वचन के निष्पादन का समय और स्थान - Time and place of execution of promise
वचन के निष्पादन का समय और स्थान - Time and place of execution of promise
भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 46 से 50 तक में वचन के निष्पादन के समय और स्थान का वर्णन है। इस संबंध में सामान्य नियम यह है कि यदि अनुबंध के निष्पादन के समय और स्थान का उल्लेख ही, तो पक्षकारों को उसी स्थान और समय पर अनुबंध का निष्पादन करना चाहिए।
यदि अनुबंध में वचन के निष्पादन के समय और स्थान का उल्लेख न हो तो अनुबंध के निष्पादन के लिए निम्नलिखित नियम लागु होंगे :
i. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 46 के अनुसार, “जहाँ वाचंदाता अपने वचन का निष्पादन बिना वचनगृहीता के आवेदन पर ही करने का वचन देता है और निष्पादन हेतु अनुबंध में कोई निश्चित समय नहीं दिया गया है,
तो वचनदाता को उचित समय में निष्पादन करना चाहिए।"
ii. भारतीय अनिबंध अधिनियम की धारा 47 के अनुसार, "जब वचनदाता को अपने वचन का निष्पादन, बिना वचनगृहीता के आवेदन पर, किसी नियत दिन करना हो, तो वचनदाता को नियत दिन व स्थान पर कारोबार के काम के घंटों में अपने वचन का निष्पादन करना चाहिए।"
iii. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 48 के अनुसार, "जब वचन का निष्पादन नियत दिन किया जाना हो और वचनदाता से वचनगृहीता के आवेदन के बिना उसके निष्पादन का भर न लिया हो तो वचनगृहीता को उचित तथा कारोबार के घंटों में निष्पादन की मांग करनी चाहिए।"
iv. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 49 के अनुसार, "जब वचन का निष्पादन बिना वचनगृहीता के किया जाना हो और उसके लिये कोई स्थान नियत न किया गया हो, तो वचनदाता का कर्तव्य है कि वह उचित स्थान के लिए वचनगृहीता से आवेदन करे तथा वहां पर निष्पादन करे।"
V. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 50 के अनुसार, "वचन का निष्पादन किसी भी ऐसी रीति अथवा समय पर किया जा सकता है जिसका कि वचनगृहीता आदेश अथवा अनुमोदन करे।”
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