विज्ञापन अनुसंधान के प्रकार - types of advertising research
विज्ञापन अनुसंधान के प्रकार - types of advertising research
विज्ञापन अनुसंधान विज्ञापन की लागते विपणन की लागते है अतः विज्ञापन अनुसंधान द्वारा कम से कम लागत में अधिक प्रभावशाली विज्ञापन किया जाना चाहिए विपणन अनुसंधान के द्वारा यह जानकारी प्राप्त की जा सकती है कि
(i) विज्ञापन के सबसे अच्छे माध्यम या तरीके कौन से है? तथा
(ii) उनको उपयोग में लाने से विज्ञापन पर किये जाने वाला व्यय की कितना अधिक प्रतिफल मिल सकता है। इस प्रकार विज्ञापन अनुसंधान को दो भागों में बांटा जा सकता है प्रथम माध्यम अनुसंधान और द्वितीय प्रतिलिपि जाच माध्यम अनुसंधान में यह देखा जाता है कि विभिन्न विज्ञापनों के माध्यम से कितने लोगों से संपर्क होता है तथा प्रतिलिपि परीक्षण में यह देखा जाता है कि विज्ञापन कितना प्रभावशाली रहा है।
1. माध्यम अनुसंधान -
विज्ञापन संदेश के कुशल वाहक कौन से हो सकते है? इसका चयन करने के लिए ही माध्यम अनुसंधान किया जा सकता है विज्ञापन के प्रमुख माध्यम निम्नलिखित है
(i) प्रेस (समाचार पत्र और पत्रिकाएं)
(ii) रेडियो
(iii) सिनेमा
(iv) पोस्टर
(v) प्रत्यक्ष डाक
(vi) टेलीवीजन
(vii) इन्टरनेट
(क) प्रेस माध्यम में मुख्यत तीन बातों पर विचार किया जाता है।
प्रथम विभिन्न प्रकाशनों के पाठकों की रचना तथा संख्या के बारे में जानकारी।
द्वितीय एक उत्पाद विशेष के लिए या समूह के लिए अधिक प्रभावशाली प्रकाशन कौन सा है?
तृतीय- प्रत्येक प्रति हजार पाठकों पर कितनी लागत आती है?
इस प्रकार के अनुसंधान में जिन प्रश्नों पर विचार किया जाता है, ये निम्न प्रकार के हो सकते हैं :
(i) कितने लोग किन प्रकाशनों को पढ़ते हैं?
(ii) उनकी रचना किस प्रकार की हर (आयु लिंग, वैवाहिक स्तर, श्रेणी, क्षेत्र नगर का विस्तार व्यवसाय शिक्षा, कुछ वस्तुओं का जो स्थायी प्रकृति की हो, उनकी स्वामित्व और ऐसी ही संबंधित सूचनाएं)
(iii) कुल जनसंख्या के औसतों में ये लोग किन दशाओं में किस सीमा तक भिन्न है?
(iv) क्या प्रकाशन उच्च वर्ग के लोगों द्वारा अधिक पढ़े जाते है या श्रमिक वर्ग के लोगों में वे ज्यादा प्रचलित है?
(v) ऐसे कितने लोग है जो एक प्रकाशन के साथ दूसरे प्रकाशनों को भी पढ़ते हैं?
(vi) कितने प्रकाशन एक ही वर्ग के लोगों द्वारा पढ़े जाते है?
(vii) आर. एफ आई (Reach, Frequency, Impact )
प्रेस माध्यम अनुसंधान का प्रचलित मध्यम वयस्क जनसंख्या के एक सैम्पल के साक्षात्कार द्वारा किया जा सकता है। सहायक स्मरण के द्वारा साक्षात्कारों को पूरा किया जाता है। यह प्रश्न पूछा जा सकता है कि साक्षात्कार की विधि से पूर्व के दिन या सप्ताह या महीने में किन प्रकाशनों को पढ़ा गया?
प्रकाशनों में कौन से प्रमुख थे जैसे- दैनिक, साप्ताहिक, मासिक ? अब प्रश्न यह उठता है कि पाठक किसको समझा जाय? इस संबंध में यह कहा जा सकता है कि प्रश्नों की प्रकृति और उसमें निहित शब्दों की परिभाषा के आधार विभिन्न पाठक सर्वेक्षण के परिणाम भिन्न हो सकते है। एक सर्व उपभोक्ता अनुसंधान के एक भाग के रुप में किये जाते हैं और मूल प्रश्नावली में इस प्रकार के प्रश्न जोड़े जा सकते हैं
(ख) रेडियो अनुसंधान
रेडियो अनुसंधान में उन स्टेशनों का सर्वे किया जाता है जहां से विज्ञापन प्रस्तावित करने की व्यवस्था हो। इस प्रकार के अनुसंधान से संबंधित समस्याए निम्नलिखित है-
(i) प्रत्येक प्रोग्राम को सुनने वालों की संख्या का निश्चय करना
(ii) प्रोग्राम सुनने वालों की दूसरे प्रोग्राम सुनने वालों से तुलना करना
(iii) सुने गये प्रोग्रामों के बारे में सुनने वालों की पसंद और नापसंद
(iv) रेडियो द्वारा जो विज्ञापन प्रसारित किये गये हैं. उनकी प्रभावशीलता
रेडियो अनुसंधान के लिए निम्न तरीके काम में लिये जा सकते हैं:
प्रथम - वयस्क जनसंख्या के एक निदर्शन का साक्षात्कार करना और ऐसे साक्षात्कार के दिने से पूर्व सुने गये प्रोग्रामों के बारे में पूछताछ करना।
द्वितीय - कुछ लोगों का एक पैनल तैयार करना (जो प्रोग्राम सुनते हैं) और उसकी राय के आधार पर यह तय करना कि वे प्रोग्राम सामान्यत पसंद किये गये है या नहीं।
तृतीय - शाम के समय टेलिफोन करके यह पूछना कि क्या कोई रेडियो प्रोग्राम सुना जा रहा है तथा वह किस स्टेशन से सुना जा रहा है। यह आकस्मिक जांच पद्धति है जो प्रायः विकसित देशों में अधिक प्रचलित है।
(ग) पोस्टर अनुसंधान
पोस्टर अनुसंधान में यह पता लगाया जा सकता है कि पोस्टर लगाने के लिए कौन से स्थान दूसरे स्थानों की अपेक्षा अधिक उपयुक्त हैं।
इस संबंध में सह भी शांत करना चाहिए कि पोस्टरों की कितनी संख्या होनी चाहिए ताकि एक निश्चित समय में जनसंख्या का एक निश्चित भाग उन्हें देख सके।
पोस्टर अनुसंधान में काम आने वाली तकनीक निम्नलिखित है-
(i) नगर या जिले की एक जनसंख्या के एक हिस्से से पूछकर यह पता लगाया जा सकता है कि ये एक दिन या सप्ताह में कितनी बार आते हैं जहां पोस्टर लगे हैं। पोस्टर लगे हुए स्थलों का एक मानचित्र तैयार किया जाता है। उधर से गुजरने वालों की संख्या नोट कर ली जाती है।
(ii) साक्षात्कार करने वालों को चुने हुए पोस्टर स्थलों पर नियुक्त किया जाता है, जो आने-जाने वाले से यह पूछते हैं कि क्या उन्होंने पोस्टर देखे हैं, और वे उसके बारे में क्या बता सकते है
अनुवीक्षक वहा से गुजरने वाले लोगों की संख्या भी नोट कर लेता है।
(घ) डाक माध्यम
प्रत्यक्ष डाक में दो बातों की जानकारी चाही जा सकती है-
प्रथम - डाक सूचियों की प्रभावशीलता ऐसी सूचिया कभी पूरी नही होती है, फिर भी उनमें से कुछ नामों को निदर्शन के रूप में लिया जा सकता है और उसके आधार पर सारी सूची की प्रभावशीलता का अनुमान लगाया जा सकता है।
द्वितीय विभिन्न प्रकार की डाक के उत्तर में प्राप्त सूचनाओं के आधार पर भी अनुमान लगाया जा सकता है जैसे ग्राहकों की संख्याए क्षेत्र आदि । इससे यह पता चल जाता है कि किस क्षेत्र में कितने ग्राहक पर उसका प्रभाव पड़ा है। इस उद्देश्य के लिए कूपन भी काम में लिए जा सकते है।
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