए ताकि ये राष्ट्रीय बाजार का सक्षिप्त चित्र प्रस्तुत करे सकें। सामान्यतः प्रतिनिधि परीक्षण बाजारों का चयन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए


(I) वस्तु की प्रकृति


(ii) औसत प्रतियोगिता


(iii) बाजार का आकार


(iv) अपेक्षित ग्राहक


(v) वितरण श्रृंखला की विद्यमानता


(vi) जनसंख्या की आलोचनात्मक प्रवृत्ति आदि घटकों को ध्यान में रखा जाना उपयोगी रहता है। अगला कदम परीक्षण बाजारों की संख्या निश्चित करने से संबधित है परीक्षण बाजारों की संख्या निश्चित करते समय दो बातो पर विचार करना आवश्यक है


(i) प्रतिनिधित्व, और


(ii) लागत


सही प्रतिनिधित्व करने के लिए यह आवश्यक है कि नगरों की संख्या अधिकाधिक रखी जाये, लेकिन नगरों की संख्या में वृद्धि होती है। अत: निर्माता को अपने साधनों पर ध्यान रखते हुए नगरो की संख्या, वस्तु की प्रकृति माग बिक्री के सम्भावित क्षेत्र, क्षेत्रिय विभिन्नताओं की मात्रा और प्रतिस्पर्धियों के प्रयासों का आंकलन करके ही निश्चित करनी चाहिए।


परीक्षण बाजारों की संख्या निश्चित करने के बाद परीक्षण की समयावधि को निश्चित किया जाता है जो मुख्यत अध्ययन किये जा रहे उत्पाद, कय, मात्रा, उस उत्पाद बाजार विशेष में प्रतिस्पर्धा की मात्रा तथा परीक्षण किये जाने वाले चलों द्वारा नियंत्रित होती है।


नेल्सन की मान्यता है कि एक परीक्षण कार्यक्रम न तो सुदृढ और न पर्याप्त होना चाहिए जब तक कि उत्तर को विकसित करने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता नहीं होती है

सामान्यत इसमें ग्राहको के लिए उत्पादन करने की तथा पुनः बाजार में एक बार विशेषत: दो बार आने की प्रतिक्षा सम्मिलित होती है।" परीक्षण समयावधि कुछ दिन कुछ मास या कुछ वर्ष तक हो सकती है परीक्षण समयावधि पर्याप्त होनी आवश्यक है क्योंकि नय उत्पाद के सीमित विपणन के समय की ग्राहक प्रतिक्रियाओं एवं बाद की ग्राहक प्रतिक्रियाओं में अन्तर हो सकता है। अन्य शब्दों में यदि प्रारंभिक परीक्षण के संकेत अनुकूल न होने के कारण परीक्षण बंद कर दिया जाता है, तो कम्पनी एक अच्छे बाजार अवसर को खो सकती है।


परीक्षण विपणन की अन्तिम अवस्था मूल्यांकन तथा निर्माण लेने से संबंधित है। परीक्षण बाजार विपणन क्रियाओं के परिणामों का अत्यन्त सावधानी से विश्लेषण किया जाना चाहिए और सम्भावित विक्रय मात्रा का एक अनुमान लगाया जाना चाहिए जो कि राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित हो सकती है

तब यह क्रिया कम्पनी के साधनों तथा लाभ लक्ष्यों से संबंधित होती है। प्रबंध को यह निश्चित करना चाहिए कि क्या बाजार परीक्षण के दौरान प्राप्त समकों के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाये तथा उत्पाद को चालू किया जाये। अगर उत्पाद को चालू करने का निश्चय किया जाता है तो उत्पादन सुविधाओं के साथ विपणन व्यूहरचना को निकट से सम्बद्ध किया जाना चाहिए।


कोटलर के अनुसार, यदि परीक्षण विपणन से मिले परिणाम के अनुसार उच्च प्रयास तथा उच्च कय है, जो उत्पाद को तुरन्त हर अवस्था में भेज देना चाहिए, अर्थात बाजार में प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए। अगर बाजार परीक्षण उच्च प्रयास तथा कम मात्रा को प्रदर्शित करते हैं तो इसका पूर्नडिजाइन किया जाना चाहिए या समाप्त कर देना चाहिए। अगर बाजार परीक्षण कम प्रयास दर अथवा कय प्रदर्शित करते हैं तब उत्पाद अच्छा मालूम होता है किंतु विज्ञापन तथा विक्रय संवर्द्धन के तरीके के द्वारा अधिकाधिक लोगों को इसके प्रयोग हेतु प्रभावित किया जाना चाहिए। अन्त में, यदि परीक्षण कम प्रयास तथा कम कय दर प्रदर्शित करते है तो उत्पाद का विचार त्याग देना चाहिए।