भारत में गरीबी की प्रवृत्ति और आकार - Trend and size of poverty in India

भारत में गरीबी की प्रवृत्ति और आकार - Trend and size of poverty in India


भारत में गरीबी का अनुमान जनगणना अनुपात के आधार पर किया जाता है। गरीबी का अनुमान 1973-74 से उपभोग व्यय (तुलनात्मक प्रतिदर्श सर्वेक्षणों से प्रतिदर्श विधि) विधि द्वारा लगाया गया है। योजना आयोग ने गरीबी के कई अनुमान लगाए हैं गरीबी का अनुमान प्रकृति और आकार के आधार पर निम्न प्रकार से लगाया जा सकता है


गरीबी की प्रवृत्ति - पंचवर्षीय योजनाओं में गरीबी को समाप्त करने के लिए अनेक कार्यक्रम लागू किए गए, परंतु फिर भी गरीबों की संख्या में वृद्धि होती गई। भारत में 1973-74 में 321 करोड़ लोग निर्धनता रेखा से नीचे रह रहे थे। सन् 1973 से 1993 के दशकों तक गरीबों की संख्या लगभग स्थिर रही,

परंतु 1999-2000 में गरीबों की संख्या कम होकर 28 करोड़ और 2009-10 में यह बढ़कर 35.46 करोड़ हो गई। ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों की संख्या शहरी क्षेत्रों से अधिक रही, परन्तु 1999-2000 में दोनों क्षेत्रों में गरीबों की संख्या में कमी हुई है। दसवीं पंचवर्षीय योजना- इस योजना में अंतिम वर्ष 2007 तक गरीबों की संख्या को कम करके 22 करोड़ तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


भारत में राज्य स्तर पर गरीबी की प्रवृत्ति


भारत में विभिन्न राज्यों में गरीबों की संख्या विभिन्न है। यह अनुमान लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उतरांचल, मध्यप्रदेश इत्यादि राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा गरीबों की संख्या अधिक है। प्रतिशत के हिसाब से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत बिहार में सबसे अधिक है और पंजाब में सबसे कम है।