साख के प्रकार - type of credit

साख के प्रकार - type of credit


साख अनेक प्रकार की होती है। इसके विभिन्न रूपों का वर्गीकरण कई आधारों पर किया जा सकता है 


(क) स्त्रोत के अनुसार- साख की प्राप्ति के स्त्रोत के आधार पर साख तीन प्रकार की हो सकती है-


1. व्यक्तिगत अथवा गैर व्यक्तिगत साख, जिसे उन व्यक्तियों से प्राप्त किया जाता है जो ऋणों के लेन-देन का व्यवसाय करते हैं, परंतु साथ ही कुछ अन्य व्यवसाय भी करते हैं। 


2. संस्थागत साख जिसे बैंकों तथा अन्य ऐसी वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त किया जाता है जिनका व्यवसाय ऋणों का लेन-देन करना ही है।


3. व्यावसायिक साख जो व्यापारियों द्वारा वस्तुओं की उधार बिक्री के रूप में प्राप्त की जाती है


(ख) प्रयोग के अनुसार साख का प्रयोग उपभोक्ता, व्यवसाय, उद्योग तथा सरकार द्वारा किया जाता है। इस प्रकार उपभोक्ताओं द्वारा अपनी उपभोग संबंधी आवश्यकताओं की प्राप्ति के लिए प्राप्त किए गए ऋण उपभोक्ता साख कहलाते है। ऐसे ऋण जिनका उपयोग उत्पादन के लिए किया जाता है, उत्पादन साख कहलाते हैं।


विभिन्न व्यवसायियों द्वारा लिए गए ऋण व्यावसायिक साख कहे जाते है औद्योगिक साख का प्रयोग उद्योगपतियों द्वारा तथा कृषि साख का प्रयोग किसानों द्वारा उत्पादन में वृद्धि के लिए किया जाता है। उत्पादन के लिए प्रयोग किए गए ऋणों से लाभ यह होता है

कि इनका भुगतान करने में ऋणियों का कोई विशेष परेशानी नही होती क्योंकि उनकी आय अथवा भुगतान करने की क्षमता में साख के प्रयोग से वृद्धि होता है। सार्वजनिक साख के रूप में सरकार द्वारा भी जनता तथा बैंकों से ऋण लिए जाते हैं जिनका प्रयोग सरकार द्वारा अपने आय तथा व्यय के घाटे की पूर्ति के लिए किया जाता है।


(ग) अवधि के अनुसार यदि साख थोड़े समय के लिए दी जाय तो इसे अल्पकालीन साख कहते है। इसकी अवधि प्रायः 1 वर्ष तक की होती है। किसी भी समय माँग पर देय होने पर इसे माँग साख कहते हैं। 1 वर्ष से 5 वर्ष तक की अवधि के लिए मध्यकालीन साख तथा इससे अधिक अवधि के ऋण दीर्घकालीन साख कहलाते हैं।


(घ) धरोहर के अनुसार- धरोहर अथवा जमानत के अनुसार जिन ऋणों के पीछे यथेष्ट मूल्य की संपत्ति जमानत के रूप में रखी जाती है, उन्हें पूर्ण सुरक्षित साख कहते हैं। ऋणों के पीछे कोई जमानत न रखकर केवल ऋणों को व्यक्तिगत जमानत पर दी गई साख असुरक्षित साख कहलाती है। इन दोनों प्रकार की साख के बीच एक प्रकार की साख ऐसी भी होती है, जिसके पीछे साख के मूल्य से कम संपत्ति धरोहर के रूप में रखी जाती है, इसे अंशत सुरक्षित साख कहते हैं।