अदत्त विक्रेता के अधिकार - unpaid seller's rights
अदत्त विक्रेता के अधिकार - unpaid seller's rights
अदत्त विक्रेता को प्राप्त अधिकारों को मोटे रूप में निम्नलिखित दो भागों में बाँटा जा सकता है:
1) क्रेता के विरूद्ध अधिकार
2) माल के विरूद्ध अधिकार
1) क्रेता के विरूद्ध अधिकार
I. मूल्य के लिए बाद प्रस्तुत करना- विक्रय अनुबंध के अनुसार यदि क्रेता को माल का स्वामित्व हस्तांतरित हो चुका हो और क्रेता अनुबंध की शर्तों के अनुसार मूल्य चुकाने में उपेक्षा करता है. अथवा इन्कार करता है, तो विक्रेता क्रेतापर माल के मूल्य के भुगतान के लिए वाद प्रस्तुत कर सकता है।
यदि विक्रय अनुबंध के अनुसार माल की सुपुर्दगी को ध्यान दिये बिना मूल्य का भुगतान होना तय हुआ है और क्रेता उस दिन मूल्य का भुगतान करने में असमर्थ रहता है, तो विक्रेता क्रेता पर मूल्य के भुगतान के लिए वाद प्रस्तुत कर सकता है।
II. क्षतिपूर्ति के लिए वाद प्रस्तुत करना वस्तु विक्रय अधिनियमकी धारा 56 के अनुसार, यदि क्रेता दोषपूर्ण ढंग से माल स्वीकार करने तथा मूल्य का भुगतान करने की उपेक्षा करता है अथवा इन्कार करता है तो ऐसी अस्वीकृतिसे उत्पन्न हानि की पूर्ति के लिए विक्रेता क्रेता पर बाद प्रस्तुत कर सकता है।
IIl. निश्चित तिथि से पूर्व अनुबंध का खंडन करने का अधिकार वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 60 के अनुसार, यदि सुपुर्दगी की तिथि से पूर्व ही क्रेता अनुबंध का खंडन कर देता है
तो विक्रेता अपनी इच्छानुसार अनुबंध को चालु समझकर सुपुर्दगी की तिथि तक प्रतीक्षा कर सकता है। अथवा उस दिन अनुबंध का खंडन हुआ मानकर क्रेता पर क्षतिपूर्ति के लिए वाद प्रस्तुत कर सकता है।
IV. ब्याज के लिए बाद प्रस्तुत करना- वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 61 (1) के अनुसार, यदि विक्रेता तथा क्रेता के बीच माल के मूल्य के भुगतान की तिथि निश्चित है तो उस तिथि के बाद भुगतान नहीं करने की दशा में क्रेता द्वारा ब्याज चुकाने का प्रावधान है, तो विक्रेता क्रेता के विरूद्ध व्याज प्राप्त करने के लिए वाद प्रस्तुत कर सकता है।
माल के विरूद्ध अधिकार
1. माल के स्वामित्व के हस्तांतरण होने की स्थितिमें
2. यदि माल के स्वामित्व का हस्तांतरण न हुआ हो तो माल को अपने पास रोकने का अधिकार।
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