साझेदारी के प्रकार - type of partnership
साझेदारी के प्रकार - type of partnership
साझेदारी मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार की होती है:
1. ऐच्छिक साझेदारी साझेदारी के अनुबंध में यदि साझेदारी की अवधि संबंधी कोई जानकारी नहीं दी गई हो तो ऐसी साझेदारी को ऐच्छिक साझेदारी कहा जाता है। इस प्रकार की साझेदारी साझेदारों की इच्छा के अनुसारी किसी भी व्यवसाय को अनिश्चित समय तक करने के लिए प्रारंभ की जा सकती है तथा उस सबकी अथवा किसी एक साझेदार की इच्छा पर कभी भी समाप्त की जा सकती है।
2. विशिष्ट साझेदारी किसी भी विशेष काय अथवा व्यवसा के लिए किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझेदारी हो सकती है और ऐसी साझेदारी को विशिष्ट साझेदारी कहा जाता है।
3. निश्चित समय के लिए साझेदारी ऐसी साझेदारी किसी निश्चित समय के लिए होती है तथा समय की समाप्ति के उपरांत साझेदारी समाप्त हो जाती है।
4. सीमित साझेदारी जिस साझेदारी संस्था में कुछ साझेदारों का दायित्व उनके द्वारा दी गई पूँजी की सीमा तक ही सीमित होता है, उसे सीमित साझेदारी कहते हैं। इस प्रकार की साझेदारी का उद्गम उन व्यक्तियों को प्रोत्साहन देने के लिए हुआ है जो असीमित दायित्व स्वीकार करना नहीं चाहते हैं।
5. अवैध साझेदारी - भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 23 के अनुसार कोई भी साझेदारी जो किसी अवैधानिक व्यवसाय के लिए की गई हो अथवा जिसका उद्देश्य गैर-कानूनी हो, व्यर्थ होती है।
इस प्रकार की कोई भी साझेदारी निम्नलिखित परिस्थितियों में अवैध होती है:
i) जिसके निर्माण का उद्देश्य अवैधानिक हो,
ii) जिसका व्यवसाय जन नीति अथवा अंतरराष्ट्रीय नीति के विरूद्ध हो,
iii. जिस साझेदारी में शत्रु राष्ट्र का व्यक्ति साझेदार हो,
iv) बैंकिंग व्यवसाय की दशा में 10 तथा साधारण व्यवसाय में 10 से अधिक साझेदारों की संख्या हो ।
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