स्वामित्व का हस्तांतरण - transfer of ownership
स्वामित्व का हस्तांतरण - transfer of ownership
विक्रय अनुबंध के अंतर्गत जब तक विक्रेता से क्रेता की माल के स्वामित्व का हस्तांतरण न हो तब तक क्रेता को माल का स्वामित्व प्राप्त नहीं हो सकता है। माल के विक्रय का अनुबंध एक ऐसा अनुबंध है जिसके द्वाराविक्रेता एक नियम मूल्य के बदले माल का स्वामित्व क्रेता को हस्तांतरित करता है अथवा करने का ठरहाव करता है।
“माल के स्वामित्व के साथ-साथ जोखिम भी जाती है। "
विक्रय अनुबंध अधिनियम धारा 26 के अनुसार, जब कोई विपरीत ठहराव न हुआ हो,
माल उस समय तक विक्रेता की जोखिम पर रखा है जब तक कि उसका स्वामित्व क्रेता को हस्तांतरित नहीं हो जाता किंतु जब माल के स्वामित्व का हस्तांतरण क्रेता को हो जाता है तब माल की जोखिम क्रेता के ऊपर रहती है, चाहे माल की सुपुर्दगी हुई हो अथवा नहीं। "
अत: यदि माल का स्वामित्व क्रेताके पास चला गया है तो ऐसी दशा में विक्रय हुए माल की हानि तथा विनाश की जोखिम क्रेता पर पड़ती है, विक्रेता पहर नहीं, भले ही माल अभी विक्रेता के अधिकार में है।
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