अस्पष्ट बाजार विपणन रणनीति - vague market marketing strategy

अस्पष्ट बाजार विपणन रणनीति - vague market marketing strategy


एक कंपनी प्रथम चरण में सामूहिक विपणन रणनीति अपनाने का प्रयोग करती है यह मार्केट को व्यक्गित खड़ों में विभाजन करने की ओर अग्रसर होती है। कंपनी समस्त मार्केट के लिए समान रूप में विपणन रणनीति बनाती है। कंपनी आशा करती है कि वह व्यक्तिगत अथवा ग्राहक समूह का उसकी आवश्यकताओं एवं जरूरतों की आपूर्ति व्यवस्थित ढंग से कर सकती है। किसी क्षेत्र में नयी कंपनी आमतौर पर इस प्रकार की विपणन रणनीति को अपनाती है। एक स्तर पर उसका कोई प्रतियोगी नहीं होता अत ग्राहक समूह की आवश्यकताओं की वह सही प्रकार से पूर्ति कर संतुष्ट होता है। अतीत में क्योंकि ग्राहक के पास उस विशिष्ट उत्पाद के क्रय के अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं होता. इसलिए समान विपणन रणनीति में यहां फोर्ड टी मॉडल ही उदाहराणार्थ होता है।


कंपनिया जो प्रथम चरण पर अस्पष्ट विपणन रणनीति का अनुपालन करती है अंततः उत्पादन व विपणन व्यय में बचत करती है जब कंपनी एक उत्पाद के विपणन में संतुष्ट हो जाती है तो वह उस उत्पाद के सामूहिक उत्पादन में अपना ध्यान केन्द्रित करती है। इस अवस्था में जब आपूर्तिकर्ता केवल एक उत्पाद का प्रयोजन करने में सफल होती है तो वह वितरण हेतु एकल मार्ग का चयन करती है। परन्तु अस्पष्ट मार्केट खडीकरण को एक उन्मुक्त विपणन रणनीति कठिन होती है। इसलिए कंपनिया प्रतियोगियों की अवांछित उपस्थिति के कारण अपनी रणनीति छोटे समूहों पर ध्यानानार्थ होते हैं।