माल के प्रकार - type of goods

माल के प्रकार - type of goods


1. भावी माल :- भावी माल से आशय ऐसे माल से है जो विक्रय अनुबंध होने के प्रश्चात् विक्रेता द्वारा निर्मित अथवा उत्पन्न अथवा प्राप्त किया जाना है।

(धारा 2 (6))


2. विशिष्ट माल :- विशिष्ट माल से आशय ऐसे माल से है जो विक्रय अनुबंध करते समय पहचान लिया गया हो और जिस पर पक्षकारों की सहमति प्राप्त हो गई हो। (धारा 2 (14))


3. निश्चित माल :- यह एक प्रकार का विद्यमान माल होता है। यह माल खरीददार एवं विक्रय अनुबंध के उपरांत अलग करके निश्चित किया जाता है। यदि बेचने वाला विद्यमान माल में से अपनी पसंद का माल छाँटकर अलग कर लेता है जो यह माल निश्चित माल कहा जायेगा।


4. अनिश्चित माल :- अनिश्चित माल से आशय ऐसे माल से है जो विक्रय अनुबंध करते समय पहचाना न गया हो, वरन किंवल विवरण द्वारा परिभाषित किया गया हो, अथवा प्रलेख हो ।

(धारा 2 (6))

दोष :- दोष का आशय गलत कार्य अथवा त्रुटि से है।


मूल्य :- मूल्य से आशय किसी माल की बिक्री के प्रतिफल से है जो कि सदैव मुद्रा में ही होना चाहिए।

(धारा 2 (10))


दिवालिया : दिवालिया से आशय उस व्यक्ति से है जिसने व्यापार की साधारण प्रगति में या तो अपने ऋणों की चुकाना बंद कर दिया हो अथवा अपना ऋणों की चुकाना बन्द कर दिया हो अथवा ऋण चुकाने में वह असमर्थ हो गया हो, चाहे उसने दिवालिया होने का कार्य किया हो अथवा नहीं। (धारा 2 (8) )


सम्पत्ति :- सम्पत्ति से आशय केवल विशिष्ट सम्पत्ति से न होकर माल की सामान्य सम्पत्ति से है।

(धारा 2 (11))


व्यापारिक प्रतिनिधि :- व्यापारिक प्रतिनिधि ऐसे व्यक्ति को कहते हैं, जिसे कारोबार की साधारण प्रगति में प्रतिनिधि की हैसियत से माल बेचने या विक्रय हेतु माल भेजने या खरीदने अथवा माल की प्रत्याभूमि पर रूपया उधार लेने का अधिकार प्राप्त हो।

(धारा 2 (9))


माल की किस्म : माल की किस्म से आशय उसकी दशा अथवा स्थिति से है।

(धारा 2 (12))