गर्भित अथवा अर्द्ध-अनुबंधों के प्रकार - Types of implied or quasi-contracts
गर्भित अथवा अर्द्ध-अनुबंधों के प्रकार - Types of implied or quasi-contracts
अर्द्ध अनुबंधों के प्रकार निम्नलिखित है:
i. अनुबंध करने में असमर्थ व्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मांग - यदि अनुबंध करने में असमर्थ किसी व्यक्ति को अथवा किसी ऐसे व्यक्ति को जिसका पालन करने के लिए वह वैध रूप से बाध्य है कोई दूसरा व्यक्ति उसकी स्थिति के अनुकूल जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है तो पूर्ति करने वाला पक्ष ऐसे असमर्थ व्यक्ति की संपत्ति में से परिशोध प्राप्त करने का अधिकारी है।
ii. अपने हित के लिए अन्य व्यक्ति की ओर से भुगतान कर देने के लिए परिशोध यदि कोई व्यक्ति अपने हित के लिए कोई ऐसा भुगतान चुकता है
जिसके लिए राजनियम के अनुसार कोई दूसरा व्यक्तिमूल ऋणी से परिशोध पाने का अधिकारी है।
iii. निःशुल्क न होने वाले कार्य का लाभ उठाने वाले व्यक्ति का दायित्व - जब कोई व्यक्ति निःशुल्क ही कार्य करने का अभिप्राय न रखते हुए किसी अन्य व्यक्ति के लिए वैधानिक रूप से कोई कार्य करता है अथवा उसे कोई वस्तु देता है और अन्य व्यक्ति उससे लाभ उठता है, तो दूसरा व्यक्ति प्रथम व्यक्ति के प्रति क्षतिपूर्ति करने के लिए अथवा वस्तु लौटने के लिए बाध्य है ।
iv. माल पाने का उत्तरदायित्व - जब एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति का पड़ा हुआ माल मिलता है और वह उसे अपने संरक्षण में ले लेता है तो उसका उत्तरदायित्व निक्षेपगृहीता के समान हो जाता है ।
V.गलती तथा उत्पीड़न के अंतर्गत धन अथवा वस्तु पाने वाले का दायित्व - जिस व्यक्ति को गलती अथवा उत्पीड़न के अंतर्गत धन अथवा वस्तु दे दी गई है, उसे धन या वस्तु लौटना पड़ेगा।
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