परिवर्तनशील अनुपातों के नियम की तीन अवस्थाएं - Three Stages of the Law of Variable Proportions

परिवर्तनशील अनुपातों के नियम की तीन अवस्थाएं - Three Stages of the Law of Variable Proportions


प्रथम अवस्था - दन अधिकतम और में औसत उत्पादन है प्रथम अवस्थायह बढ़ते प्रतिफल के नियम की अवस्था को चित्र में मूल बिंददन के बराबर पहुंच जाता है जब चार श्रामिक लगाए जाते हैं। इस अवस्थासीमांत उत्पातु से OE तक व्यक्त किया गया है, जहां MP और AP वक्र मिलते हैं। इसमें TP वक्र तेजी से बढ़ता हुआ B तक पहुंच जाता है। इस प्रकार अवस्था का संबंध बढ़ते सीमांत और औसत प्रतिफल से है जो E पर बराबर हो जाता है।


दूसरी अवस्था – घटते प्रतिफल के नियम की अवस्थाद है इस अवस्थाह में औसत उत्पादन (AP) अपनी अधिकतम सीमा पर होता है

तथा सीमांत उत्पादन (MP) का बिंदू 0 होता है। इस बिंदू पर कुल उत्पादन उच्चपतम होता है। तालिका में इस अवस्थाह को उस जगह दिखाया गया है जहां भूमि को जोतनेके लिए श्रामिकों की संख्या काचार से बढाकर सात कर दी गई है चित्र में यह BEऔर CF के बीच की स्थिति है। यहां भूमि कम और गहनता से प्रयोग की जाती है तथा अधिक उत्पादन के लिए और अधिक श्रमिक लगाए जाते है। इस अवस्थास में कुल उत्पामदन घटती दर से बढता है तथा औसत और सीमांत उत्पादन घटता जाता है MP बिंदू F पर शून्यब है

तथा AP घटता जाता है और वक्र TP बिंदू पर अधिकतम है। केवल यही अवस्थार है जिसमें उत्पासदन लाभदायक है क्यों कि कुल उत्पादन अधिकतम हो होता हैं।


तीसरी अवस्था - यह दन इ है। उत्पाक सीमांत प्रतिफल की अवस्थाऋणात्म.स अवस्था में नही हो सकता क्योंकि कुल उत्पादन घटने लगता है और सीमांत उत्पादन ऋणात्मक हो जाता है। आठवां श्रमिक लगाने पर कुल उत्पादन 60 4- दनइकाई हो जाता है और सीमांत उत्पा 56 इकाई से घटकरइकाई हो जाता है चित्र में यह अवस्था बिंदूकित रेखा CF से शुरू होता है जहां MP वक्र X बहुत अधिक है अक्ष के नीचे है। यहां भूमि के अनुपात में श्रामिकों की संख्या के कारण खेती करना असंभव हो जाता है।