बाह्य बचतों के प्रकार - Types of External Economics
बाह्य बचतों के प्रकार - Types of External Economics
बाह्य बचतें अनेक प्रकार की होती हैं, जिनमें निम्न प्रमुख हैं-
1. केन्द्रीयकरण की बचतें- जब बहुत-सी उत्पादन संस्थायें एक ही स्थान पर केन्द्रीत हो जाती है तो इन संस्थाओं को एक ही स्थान पर केन्द्रीत होने के परिणामस्वरूप अग्र प्रकार लाभ प्राप्त होते हैं
1. प्रत्येक संस्था को आसानी से कुशल, अर्द्धकुशल तथा अकुशल श्रमिक उपलब्ध हो जाते हैं।
2. श्रमिकों के प्रशिक्षण की सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
3. सस्ती दर पर परिवहन एवं संचार के साधन उपलब्ध
4. सहायक एवं पूरक उद्योगों की स्थापना ।
5 पर्याप्त मात्रा में न्यूनतम दर पर कच्चे माल की आपूर्ति बनी रहती है।
6. बैकिंग, बीमा तथा वित्तीय संस्थाओं के कार्यालय स्थापित हो जाते हैं।
7 प्रचुर मात्रा में कम दर पर शक्ति के साधन सुलभ ।
8. अवशिष्ट पदार्थों का सदुपयोग सम्भव
9 मरम्मत एवं तकनीकी सुविधाओं का विकास।
2. आकार एवं शक्ति के कारण - बचत उद्योग के आकार में वृद्धि से बड़ी-बड़ी फर्मे मिलकर यातायात सुविधा, विज्ञापन व्यवस्था, शोध एवं अनुसन्धान कार्य करती है जिसका लाभ सभी फर्मों को मिलता है। एक ही स्थान पर केन्द्रित फर्मे सामूहिक संघ द्वारा बनाकर आपसी प्रतिस्पर्द्धा से छुटकारा पा सकती है। संयुक्त रूप से चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा नियमित रूप से तकनीकी पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन किया जा सकता है तथा केन्द्रीय शोध संस्थान की स्थापना की जा सकती है जिसका लाभ सभी फर्मों को मिलता है।
3. ज्ञान की बचत - एक ही स्थान पर केन्द्रीत फर्मे अपने व्यवसाय सम्बन्धी ज्ञान का आदान-प्रदान बहुत आसानी से कर सकती हैं जिससे सभी फर्मों को लाभ होता है।
यह ज्ञान कच्चे माल के क्रय के सम्बन्ध में, निर्मित माल के बाजार के सम्बन्ध में तथा उत्पादन लागत के सम्बन्ध में हो सकता हैं।
4. उद्योग के राष्ट्रीय महत्व के फलस्वरूप प्राप्त बचतें- एक ही स्थान पर उद्योग का केन्द्रीयकरण एवं विकास होने के कारण उस स्थान का महत्व बढ़ जाता है। केन्द्रीत उद्योग का देश की अर्थव्यवस्था मे विशेष महत्व बन जाता है, उस उद्योग के विकास, विस्तार एवं स्थिरता का देश के रोजगार एवं व्यापार पर बहुत प्रभाव पड़ता है, अतः सरकार को उस उद्योग के विकास, विस्तार तथा संरक्षण के लिए उचित नीतियाँ बनानी पड़ती है।
5 नियोज की बचतें - एक ही स्थान पर उद्योग का केन्द्रीयकरण होने से नियोजन की बचते प्राप्त करना सम्भव है, क्योंकि एक ही फर्म के नियोजित विकास का तुरन्त लाभ मिल जाता है। उद्योग में विशिष्टीकरण आसान हो जाता है। उद्योग की कुछ बड़ी व जटिल उत्पादन प्रक्रियाओं को छोटी एवं सरल प्रक्रियाओं में विभाजित किया जा सकता है। उद्योग की क्रियाओं को पृथक-पृथक करके विशिष्ट फर्मों द्वारा अधिक कुशलता से संचालित किया जा सकता है।
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