प्रशिक्षण की प्रक्रिया - training process

प्रशिक्षण की प्रक्रिया - training process


1) संगठनात्मक उद्देश्य और रणनीतियां:


प्रशिक्षण प्रक्रिया में पहला कदम संगठनात्मक उद्देश्यों और रणनीतियों का आकलन करना है। हम किस व्यवसाय में हैं? हम किस उत्पाद/ सेवा की गुणवत्ता किस स्तर पर प्रदान करना चाहते हैं? भविष्य में हम कहाँ पहुंचना एवं क्या करना चाहते हैं? ऐसे और इनके जैसे अन्य संबंधित प्रश्नों का उत्तर देने के बाद ही है कि संगठन को अपने मानव संसाधनों की ताकत और कमजोरियों का मूल्यांकन कर साकता है।


2) प्रशिक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण/ आकलन:


आवश्यकता विश्लेषण, प्रशिक्षण एवं विकास के माध्यम से वर्तमान समस्याओं तथा भविष्य की चुनौतियों का आकलन करता है।

आवश्यकताओं का मूल्यांकन दो स्तरों पर होता है- सामूहिक स्तर एवं व्यक्तिगत स्तर पर एक व्यक्ति को स्पष्ट रूप से प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, जब उसका निष्पादन अपेक्षा से कम हो या मानकोंके अनुसार ना हो, जब निष्पादन की कमी होती है। प्रदर्शन में कमी अपर्याप्त कौशल या ज्ञान या किसी अन्य समस्या के कारण हो सकती है।


प्रशिक्षण की आवश्यकता का निर्धारण मान निष्पादन क और वास्तविक के निष्पादन बीच के अंतर से होता है। अतः यह मानक निष्पादन और वास्तविक निष्पादन के बीच की खाई को पाटने का प्रयास करता है। यह अंतर स्पष्ट रूप से कर्मचारियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करता है। इसलिए, इस चरण के तहत, प्रशिक्षण की आवश्यकताओं के आकलन के लिए इस अंतर की पहचान की जाती है। 


3) संगठनात्मक प्रशिक्षण के उद्देश्यों का निर्धारण:


प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान करने के बाद, प्रशिक्षण के उद्देश्यों को निर्धारित करना आवश्यक है। इसलिए, प्रशिक्षण का प्राथमिक उद्देश्य मानक प्रदर्शन और वास्तविक प्रदर्शन के बीच के अंतर को समाप्त करने पर केंद्रित होना चाहिए। यह प्रशिक्षण उद्देश्यों को स्थापित करने के माध्यम से किया जा सकता है। इस प्रकार, प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य मनुष्य और नौकरी/ कार्य पद के बीच उचित मेल एवं तारतम्यता के लिए है।


प्रशिक्षण के मूल्यांकन की आवश्यकता (संगठनात्मक, कार्य और व्यक्ति), संगठन की वर्तमान प्रशिक्षण की पहल और कर्मचारी कौशल विन्यासों में किसी भी अंतर की पहचान कर सकता है। इन अंतरों का विश्लेषण करना चाहिए तथा इन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए एवं इन्हें संगठन के प्रशिक्षण उद्देश्यों में परिवर्तित करना चाहिए। अंतिम लक्ष्य, एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के विकास के माध्यम से वर्तमान और अपेक्षित निष्पादन के बीच के अंतर को समाप्त करना है।

कर्मचारी स्तर पर, प्रशिक्षण को 360 डिग्री मूल्यांकन पर आधारित सुधार क्षेत्रों पर केन्द्रित होना चाहिए।


4) प्रशिक्षण एवं विकास कार्यक्रम का प्रारूप निर्माण:


अगला कदम एक व्यापक कार्यक्रम योजना तैयार करना है जिसमें सीखने के सिद्धांत, अनुदेशात्मक प्रारूप, सामग्री, और अन्य प्रशिक्षण तत्व शामिल हैं। संसाधन और प्रशिक्षण प्रदान करने की विधियों को भी विस्तृत होना चाहिए। कार्यक्रम के विकास के दौरान, प्रशिक्षण के स्तर एवं प्रतिभागियों के 'सीखने की शैलियों' के पर भी विचार किया जाना चाहिए। अनेक संगठन सर्वप्रथम अपने प्रयासों का पूर्वाभ्यास करते हैं और संगठनात्मक स्तर पर कार्यक्रम शुरू करने से पहले अनुकूलन करने के लिए इस पर प्रतिपुष्टि लेते हैं।


इस चरण में कई बिन्दुओं पर विचार किया जाता है, जो निम्नलिखित हैं


क) प्रशिक्षण कहाँ आयोजित किया जा रहा है और कैसे?


• नौकरी / कार्य स्थल पर


• साइट पर लेकिन कार्य- स्टाल पर नहीं। उदाहरण के लिए संगठन के प्रशिक्षण कक्ष में ।


• साइट से दूर, जैसे- विश्वविद्यालय, कॉलेज कक्षा, होटल, आदि।


ख) प्रशिक्षण की उपयुक्त विधि का चुनाव


प्रशिक्षण विधियाँ निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए वांछित माध्यम है। प्रशिक्षण उद्देश्यों एवं प्रशिक्षण की आवश्यकताओं के निर्धारण के बाद,

एक उपयुक्त प्रशिक्षण पद्धति को चिह्नित एवं चयनित करना आवश्यक है जो उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होगी। अनेक विधियाँ उपलब्ध हैं. लेकिन संगठनात्मक प्रशिक्षण की आवश्यकताओं के अनुसार उनकी उपयुक्तता का मूल्यांकन किया


जाता है। ग) प्रशिक्षु कौन हैं? (श्रमिक/ सामान्य कर्मचारी / पर्यवेक्षीय एवं प्रबंधकिय अधिकारी/ आदि में से किस वर्ग को प्रशिक्षण की आवश्यकता है?)


घ) प्रशिक्षक कौन हैं? (संगठनात्मक अधिकारी/ विभागीय अध्यक्ष/ विषय विशेषज्ञ बाह्य विशेषज्ञ आदि में से कौन प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगा)


ङ) प्रसिक्षण का स्तर क्या होगा?


च) अधिगम सिद्धांत क्या होंगे?


5) प्रशिक्षण कार्यक्रम को क्रियान्वित करना:


क्रियान्वन चरण वह है जहां प्रशिक्षण कार्यक्रम वास्तविकता में क्रियाशील एवं गतिशील अवस्था में होता है। संगठनों को यह तय करने की आवश्यकता है कि प्रशिक्षण का संचालन आंतरिक होगा अथवा बाह्य रूप से समन्वित होगा। कार्यक्रम के कार्यान्वयन में प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों का निर्धारण तथा किसी भी संबंधित संसाधनों (सुविधाएं, उपकरण, आदि) की व्यवस्था शामिल हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम को आधिकारिक तौर पर प्रारम्भ किया जाता है, प्रोत्साहित किया जाता है और आयोजित किया जाता कार्यक्रम प्रभावशाली है, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण के दौरान, प्रतिभागी की प्रगति पर नजर रखी जाती है।


तय अवधि में, सम्बंधित विषय क्षेत्रों में ज्ञान और विशेषज्ञता वाले पेशेवरों द्वारा ही प्रशिक्षण का संचालन किया जाना चाहिए। एक प्रशिक्षक जिसके पास यह ज्ञान नहीं है कि वह क्या पढ़ाना चाहता है, के साथ कक्षा में रहने से भी कुछ भी बुरा नहीं है!

सबसे अच्छे विकल्प के रूप में आंतरिक संसाधन पुरुष, अनुभवी प्रतिभा या बाहरी पेशेवर प्रशिक्षण स्रोत का उपयोग करना चाहिए प्रशिक्षण इस प्रकार प्रस्तुत किया जाना चाहिए जिससे इसकी संरचना और अर्थ कर्मचारियों को स्पष्ट हो। एक प्रभावशाली प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रक्रिया में भाग लेने और उनके कौशल और / या ज्ञान का अभ्यास करने की अनुमति देता है। कर्मचारियों को चर्चा में भाग लेने, प्रश्न पूछने, उनके ज्ञान और विशेषज्ञता में योगदान देने, अनुभवों के माध्यम से सीखने, और यहां तक कि भूमिका निर्वहन अभ्यास के माध्यम से प्रशिक्षण प्रक्रिया में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।


एक उचित विधि के चयन के बाद, वास्तविक प्रशिक्षण प्रारम्भ होता है। इस चरण के अंतर्गत, तैयार योजना और कार्यक्रमों को वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए लागू किया जाता है।

इसके अंतर्गत, कर्मचारियों को संगठनात्मक गतिविधियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए विकसित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। कार्यक्रम कार्यान्वयन में निम्न कार्य सम्मिलित हैं:


• स्थान का निर्धारण करना और प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं आयोजित करना।


• प्रशिक्षण कार्यक्रम को निर्धारित करना


• कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन


प्रशिक्षुओं की प्रगति का निरीक्षण


6) मूल्यांकन एवं पुनरावलोकन:


प्रशिक्षण कार्यक्रम अपने लक्ष्यों को पूरा कर रहा है अथवा नहीं,

यह सुनिश्चित करने का एक तरीका छात्रों और प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण के मूल्यांकन का उपयोग करना है। प्रशिक्षण को अपने महत्वपूर्ण घटकों में से एक के रूप में, प्रशिक्षण की प्रभावशीलता को मापने का एक तरीका होना चाहिए। मूल्यांकन के माध्यम से नियोक्ता या पर्यवेक्षकों को सीखी गई मात्रा का निर्धारण करने में सहायता मिलेगी और परिणामस्वरूप, एक कर्मचारी के प्रदर्शन में सुधार हुआ है अथवा नहीं, इस तथ्य की पुष्टि हो सकेगी।


प्रशिक्षण कार्यक्रम को लगातार निरीक्षण की आवश्यकता होती है। अंत में, यह निर्धारित करने के लिए पूरे कार्यक्रम का मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि क्या यह सफल रहा और प्रशिक्षण उद्देश्यों प्राप्त हुए।

कार्यक्रम और प्रशिक्षक प्रभावशीलता और ज्ञान या कौशल अधिग्रहण निर्धारित करने के लिए सभी हितधारकों से प्रतिक्रिया प्राप्त की जानी चाहिए। इस प्रतिपुष्टि का विश्लेषण करने से कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के दोषों की पहचान करना संगठन के लिए सरल होगा। इस बिंदु पर, यदि अपेक्षित लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं होती है तो प्रशिक्षण कार्यक्रम या कार्य योजना को संशोधित एवं पुनरावृत्त किया जा सकता है।


परिणामों का मूल्यांकन इसलिए आवश्यक है क्योंकि संगठन का काफी मात्र में प्रशिक्षण और विकास पर ध एवं समय खर्च करते हैं, अतः इस कार्यक्रम का कितना लाभ होता है, यह निर्धारित किया जाना चाहिए। मूल्यांकन प्रशिक्षण और विकास कार्यक्रम के परिणामों को निर्धारित करने में सहायता करता है।

हालांकि इस अभ्यास में, या तो संगठन मूल्यांकन के लिए सुविधाओं को अनदेखा करते हैं अथवा उनमें कटौती करते हैं। 


7) प्रतिपुष्टि 


अंततः, प्रशिक्षण कार्यक्रम में कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने के लिए और भविष्य में इनमें सुधार के लिए एक प्रतिक्रिया तंत्र बनाया गया है। इस प्रयोजन के लिए, प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान उनकी कक्षा, भोजन, आवास आदि से संबंधित जानकारी एकत्रित की जाती है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कमजोर क्षेत्रों और भावी सुधारों को चिह्नित करने के लिए प्राप्त जानकारी को फिर तालिकाबद्ध, मूल्यांकित एवं विश्लेषित किया जाता है।