औद्योगिक विकास की कमजोरियां / दुर्बलताएं - Weaknesses / Weaknesses of Industrial Development

औद्योगिक विकास की कमजोरियां / दुर्बलताएं - Weaknesses / Weaknesses of Industrial Development


यद्यपि योजना अवधि के दौरान भारत ने औद्योगिक क्षेत्र की अनेक दिशाओं में प्रगति की है किंतु इस सबके वजूद भी यह प्रगति हमारी आशाओं के अनुसार नहीं हो पाई है। भारत में औद्योगिक विकास के क्षेत्र में प्रमुख रूप से निम्नलिखित कमियां व कमजोरियां ध्यान में आई हैं -


(i) धीमा विकास - भारत में औद्योगिक विकास की गति धीमी एवं अपर्याप्त रही है। औद्योगिक विकास की दर कुल लक्ष्यों से पीछे ही रही है।


(ii) बेरोजगारी दूर करने में असफल:- पश्चिम की पूंजीगहन तकनीक अपनाई जाने के कारण हमारे देश के बड़े उद्योग बेरोजगारी की समस्या को हल नहीं कर पाए हैं।


(iii) क्षेत्रीय असमानता:- भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जिस प्रकार उद्योगों-धंधों की स्थापना व प्रगति हुई है उसके कारण क्षेत्रीय असमानता घटने की बजाय और अधिक बढ़ गई हैं। 


(iv) क्षमताओं का अधूरा उपयोग हमारे उद्योगों के पास जितनी उत्पादन क्षमताएं मौजूद हैं, उनको पूरा-पूरा उपयोग नहीं कर पाए हैं। इससे देश के पूँजीगत साधनों का अपव्यय हो रहा है ।


(v) केंद्रीयकरण:- भारत में औद्योगिक विकास का जो ढांचा उभर कर आया है उसके कारण धन और संपत्तित का केंद्रीयकरण कुछ थोडे से औद्योगिक घरानों के हाथों में बंट गया है। 


(vi) विदेशी निर्भरता - विदेशी पूंजी व तकनीक को अपनाया गया है, इसके कारण विदेशी निर्भरता बढी है।


(vii) विकास में रूकावट - भारत में पूजी की कमी, निम्न उत्पादकता स्तर, प्रशिक्षित कर्मचारियों एवं कुशल प्रबंध के अभाव के कारण औद्योगिक विकास के मार्ग में रूकावटें आती रही है। अतः आगे आने वाले वर्षों मे हमें अपनी इन कमियों को दूर करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि औद्योगिक विकास की गति को तीव्र किया जा सके।