विपणन अनुसंधान के प्रकार - types of marketing research

विपणन अनुसंधान के प्रकार - types of marketing research


विपणन अनुसंधान के अर्थ एवं विकास का विवेचन करने से पूर्व अनुसंधान शब्द का यहाँ सक्षिप्त परिचय देना आवश्यक है विपणन के संदर्भ में


तीन प्रकार के अनुसंधान हो सकते हैं


(1) विक्रय अनुसंधान


(2) बाजार अनुसंधान


(3) विपणन अनुसंधान 


(i) विक्रय अनुसंधान विक्रय अनुसंधान से आशय किसी व्यावसायिक संगठन में ही उपलब्ध साधनों से बाजार मे विक्रय की मात्रा के सम्बन्ध में पूर्वानुमान करने है।

इसके अंतर्गत आंतरिक सूचनाओं और बाह्र तथ्यों एवं घटकों के मध्य सन्तुलन स्थापित करके आवश्यक निष्कर्ष निकाले जा सकते है। इसलिए कहा जा सकता है कि विपणन अनुसंधान का कार्यक्रम विक्रय अनुसंधान से प्रारम्भ होता है, क्योंकि विक्रय अनुसंधान के अंतर्गत ही विपणन सम्बन्धि समस्याओं के समाधान हेतु महत्वपूर्ण तथ्यों की खोज तथा व्यवस्था की जाती है सतर्कतापूर्वक किया गया विक्रय अनुसंधान विपणन की किसी भी समस्या को समझने तथा उसके समाधान हेतु आवश्यक उपाय करने में सहायक होता है। चूंकि ऐसे अनुसंधान को व्यवस्था अधिकांशत: आंतरिक हो होती है, अतः इस पर किये जाने वाले व्यय न्यूनतम होते हैं।


(ii) बाजार अनुसंधान: बाजार अनुसंधान का अभिप्राय बाजार की प्रकृति उसके आकार भिन्न-भिन्न बाजारों की सापेक्षिक लाभदायकता,

बाजार की प्रकृ ति में परिवर्तन, बाज़ार को प्रभावित करने वाले आर्थिक घटकों आदि के अध्ययन एवं विश्लेषण से है। इस प्रकार का अनुसंधान संस्था के बाहर अनेक सोतों से सूचनाएँ प्राप्त करके किया जाता है।


(iii) विपणन अनुसंधान विपणन की अवधारणा विक्रय की अवधारणा से भिन्न है, क्योंकि जैसा कि पहले स्पष्ट किया जा चुका है, विपणन का उद्देश्य संघटित क्रियाओं द्वारा ग्राहकों को संतुष्टि प्रदान करना है।


कोटलर के अनुसार, "उत्पाद विक्रय एवं प्रवर्तन का मार्ग-दर्शन करते हैं और विक्रय एवं प्रवर्तन की विक्रय मात्रा के माध्यम से लाभ अर्जित करने में सहायक होते है।"


इस कारण ही आज सर्वत्र विक्रय अवधारणा के स्थान पर विपणन की अवधारणा को प्रतिस्थापित किया गया है

विपणन की अवधारणा में अन्तर्निहित मूल समस्या यह खोज करने से है कि ग्राहक की अपेक्षाएँ एवं आवश्यकताएँ क्या है तथा कम्पनी किस प्रकार लाभ पर इन अपेक्षाओं एवं आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती हैं? विपणन अनुसंधान इसी अन्तरापृष्ठ से सम्बन्धित है। वस्तुत ग्राहक की संतुष्टि तथा उसका अनुकूलन ही वर्तमान विपणन अनुसंधान की विशेषता है। इस सम्बन्ध में टोस्डल ने लिखा है, 'विपणन अनुसंधान में कम्पनी के आंतरिक एवं बाह्य दोनों प्रकार की सूचनाओ के आधार पर विक्रय मात्रा ज्ञात की जाती है जिससे उसे लाभ प्राप्त हो सके। इस प्रकार विपणन अनुसंधान एक व्यापक शब्द है जिसमे विक्रय अनुसंधान और बाजार अनुसंधान दोनों ही सम्मिलित है पृष्ठ पाँच पर दिये गये रेखाचित्र द्वारा इसे आसानी से समझा जा सकता है।


आधुनिक विपणन अनुसधान के विकास के प्रारंभिक चरणों में बाजार अनुसंधान तथा विपणन अनुसंधान में अन्तभेद किया जाता था उस समय बाजार अनुसंधान से आशय बाजार को परिभाषित करने की प्रक्रिया से था और विपणन अनुसंधान एक ऐसा व्यापक शब्द माना जाता था जिसका सम्बन्ध मुख्यत विपणन प्रक्रिया के विषय में अपेक्षित सूचनाएँ एवं सुझाव प्रस्तुत करने से होता था. परन्तु स्टिल एवं कंडिफ के अनुसार बाजार अनुसंधान और विपणन अनुसंधान दोनो पर्यायवाची शब्द है और दोनों एक-दूसरे के स्थान पर प्रयुक्त किये जा सकते हैं।