परीक्षण मार्केटिंग - trial marketing
परीक्षण मार्केटिंग - trial marketing
परीक्षण मार्केटिंग नव-उत्पाद अनुसंधान प्रक्रिया में प्रस्तावित उत्पाद के पूर्ण व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन एवं विपणन करने से पहले उपभोक्ता स्वीकृति की जानकारी हेतु अपनायी गयी तकनीक है फिलिप कोटलर के अनुसार, परीक्षण मार्केटिंग यह अवस्था है जिसमें पहली बार उत्पादन एवं विपणन कार्यक्रम का परीक्षण भली प्रकार कुछ चुने हुए एवं प्रमाणिक विक्रय वातावरणों में किया जाता है।"
मैसन एवं रथ के अनुसार, " परीक्षण मार्केटिंग में आशय वस्तु को बड़े पैमाने पर बेचने से पूर्व सावधानी से चुने हुए क्षेत्रों में परीक्षण के तौर पर उपभोक्ताओं को वस्तुओं का विज्ञापन करना है।"
कैडबरी के अनुसार, " परीक्षण मार्केटिंग के अंतर्गत एक ऐसे विशिष्ट शहर या दूरभाष क्षेत्र का चुनाव किया जाता है जो सम्पूर्ण बाजार क्षेत्र का उचित रूप में प्रतिनिधित्व करता है और इस क्षेत्र में उत्पाद का प्रवेश होने पर सम्पूर्ण बाजार विपणन संबंधी कार्यक्रम पूर्ण माना जाता है।
यदि इस कार्य को सावधानीपूर्वक तैयार किया जाये तो और उस पर उचित नियंत्रण रखा जाये तो ऐसा परीक्षण प्रबंध को पूर्ण एवं बड़े पैमाने पर बाजार में उत्पाद के प्रवेश तथा उसके विक्रय के अनुमानों को विकसित करने में सहायक होगा।" वस्तुतः परीक्षण विपणन इस तथ्य की जानकारी से संबंधित है कि लोग अपने परिवारों के लिए वस्तुओं को कय करते समय वास्तव में क्या करते हैं। इस अध्ययन से प्राप्त तथ्य भावी विपणन संबंधी योजनाओं के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।'
विलस्मर के अनुसार, "परीक्षण मार्केटिंग शीघ्र चिकने वाली उपभोक्ताओं वस्तुओं का विक्रय करने वाली अधिकांश कम्पनियों के जोखिम को कम करने वाले शास्त्रागार का एक निश्चित भाग है।"
डावर की मान्यता है कि परीक्षण की सहायता से विपणन प्रबन्धन यह जानना चाहते है कि वाणिज्यिक आधार पर किसी उत्पाद को बाजार में प्रवेश करने पर किन परिस्थितियों के उत्पन्न होने की संभावना हो सकती है।
लन्दन के मार्केटिंग सोसायटी समूह ने परीक्षण विपणन को बाजार क्षेत्र में विशेष उत्पाद के विपणन मिश्रण के एक या अधिक तत्वों के परीक्षण के रूप में परिभाषित किया है
जिससे कि लाभकारिता में अभिवृद्धि की जा सके। परीक्षण बाजार में यदि परीक्षण वाणिज्यिक दृष्टि से असफल सिद्ध होता है तो हानि कम करने के लिए विस्तृत बाजार को परिसीमित करने पर विचार किया जाता है।"
प्राईड तथा फसल के अनुसार, 'परीक्षण विपणन क्रेताओं की सम्भाव्य प्रतिक्रियाओं को निश्चित करने हेतु उत्पाद का उन क्षेत्रों में सीमित समावेश है जहां उसके विक्रय पर विचार किया गया है। परीक्षण विपणन जांच एवं विकास के चरणों का विस्तार नहीं है अपितु यह सम्पूर्ण विपणन मिश्रण के निदर्श का बाजार क्षेत्र में पूर्ण उपयोग है।"
इस प्रकार विपणन परीक्षण को नव उत्पाद अनुसंधान प्रक्रिया में प्रस्तावित उत्पाद के पूर्ण स्तरीय विपणन से पहले अपनाया जाता है।
इस तकनीक की प्रयुक्ति सीमित भौगोलिक क्षेत्र में उपभोक्ता स्वकरण की जाच करने हेतु की जाती है। सामान्यता ये भौगोलिक क्षेत्र उपभोक्ता बाजारों का प्रतिनिधित्व करने वाले होते हैं। यह तकनीक विपणन जोखिम को सीमित एवं नियंत्रित करने का एक उत्तम उपकरण हैं।
सामान्यतः सभी कम्पनियां परीक्षण विपणन का मार्ग नहीं अपनाती हैं। यह निर्णय मुख्यतः इस बात पर निर्भर होता है कि नये उत्पाद में निर्माता को कितना विश्वास है। उदाहरण के लिए एक विशेष दशा में यह अनुमान लगाया जाता है कि परीक्षण विपणन पर 1,00,000 रुपये व्यय होगा। कम्पनी का अनुमान है कि यदि उत्पाद असफल हो जाता है तो अधिकतम हानि 20,00,000 रुपये की हो सकती है। अब यदि प्रबंधक यह समझता है
कि इस उत्पाद के असफल होने की संभावना 1 / 100 है, तो तत्काल ही सम्पूर्ण बाजार के लिए प्रयास करने से सम्भावित हानि 20,00,000 x 1/100 = 20,000 रुपये होगी। इस प्रकार परीक्षण विपणन अपनाने पर कम्पनी को होने वाली हानि 1,00,000 रुपये की निश्चित हानि का 15 प्रतिशत है। यदि प्रबंधक यह सोचता है कि उत्पाद की सफलता के आसार केवल 50 प्रतिशत है तो परीक्षण विपणन अपनाने के लिए 1,00,000 रु. का व्यय करना उचित होगा, क्योंकि कम्पनी अपनी बड़ी हानि के नुकसान के प्रति केवल छोटी राशि का ही नुकसान करती है। इस प्रकार परीक्षण मार्केटिंग सभी आकार की कंपनियों के लिए एक प्रकार से जोखिम नियन्त्रण का काम करती है।
यद्यपि परीक्षण विपणन की तकनीक को उपभोक्ता एवं औद्योगिक उत्पादों के ग्राहक स्वीकरण की जांच हेतु समान तौर पर अपनाया जा सकता है, फिर भी इसका प्रयोग उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में अधिक किया जाता है
इसका कारण यह है कि आद्योगिक उत्पादों के बारे में ग्राहकों की प्रतिक्रियाए अनौपचारिक तौर पर प्राप्त हो जाने के कारण वहां इस तकनीक को कम अपनाया जाता है।
परीक्षण विपणन की तकनीक को अपनाये जाने के अनेक उद्देश्य हो सकते है। कुछ कारण निम्नलिखित है-
(1) प्रस्तावित उत्पाद के उपभोक्ता स्वीकरण का पता लगाना ताकि नव उत्पाद की विक्रय क्षमता को जान सके और भावी हानि से बचा जा सके।
(2) प्रस्तावित नव-उत्पाद में आवश्यक सुधारों की जानकारी करना ताकि उसका पूर्ण स्तरीय विपणन लाभप्रद हो सके।
(3) प्रस्तावित नव उत्पाद के लिए उपयुक्त विपणन व्यूहरचना का मालूम करना ताकि उत्पाद का सफल विपणन किया जा सके।
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