गरीबी रेखा के प्रकार - types of poverty line
गरीबी रेखा के प्रकार - types of poverty line
(क) सापेक्ष निर्धनता
यह विभिन्न वर्गों, क्षेत्रों तथा विभिन्न देशों के तुलनात्मक अध्ययन को संबोधित करती है। वह देश अथवा वर्ग जिसका जीवन रहन-सहन का स्तर ऊंचे रहन-सहन के स्तर में रहने वाले लोगों से निम्न है, उन्हें निर्धन अथवा सापेक्ष रूप से निर्धन स्वीकार किया जाता है। 2014 में प्रकाशित वर्ल्ड रिपोर्ट ने कुछ देशों के समक इस प्रकार से प्रस्तुत किए है। कुछ चुने देशों की प्रति व्यक्ति आय (डॉलर में)
देश प्रति व्यक्ति आय (डॉलर में)
जर्मनी 38980
जापान 43740
यू. एस. ए. 34580
यू. के 37600
चीन 1740
भारत 720
इन समको से हम सुरक्षित ढंग से निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि भारत जैसे देशों की प्रति व्यक्ति आय अमेरिका जैस देशों की तुलना में काफी कम है। इसलिए भारत विकसित देशों की तुलना में एक गरीब देश है। इसीलिए इसे एक अल्पविकसित देश स्वीकार किया जाता है।
(क) निरपेक्ष निर्धनता
निरपेक्ष निर्धनता समाज के उस वर्ग को संबोधित करती है जिसके पास जीवन की न्यूनतम आवश्यकताएं भी नहीं होती अथवा वह जीवन के न्यूनतम स्तर को प्राप्त करने में असफल रहते हैं। इसे निम्न दो विधियों के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है -
(i) न्यूनतम कैलोरिज विधि
(ii) न्यूनतम उपभोग व्यय विधि
(i) न्यूनतम कैलोरिज विधि - योजना आयोग 1977 ने निर्धनता रेखा को कैलोरिज के उपभोग के आधार पर परिभाषित किया। कैलोरिज की प्राप्ति अनाज संबंधी वस्तुओं के उपभोग पर निर्भर करती है। इसने 2400 कैलोरिज प्रति दिन प्रति व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्र के लिए तथा 2100 कैलोरीज प्रति व्यक्ति प्रतिदिन शहरी क्षेत्र के लिए परिभाषित की। इस स्तर के नीचे उपभोग करने वाले लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं।
(ii) न्यूनतम उपभोग व्यय विधि-भारत में गरीबी निर्धारित करने के बहुत से अनुमान प्रति व्यक्ति, प्रति मास न्यूनतम उपभोग व्यय पर आधारित है। यह ग्रामीण तथा शहरी वर्ग के लिए अलग-अलग राशि होती है। 1993-94 की कीमतों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए न्यूनतम उपभोग व्यय 229.80 रूपये तथा शहरी क्षेत्र के लिए प्रति व्यक्ति व्यय 264 रू. निर्धारित किया गया है। इस स्तर के नीचे रह रहे लोग गरीबी रेखा से नीचे स्वीकार किए जाते हैं।
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