क्या साख पूँजी है - What is credit capital?
क्या साख पूँजी है - What is credit capital?
साख पूँजी के रूप में उत्पादन में सहायक होती है अथवा नहीं? इस विषय पर अर्थशास्त्रियों में काफी मतभेद पाया जाता है। एक ओर तो मॅकलियोड का विचार है कि मुद्रा और साख दोनों पूँजी हैं। व्यापारिक साख व्यापारिक पूँजी है।" इस विचार का आधार यह है कि साख पत्रों का मुद्रा की तरह प्रयोग किया जाता है तथा इनकी सहायता से उत्पति के अन्य साधन - श्रम, भूति आदि खरीदे जा सकते है। दूसरी ओर रिकार्डो तथा मिल साख को पूँजी नहीं मानते। रिकार्डो के अनुसार साख पूँजी का सृजन नहीं करती है, यह तो बस इतना निर्धारित करती है कि पूँजी का प्रयोग किसके द्वारा होना चाहिए। मिल ने लिखा है, उधार देने मात्र से पूँजी का निर्माण नहीं होता, ऐसी स्थिति में तो केवल उस पूँजी का जो पहले से ही ऋणदाता के पास थी ऋणी को हस्तान्तरण होता है।
साख तो केवल दूसरे की पूँजी का उपयोग करने का अधिकार है। इससे उत्पति के साधनों को बढ़ाया नहीं जा सकता, उनका केवल हस्तांतरण हो सकता है।
अधिकतर अर्थशास्त्री साख को पूँजी नहीं मानते, क्योंकि -
(1) साख द्वारा पूँजी का केवल हस्तांतरण होता है, पूजी का निर्माण नहीं होता। इसी के माध्यम से एक व्यक्ति की पूँजी पर दूसरे को अधिकार प्राप्त होता है। कभी-कभी साख अनुत्पादक संचय को हस्तांतरण द्वारा उत्पादक कार्यों में लगाती है परंतु इसको पूँजी का निर्माण तो नहीं कहा जा सकता। यह केवल निष्क्रिय पूँजी का सक्रिय होना है।
(2) जिस प्रकार पूँजी और श्रम उत्पति के साधन है उस प्रकार साख उत्पत्ति का एक स्वतंत्र साधन नहीं है। इसमें संदेह नहीं कि साख एक ऐसी रीति है, जिससे उत्पादन में सहायता प्राप्त होती है परंतु स्वयं साख को उत्पति का साधन नहीं माना जा सकता।
(3) साख पत्र स्वयं पूँजी नहीं होते, वे केवल पूँजी का प्रतिनिधित्व करते हैं। साख पत्र धन के हस्तातरण का केवल एक साधन है। इस प्रकार साख केवल साधन है, साध्य नहीं है। साख की सहायता से पूँजी प्राप्त की जा सकती है, परंतु साख स्वयं पूँजी नहीं है।
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